जयपुर | जयपुर शहर की सबसे व्यस्त और लाइफलाइन मानी जाने वाली सीकर रोड पर अब सफर पहले से कहीं ज्यादा आसान और तेज हो गया है। चौमूं पुलिया से विश्वकर्मा रोड नंबर 14 तक बीआरटीएस कॉरिडोर हटने के बाद सड़क 5 से 6 मीटर तक चौड़ी हो गई है। इसका असर अब जमीन पर साफ दिखने लगा है।
जयपुर: सीकर रोड पर जाम से बड़ी राहत: जयपुर सीकर रोड पर यातायात हुआ सुगम: BRTS कॉरिडोर हटने से सड़क हुई चौड़ी, अब बिना रुके सरपट दौड़ेंगे वाहन
जयपुर की लाइफलाइन मानी जाने वाली सीकर रोड पर बीआरटीएस कॉरिडोर हटने के बाद यातायात की स्थिति में बड़ा सुधार हुआ है। सड़क चौड़ी होने और नया ड्रेनेज सिस्टम बनने से लाखों यात्रियों को जाम और जलभराव से मुक्ति मिली है।
HIGHLIGHTS
- बीआरटीएस कॉरिडोर हटने से सीकर रोड की चौड़ाई दोनों तरफ 5 से 6 मीटर तक बढ़ गई है।
- चौमूं पुलिया से रोड नंबर 14 तक अब यातायात बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से चल रहा है।
- नया ड्रेनेज सिस्टम विकसित होने से बारिश के दौरान होने वाले भारी जलभराव की समस्या का समाधान हुआ।
- खेतान क्षेत्र सहित प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल फिर से चालू होने से सड़क हादसों में बड़ी कमी आई है।
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जाम की समस्या का हुआ स्थायी समाधान
सीकर रोड पर पहले हर घंटे जाम की स्थिति बनी रहती थी। संकरी सड़क और बीच में बीआरटीएस कॉरिडोर के कारण वाहनों का दबाव संभालना मुश्किल होता था। अब कॉरिडोर हटने से वाहनों को पर्याप्त जगह मिल रही है और वे बिना रुके सरपट दौड़ रहे हैं।
लाखों यात्रियों के लिए बड़ी राहत
सीकर रोड से गुजरने वाले लाखों लोगों के लिए यह बदलाव किसी वरदान से कम नहीं है। इस मार्ग का महत्व सिर्फ जयपुर तक सीमित नहीं है। यह मार्ग सीकर, खाटूश्यामजी, सालासर बालाजी और बीकानेर जैसे प्रमुख स्थानों को जोड़ता है। रोजाना लाखों वाहनों का दबाव इस रोड पर रहता है। खासकर रोड नंबर 14 और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में जाम एक आम बात थी। इससे न केवल आम जनता बल्कि व्यापारिक गतिविधियां भी बुरी तरह प्रभावित होती थीं।
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मजबूत ड्रेनेज सिस्टम और जलभराव से मुक्ति
सीकर रोड पर ड्रेनेज सिस्टम विकसित होने से जलभराव की पुरानी समस्या से भी राहत मिली है। स्थानीय निवासी राधेश्याम शर्मा ने बताया कि बारिश के दिनों में जलभराव से काफी परेशानी होती थी। पहले लोग बारिश में इस मार्ग से गुजरने से बचते थे। अब मजबूत ड्रेनेज सिस्टम के कारण बारिश का पानी सड़कों पर जमा नहीं होता। इससे न केवल यातायात सुगम हुआ है, बल्कि वाहनों के खराब होने की घटनाओं में भी कमी आई है। सड़क की उम्र भी अब बढ़ने की उम्मीद है।
सड़क का नया और आधुनिक स्वरूप
अब सड़क की चौड़ाई दोनों ओर करीब 13-13 मीटर कर दी गई है। इसके साथ ही बीच में लगभग 3 मीटर चौड़ा एक सुंदर मीडियन बनाया गया है। इससे ट्रैफिक का बेहतर प्रबंधन हो रहा है और वाहन चालकों को स्पष्ट लेन मिल रही है। नया स्वरूप न सिर्फ यातायात को सुगम बना रहा है, बल्कि ड्राइविंग को भी सुरक्षित और सहज कर रहा है। रात के समय भी बेहतर लाइटिंग और चौड़ी सड़क के कारण वाहन चालकों को काफी आसानी हो रही है।
ट्रैफिक सिग्नल की नई व्यवस्था से सुरक्षा
लंबे समय से बंद पड़े ट्रैफिक सिग्नल अब फिर से चालू कर दिए गए हैं। खेतान क्षेत्र सहित कई प्रमुख चौराहों पर नए डिजाइन के स्मार्ट सिग्नल लगाए गए हैं। इससे ट्रैफिक का प्रवाह अब पूरी तरह से नियंत्रित और संतुलित रहता है। स्थानीय निवासी पंकज पचलंगिया का कहना है कि सिग्नल शुरू होने से दुर्घटनाओं में भारी कमी आई है। पहले अव्यवस्थित ट्रैफिक के कारण आए दिन हादसे होते थे। अब सिग्नल होने से लोग नियमों का पालन कर रहे हैं और सुरक्षा बढ़ी है।
व्यापारियों और उद्यमियों में खुशी की लहर
व्यापारी पंकज गोयल के अनुसार, बीते 4-5 साल में पहली बार खेतान के सामने ट्रैफिक सिग्नल चालू हुए हैं। पहले यहां अक्सर हादसे होते थे और जाम की स्थिति रहती थी। विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र (VKI) के लिए भी यह बड़ी राहत है। औद्योगिक क्षेत्र में माल ले जाने वाले ट्रकों को अब घंटों जाम में नहीं फंसना पड़ता। इससे लॉजिस्टिक लागत में कमी आएगी और समय की बचत होगी। क्षेत्र के विकास को इससे एक नई गति मिलने की पूरी संभावना है।
धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
चूंकि यह मार्ग खाटूश्यामजी और सालासर बालाजी जैसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों की ओर जाता है, इसलिए श्रद्धालुओं को भी अब जयपुर से बाहर निकलने में कम समय लगेगा। विशेषकर मेलों और त्योहारों के दौरान होने वाली भीड़ को अब आसानी से नियंत्रित किया जा सकेगा।
आगामी बुनियादी ढांचा परियोजनाएं
जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) इस क्षेत्र में और भी सुधार की योजना बना रहा है। आने वाले समय में कुछ अन्य व्यस्त चौराहों को सिग्नल फ्री करने की भी तैयारी है। इससे सीकर रोड जयपुर की सबसे आधुनिक सड़कों में से एक बन जाएगी। कुल मिलाकर, सीकर रोड का यह कायाकल्प जयपुर की शहरी गतिशीलता (Urban Mobility) के लिए एक मील का पत्थर साबित हो रहा है। प्रशासन के इस कदम की चौतरफा सराहना हो रही है।
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