जालोर | राजस्थान के जालोर जिले में इन दिनों आपेश्वर पशु मेले की रौनक छाई हुई है। लेकिन इसी रौनक के बीच रविवार को एक भीषण हादसा हो गया। रानीवाड़ा क्षेत्र के सेवाडिया गांव में आयोजित इस मेले में घुड़दौड़ प्रतियोगिता चल रही थी।
जालोर में बेकाबू घोड़ों का तांडव: जालोर के सेवाडिया पशु मेले में घुड़दौड़ के दौरान हादसा: बेकाबू घोड़ों ने दर्शकों को कुचला, तीन लोग गंभीर रूप से घायल
जालोर के रानीवाड़ा स्थित सेवाडिया गांव में आयोजित आपेश्वर पशु मेले में घुड़दौड़ के दौरान एक बड़ा हादसा हो गया। रेस खत्म होते ही दो बेकाबू घोड़े भीड़ में घुस गए, जिससे तीन लोग बुरी तरह घायल हो गए जिन्हें इलाज के लिए रेफर किया गया है।
HIGHLIGHTS
- जालोर के आपेश्वर पशु मेले में घुड़दौड़ के दौरान हुआ बड़ा हादसा।
- बेकाबू होकर भीड़ में घुसे दो घोड़े, तीन लोग हुए गंभीर रूप से घायल।
- घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद भीनमाल अस्पताल रेफर किया गया।
- यह ऐतिहासिक मेला 1955 से हर साल अप्रैल में आयोजित किया जाता है।
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भीड़ में घुसे बेकाबू घोड़े
मेले के चौथे दिन शाम करीब 3 बजे घुड़दौड़ का आयोजन किया गया था। इस रोमांचक रेस को देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण और पशु प्रेमी जुटे थे। जैसे ही रेस खत्म हुई, दो घोड़े अचानक दिशा भटक गए और बेकाबू हो गए। घुड़सवारों ने उन्हें रोकने की पूरी कोशिश की, लेकिन घोड़ों की रफ्तार इतनी तेज थी कि वे सीधे दर्शकों के बीच जा घुसे। वहां खड़े लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और घोड़े उन्हें कुचलते हुए आगे निकल गए।
हादसे में तीन लोग गंभीर घायल
इस अचानक हुए हमले से मौके पर भगदड़ मच गई। हादसे में तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घायलों की पहचान धुब्डिया निवासी जबराराम भील, रानीवाड़ा निवासी नवल सिंह देवड़ा और मंडार निवासी शैतान सिंह राणावत के रूप में हुई है। घायलों को तत्काल एम्बुलेंस की मदद से रानीवाड़ा अस्पताल ले जाया गया। वहां मौजूद डॉक्टरों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें भीनमाल के बड़े अस्पताल में रेफर कर दिया है। फिलहाल तीनों का इलाज जारी है।
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1955 से लग रहा है यह मेला
आपेश्वर पशु मेला जालोर की सांस्कृतिक पहचान है। यह मेला साल 1955 से लगातार आयोजित किया जा रहा है। हर साल अप्रैल के महीने में यहाँ राजस्थान के विभिन्न जिलों और पड़ोसी राज्य गुजरात से हजारों व्यापारी आते हैं। यह मेला विशेष रूप से बैलों, घोड़ों और ऊंटों की खरीद-फरोख्त के लिए प्रसिद्ध है। मेले के दौरान कई तरह की पशु प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती हैं, जो स्थानीय लोगों के आकर्षण का मुख्य केंद्र होती हैं।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस हादसे के बाद मेले की सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लग गए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि रेस ट्रैक के चारों ओर उचित घेराबंदी नहीं थी। अगर दर्शकों और ट्रैक के बीच दूरी होती तो यह हादसा टाला जा सकता था। प्रशासन अब मामले की जांच कर रहा है। मेले में आए लोगों में इस घटना के बाद डर का माहौल है। हालांकि, मेला अभी भी जारी है, लेकिन सुरक्षा को लेकर अब अधिक सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
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