जालोर | जालोर खनिज विभाग में बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है, जिसमें विभागीय अधिकारियों की भूमिका सवालों के घेरे में है। पिछले एक साल में अवैध खनन और रॉयल्टी चोरी से जुड़ी 40 से अधिक शिकायतें मिलने के बावजूद, विभाग के माइनिंग इंजीनियर (एमई) नरेंद्र खटीक पर समय पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप है।
खनिज विभाग में बड़ा खेल: जालोर: 40 शिकायतें, 10 करोड़ का घपला, अफसर पर inaction
जालोर में खनिज विभाग की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। एमई नरेंद्र खटीक पर एक साल में 40 से ज्यादा शिकायतों को नजरअंदाज करने का आरोप है, जिससे सरकार को 10 करोड़ से अधिक का राजस्व घाटा हुआ।
HIGHLIGHTS
- जालोर खनिज विभाग के एमई नरेंद्र खटीक के पास एक साल में 40 से ज्यादा शिकायतें पहुंचीं, पर कार्रवाई नहीं हुई।
- कुआबेर की दो माइंस पर लीज सीमा से बाहर खनन करने पर 3.50 करोड़ रुपए के पंचनामे बनाए गए।
- अवैध खनन और रॉयल्टी चोरी से सरकार को 10 करोड़ रुपए से ज्यादा के राजस्व नुकसान का आरोप है।
- सांचौर के डूंगरी में दो साल के ई-रवन्ने संदिग्ध पाए गए, जांच में कच्ची पर्चियां भी बरामद हुईं।
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शिकायतों का अंबार, पर कार्रवाई नदारद
सूत्रों के अनुसार, एमई नरेंद्र खटीक के कार्यालय में पिछले एक वर्ष में अवैध खनन और रॉयल्टी में गड़बड़ी को लेकर 40 से ज्यादा शिकायतें दर्ज कराई गईं।
इन शिकायतों में रानीवाड़ा, सांचौर के डूंगरी, और जालोर के कुआबेर व कोलर क्षेत्र में हो रही अनियमितताओं का जिक्र था।
विभागीय आदेशों की भी अवहेलना
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न केवल आम लोगों की शिकायतों को नजरअंदाज किया गया, बल्कि विभाग के उच्च स्तर से मिले जांच के निर्देशों की भी अवहेलना की गई। समय पर कार्रवाई न होने से अवैध खनन करने वालों के हौसले बुलंद रहे।
कुआबेर में 3.50 करोड़ का अवैध खनन उजागर
मामले के तूल पकड़ने के बाद जब विभागीय जांच शुरू हुई, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। कुआबेर क्षेत्र में दो माइंस पर बड़े पैमाने पर अवैध खनन पाया गया।
जांच टीम ने पाया कि दोनों माइंस में लीज सीमा से काफी बाहर जाकर खनन किया गया था।
करोड़ों के पंचनामे तैयार
इस बड़ी गड़बड़ी पर कार्रवाई करते हुए विभाग ने पंचनामे तैयार किए हैं।
- एक माइंस पर करीब 2 करोड़ रुपए का पंचनामा बनाया गया।
- दूसरी माइंस पर लगभग 1.50 करोड़ रुपए का पंचनामा तैयार किया गया।
इसके अलावा, कुआबेर में कच्ची पर्चियों के जरिए रॉयल्टी वसूलने की भी 10 से ज्यादा शिकायतें मिली थीं, जिन पर कोई एक्शन नहीं लिया गया।
सरकारी खजाने को 10 करोड़ से ज्यादा का चूना
इन सभी अनियमितताओं के केंद्र में रॉयल्टी ठेका फर्म 'सरताज' की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है। एक अनुमान के मुताबिक, पिछले एक साल में हुई इन गड़बड़ियों से सरकारी खजाने को 10 करोड़ रुपए से भी अधिक का राजस्व नुकसान हुआ है।
ठेका फर्म पर क्यों नहीं हुई कार्रवाई?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब लगातार शिकायतें आ रही थीं और राजस्व का नुकसान हो रहा था, तो ठेका फर्म के खिलाफ समय रहते कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई? इससे अधिकारियों और ठेका फर्म की मिलीभगत की आशंका बढ़ गई है।
डूंगरी में भी मिला फर्जीवाड़े का सबूत
विभाग ने सांचौर के डूंगरी क्षेत्र में भी तीन दिवसीय जांच अभियान चलाया, जिसके लिए सिरोही से फोरमैन सुमन मेघवाल को नियुक्त किया गया।
जांच के दौरान ई-रवन्ना की जगह इस्तेमाल हो रही 5 कच्ची पर्चियां और टोकन बरामद किए गए।
दो साल का रिकॉर्ड संदिग्ध
जांच रिपोर्ट में पिछले दो वर्षों में जारी किए गए सभी ई-रवन्नों को संदिग्ध मानते हुए उनकी विस्तृत जांच की सिफारिश की गई है। इससे एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश होने की संभावना है।
ओवरलोडिंग का खेल
जांच में यह भी सामने आया कि वाहनों में क्षमता से अधिक खनिज भरा जाता था, लेकिन रवन्ने में वजन कम दिखाकर रॉयल्टी चोरी की जा रही थी। हालांकि, वाहन चालकों से पूरी मात्रा की रॉयल्टी वसूले जाने की बात भी सामने आई है।
अब कौन लेगा जिम्मेदारी?
कुआबेर में करोड़ों के पंचनामे और डूंगरी में दो साल के रिकॉर्ड को संदिग्ध बताए जाने के बाद अब जिम्मेदार अधिकारियों और ठेका फर्म की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सवाल यह है कि जब एक साल तक शिकायतें आती रहीं, तो कार्रवाई के लिए किसका इंतजार किया जा रहा था?