जयपुर | राजस्थान में सरकारी नौकरियों की परीक्षाओं में पेपर लीक का ग्रहण थमने का नाम नहीं ले रहा है। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए कनिष्ठ अभियंता (JEN) संयुक्त भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में फरार चल रहे मुख्य आरोपी भीम सिंह को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है।
JEN पेपर लीक: मास्टरमाइंड गिरफ्तार: JEN भर्ती पेपर लीक: RPF से VRS लेकर बना मास्टरमाइंड, 25 लाख में बेचता था पेपर, SOG ने भीम सिंह को दबोचा
राजस्थान एसओजी ने JEN भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में फरार कोचिंग संचालक भीम सिंह को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने टैबलेट के जरिए अभ्यर्थियों को पेपर पढ़ाया और लाखों की वसूली की।
HIGHLIGHTS
- एसओजी ने कनिष्ठ अभियंता (JEN) भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में फरार मुख्य आरोपी भीम सिंह को गिरफ्तार किया है।
- आरोपी आरपीएफ से वीआरएस लेने के बाद कोचिंग चला रहा था और प्रत्येक अभ्यर्थी से 25-25 लाख रुपये वसूले थे।
- पेपर लीक करने के लिए सैमसंग टैबलेट और एपल आईपैड जैसे डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल किया गया था।
- भीम सिंह पूर्व में सीएचओ, कांस्टेबल और हाईकोर्ट एलडीसी भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक में भी शामिल रहा है।
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कौन है गिरफ्तार आरोपी भीम सिंह?
गिरफ्तार आरोपी भीम सिंह (46) मूल रूप से अलवर के हरसोरा का निवासी है और हाल ही में वह कोटपूतली-बहरोड़ के बानसूर इलाके में रह रहा था। भीम सिंह का इतिहास काफी चौंकाने वाला है। वह पहले रेलवे सुरक्षा बल (RPF) में कार्यरत था। नौकरी के दौरान ही उसने अपराध की दुनिया में कदम रखने की योजना बनाई और आरपीएफ से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली। वीआरएस लेने के बाद उसने बानसूर क्षेत्र में अपना एक कोचिंग संस्थान खोला, जो केवल एक दिखावा था।
कोचिंग और कंप्यूटर लैब की आड़ में काला धंधा
भीम सिंह ने कोचिंग संस्थान के साथ-साथ जयपुर में एक कंप्यूटर लैब भी संचालित की। यह लैब विशेष रूप से ऑनलाइन परीक्षाओं के लिए बनाई गई थी। इसी लैब और कोचिंग की आड़ में वह पेपर लीक गिरोह का नेटवर्क चला रहा था। एसओजी की जांच में सामने आया है कि भीम सिंह का संपर्क कुख्यात पेपर लीक माफिया भूपेंद्र सारण से आरपीएफ में नौकरी के दौरान ही हुआ था। दोनों ने मिलकर राजस्थान की कई बड़ी परीक्षाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया।
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टैबलेट और आईपैड से लीक हुआ पेपर
इस गैंग का काम करने का तरीका बेहद आधुनिक और शातिर था। एडीजी विशाल बंसल ने बताया कि आरोपी भीम सिंह और उसके साथियों ने कैंडिडेट्स को पेपर रटाने के लिए कागज का नहीं, बल्कि डिजिटल उपकरणों का सहारा लिया था। उन्होंने सैमसंग टैबलेट और एपल आईपैड का उपयोग किया ताकि पेपर का कोई भौतिक साक्ष्य आसानी से न मिल सके। अभ्यर्थियों को एक सुरक्षित स्थान पर इकट्ठा किया जाता था और उन्हें इन डिजिटल डिवाइसेज पर प्रश्नपत्र पढ़ाया जाता था।
25 से 30 लाख रुपये में होता था सौदा
सरकारी नौकरी की चाह रखने वाले युवाओं से यह गिरोह मोटी रकम वसूलता था। जांच में यह तथ्य सामने आया है कि प्रत्येक अभ्यर्थी से 25 से 30 लाख रुपये लिए गए थे। यह पैसा गैंग के सभी सदस्यों में बांटा जाता था। हैरानी की बात यह है कि भीम सिंह ने जिस टैबलेट का उपयोग पेपर लीक करने के लिए किया था, उसे बाद में अपनी ही बेटी को इस्तेमाल करने के लिए दे दिया। एसओजी ने उस टैबलेट को बरामद कर लिया है, जो अब सबसे बड़ा सबूत बनेगा।
JEN भर्ती परीक्षा का विवादित इतिहास
कनिष्ठ अभियंता संयुक्त भर्ती परीक्षा का आयोजन पहली बार दिसंबर 2020 में किया गया था। उस समय सांगानेर थाने में पेपर लीक और धांधली की एफआईआर दर्ज हुई थी, जिसके बाद सरकार को यह परीक्षा निरस्त करनी पड़ी थी। इसके बाद सितंबर 2021 में दोबारा कनिष्ठ अभियंता (सिविल) की परीक्षा आयोजित हुई। लेकिन एसओजी की जांच में खुलासा हुआ कि दोबारा हुई परीक्षा का पेपर भी इन माफियाओं ने पहले ही निकाल लिया था। इस पर जनवरी 2024 में नई एफआईआर दर्ज की गई।
मास्टरमाइंड्स का बड़ा नेटवर्क
भीम सिंह अकेला इस खेल में शामिल नहीं था। एसओजी पहले ही इस मामले में जगदीश बिश्नोई, गणपत मालवाड़ा, अनिल उर्फ शेर सिंह मीणा और भूपेंद्र सारण जैसे बड़े नामों को गिरफ्तार कर चुकी है। भीम सिंह इन सभी के बीच एक कड़ी के रूप में काम कर रहा था। वह अभ्यर्थियों को खोजने, उन्हें जयपुर लाने और टैबलेट के जरिए पेपर पढ़ाने की जिम्मेदारी संभालता था। उसकी गिरफ्तारी से इस नेटवर्क की कई और परतें खुलने की उम्मीद है।
कई अन्य परीक्षाओं में भी था शामिल
एसओजी की प्राथमिक पूछताछ में भीम सिंह ने स्वीकार किया है कि वह केवल JEN परीक्षा तक ही सीमित नहीं था। वह 2020 की सीएचओ (CHO) भर्ती, 2022 की कांस्टेबल भर्ती और राजस्थान हाईकोर्ट एलडीसी भर्ती परीक्षा के पेपर लीक में भी शामिल था। यह खुलासा राजस्थान की पूरी परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। एक पूर्व पुलिसकर्मी का इस तरह के अपराधों में लिप्त होना सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी चिंता का विषय है।
कैसे हुई गिरफ्तारी?
भीम सिंह काफी समय से एसओजी की रडार पर था, लेकिन वह लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था। एसओजी की टीम ने तकनीकी सर्विलांस और मुखबिरों के जाल के जरिए उसे 17 अप्रैल को धर दबोचा। एडीजी विशाल बंसल ने बताया कि भीम सिंह से फिलहाल गहन पूछताछ की जा रही है। एसओजी यह जानने की कोशिश कर रही है कि पेपर लीक का मुख्य स्रोत क्या था और क्या विभाग के अंदर का कोई व्यक्ति इस साजिश में शामिल था।
अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़
राजस्थान में बार-बार होने वाले पेपर लीक ने लाखों मेहनती युवाओं के सपनों को तोड़ दिया है। भीम सिंह जैसे लोग चंद पैसों के लिए उन छात्रों का हक मार रहे हैं जो सालों तक दिन-रात मेहनत करते हैं। अब एसओजी उन अभ्यर्थियों की भी सूची तैयार कर रही है जिन्होंने भीम सिंह को पैसे देकर पेपर खरीदा था। इन सभी अभ्यर्थियों पर भी कानूनी गाज गिरना तय है और उन्हें भविष्य की परीक्षाओं से डिबार किया जा सकता है।
एसओजी की अगली कार्रवाई
एसओजी का कहना है कि वे इस मामले में 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपना रहे हैं। भीम सिंह के बैंक खातों और संपत्तियों की भी जांच की जा रही है। यह देखा जा रहा है कि पेपर लीक के पैसों से उसने कहां-कहां निवेश किया है। आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां संभव हैं। सरकार और प्रशासन पर भी दबाव है कि वे ऐसी व्यवस्था बनाएं जिससे भविष्य में किसी भी परीक्षा का पेपर लीक न हो सके।
निष्कर्ष
भीम सिंह की गिरफ्तारी राजस्थान में पेपर लीक माफियाओं के खिलाफ एक बड़ी जीत है। लेकिन सवाल वही है कि क्या ये गिरफ्तारियां काफी हैं? जब तक सिस्टम की खामियों को दूर नहीं किया जाता, तब तक युवाओं का विश्वास बहाल करना मुश्किल होगा। एसओजी की यह कार्रवाई उन सभी लोगों के लिए एक चेतावनी है जो शिक्षा के मंदिर को व्यापार और अपराध का अड्डा बना रहे हैं। भीम सिंह से बरामद टैबलेट अब इस पूरे घोटाले के राज खोलेगा।
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