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राजस्थान

झालावाड़ में किसानों का उग्र आक्रोश: झालावाड़: समर्थन मूल्य और मुआवजे पर किसानों का उग्र प्रदर्शन

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भारतीय किसान संघ ने समर्थन मूल्य और मुआवजे को लेकर कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, दी आंदोलन की चेतावनी।

HIGHLIGHTS

  • झालावाड़ में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद के लक्ष्यों में भेदभाव का आरोप लगाया गया है।
  • बारदान की भारी कमी के कारण पिछले आठ दिनों से किसानों की गेहूं खरीद ठप पड़ी है।
  • जिले के करीब 1.06 लाख किसानों को अब तक फसल खराबे की मुआवजा राशि नहीं मिली है।
  • समस्याएं हल न होने पर किसानों ने 45 डिग्री तापमान में महापड़ाव डालने की चेतावनी दी।
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झालावाड़ | राजस्थान के झालावाड़ जिले में इन दिनों किसानों का आक्रोश सातवें आसमान पर है। समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद और फसल मुआवजे की मांग को लेकर किसानों ने जिला प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

भारतीय किसान संघ के बैनर तले जिलेभर के किसानों ने एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद की है। किसानों ने जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर अपनी व्यथा सुनाई है।

इस ज्ञापन में किसानों ने समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद में हो रहे भेदभाव और बारदान की कमी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया है। किसानों का कहना है कि वे लंबे समय से परेशान हैं।

गेहूं खरीद में क्षेत्रीय भेदभाव का गंभीर आरोप

भारतीय किसान संघ की जिला बैठक किसान भवन झालावाड़ में जिलाध्यक्ष राधेश्याम गुर्जर की अध्यक्षता में आयोजित की गई। इस बैठक में जिले के विभिन्न तहसीलों से आए कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।

चित्तौड़ प्रांत के प्रांत मंत्री जगदीश खाती ने बैठक को संबोधित करते हुए सरकारी नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हाड़ौती क्षेत्र के किसानों के साथ खरीद लक्ष्यों में दोहरा व्यवहार किया जा रहा है।

जगदीश खाती के अनुसार कोटा और बूंदी जिलों में गेहूं खरीद का लक्ष्य 40 प्रतिशत निर्धारित किया गया है। वहीं झालावाड़ और बारां जिलों के लिए यह लक्ष्य मात्र 11 प्रतिशत रखा गया है।

प्रशासनिक उदासीनता से किसान बेहाल

किसानों का आरोप है कि इस कम लक्ष्य के कारण हजारों किसान अपनी फसल सरकारी केंद्रों पर नहीं बेच पा रहे हैं। यह स्थिति किसानों की आर्थिक कमर तोड़ने वाली साबित हो रही है।

प्रशासन की इस नीति से क्षेत्र के किसानों में भारी असंतोष व्याप्त है। किसानों का कहना है कि समान भौगोलिक स्थिति होने के बावजूद उनके साथ ऐसा अन्याय क्यों किया जा रहा है।

बारदान की कमी और खरीद केंद्रों की बंदी

प्रांत पशुपालन प्रमुख किशन पाटीदार ने खरीद केंद्रों पर बारदान यानी बोरियों की कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि पिछले आठ दिनों से बारदान उपलब्ध नहीं होने से तौल बंद है।

सरकारी खरीद की अंतिम तिथि 1 जून निर्धारित की गई है। ऐसे में समय कम होने और बारदान न होने से किसान अपनी उपज लेकर केंद्रों के बाहर डेरा डाले हुए हैं।

मजबूरी में किसानों को अपना कीमती गेहूं बाजार में समर्थन मूल्य से कम दामों पर बेचना पड़ रहा है। बिचौलिए इस स्थिति का फायदा उठाकर किसानों का शोषण कर रहे हैं।

मुआवजे और बीमा राशि का लंबा इंतजार

संभाग उपाध्यक्ष धन सिंह गुर्जर ने बताया कि जिले के लगभग 1 लाख 6 हजार किसानों को मुआवजा राशि नहीं मिली है। यह राशि उनके पिछले फसल खराबे के बदले देय है।

इसके अलावा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ भी चुनिंदा तहसीलों तक सीमित रह गया है। जिले की चार तहसीलों को छोड़कर बाकी किसान बीमा लाभ से पूरी तरह वंचित हैं।

किसानों का कहना है कि प्रीमियम भरने के बावजूद उन्हें समय पर दावों का भुगतान नहीं किया जा रहा है। इससे सरकारी दावों और योजनाओं की जमीनी हकीकत उजागर हो रही है।

"यदि समय रहते किसानों की इन जायज समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो 45 डिग्री की चिलचिलाती धूप में भी किसान जिला मुख्यालय पर महापड़ाव डालेंगे। इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।"

आंदोलन की चेतावनी और भविष्य की रणनीति

जिलाध्यक्ष राधेश्याम गुर्जर ने स्पष्ट किया कि किसान अब और अधिक धैर्य नहीं रखेंगे। उन्होंने प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि समस्याओं का त्वरित निस्तारण अनिवार्य है।

बैठक में निर्णय लिया गया कि यदि मांगों पर विचार नहीं हुआ तो झालावाड़ में अब तक का सबसे बड़ा किसान आंदोलन होगा। किसान अपनी मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे।

इस विरोध प्रदर्शन में भारतीय किसान संघ की जिला और तहसील कार्यकारिणी के तमाम पदाधिकारी शामिल रहे। किसानों ने एकजुटता दिखाते हुए सरकार से न्याय की पुरजोर मांग की है।

झालावाड़ के किसानों का यह संघर्ष आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है। प्रशासन की प्रतिक्रिया और सरकारी कदमों पर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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