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राजनीति

कैलाश चौधरी का बंगाल में धमाका: बंगाल में कैलाश चौधरी का जलवा, 96% रहा स्ट्राइक रेट

प्रदीप बीदावत

कैलाश चौधरी ने बंगाल की 28 में से 27 सीटें जिताकर नया रिकॉर्ड बनाया।

HIGHLIGHTS

  • कैलाश चौधरी ने पश्चिम बंगाल की 28 सीटों के प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाली।
  • इन 28 सीटों में से 27 पर भाजपा ने जीत दर्ज की, जो एक नया कीर्तिमान है।
  • चुनाव के लिए कैलाश चौधरी लगातार 6 महीने तक बंगाल में ही डटे रहे।
  • उन्होंने बाड़मेर की रिफाइनरी जैसे बड़े आयोजनों से भी दूरी बनाए रखी।
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बाड़मेर | पश्चिमी बंगाल के चुनावी मैदान में राजस्थान के दिग्गज नेता कैलाश चौधरी ने अपनी रणनीतिक कुशलता से सबको चौंका दिया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री को पार्टी ने 28 चुनौतीपूर्ण सीटों की कमान सौंपी थी। उन्होंने इन सीटों पर कड़ी मेहनत कर 27 पर जीत सुनिश्चित की।

कैलाश चौधरी का स्ट्राइक रेट इस चुनाव में 96 प्रतिशत रहा है। उनके निजी सहायक के मुताबिक, उन्होंने जिला स्तर से लेकर बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर काम किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की रैलियों का प्रबंधन भी उन्हीं के जिम्मे था।

चुनावी रणनीति के नए शिल्पकार के रूप में उभरे कैलाश

इन रैलियों में उमड़ी भीड़ और बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं का जोश कैलाश चौधरी की मेहनत का परिणाम था। उन्होंने केंद्र सरकार की योजनाओं को घर-घर तक पहुँचाने के लिए माइक्रो-प्लानिंग की थी। इस सफलता ने उन्हें भाजपा के भीतर एक बड़े रणनीतिकार के रूप में स्थापित कर दिया है।

कैलाश चौधरी ने इस जीत के लिए अपना पूरा ध्यान बंगाल पर केंद्रित रखा। वे चुनाव की घोषणा से पहले ही वहां पहुंच गए थे और लगातार छह महीनों तक सक्रिय रहे। इस दौरान उन्होंने अपने गृह क्षेत्र बाड़मेर के बड़े कार्यक्रमों से भी दूरी बनाए रखी।

रिफाइनरी जैसे बड़े आयोजन से भी बनाई दूरी

पचपदरा रिफाइनरी का उद्घाटन कार्यक्रम प्रस्तावित था, जो उनके संसदीय क्षेत्र का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है। इसके बावजूद उन्होंने बंगाल का साथ नहीं छोड़ा। 21 अप्रैल को प्रधानमंत्री द्वारा प्रस्तावित उद्घाटन टलने के बाद भी वे राजस्थान नहीं लौटे और संगठन के कार्यों में जुटे रहे।

उनका मानना था कि चुनावी प्रबंधन में जरा सी भी चूक पार्टी को भारी पड़ सकती है। इसलिए उन्होंने अपनी पूरी ऊर्जा बूथ मैनेजमेंट और रैलियों के सफल क्रियान्वयन में लगा दी। कार्यकर्ताओं के बीच वे खुद जाकर जीत का मंत्र फूंकते रहे।

पार्टी संगठन द्वारा दी गई हर जिम्मेदारी मेरे लिए सर्वोपरि है। बंगाल की जनता ने भाजपा की नीतियों और प्रधानमंत्री के नेतृत्व पर अपना अटूट विश्वास जताया है, जो इन परिणामों में स्पष्ट दिखता है।

बाड़मेर से लेकर दिल्ली तक का राजनीतिक सफर

कैलाश चौधरी 2019 में बाड़मेर लोकसभा सीट से सांसद चुने गए थे। उन्होंने कर्नल मानवेंद्र सिंह को हराकर संसद का सफर तय किया था। इसके बाद उन्हें मोदी सरकार में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री की अहम जिम्मेदारी दी गई थी।

हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में वे त्रिकोणीय मुकाबले के कारण तीसरे स्थान पर रहे। हार के बावजूद उन्होंने संगठन के प्रति अपनी निष्ठा कम नहीं होने दी। वर्तमान में वे राजस्थान भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष के रूप में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

उनकी इस नई उपलब्धि ने राजस्थान की राजनीति में उनके कद को फिर से बढ़ा दिया है। कार्यकर्ताओं के बीच उन्हें अब एक 'विनिंग मशीन' के तौर पर देखा जा रहा है। आने वाले समय में पार्टी उन्हें और भी बड़ी जिम्मेदारियां सौंप सकती है।

*Edit with Google AI Studio

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