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राजनीति

केरल कांग्रेस में सीएम की रेस: केरल विधानसभा चुनाव 2026: कांग्रेस में मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर घमासान, रमेश चेन्निथला और केसी वेणुगोपाल के बीच छिड़ी जंग

मानवेन्द्र जैतावत मानवेन्द्र जैतावत

केरल में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री पद के चेहरे को लेकर खींचतान तेज हो गई है। रमेश चेन्निथला और केसी वेणुगोपाल के समर्थकों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं।

HIGHLIGHTS

  • केरल की 140 विधानसभा सीटों पर 9 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होना है।
  • वरिष्ठ नेता पी जे कुरियन और सांसद के सुधाकरन ने रमेश चेन्निथला को सीएम पद के लिए समर्थन दिया है।
  • कोझिकोड में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच गुटबाजी और पोस्टर फाड़ने की घटनाएं सामने आई हैं।
  • केसी वेणुगोपाल को राहुल गांधी का करीबी माना जाता है और वे भी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल हैं।
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तिरुवनन्तपुरम | केरल की राजनीति में विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। राज्य की 140 विधानसभा सीटों पर 9 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होना है। सत्तारूढ़ एलडीएफ को कड़ी चुनौती देने के लिए तैयार कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ गठबंधन में फिलहाल सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर मचा घमासान

पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री पद के चेहरे को लेकर जबरदस्त खींचतान शुरू हो गई है। हालांकि कांग्रेस ने अभी तक किसी भी नेता को मुख्यमंत्री पद का आधिकारिक उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। इसके बावजूद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की बयानबाजी ने आंतरिक कलह को पूरी तरह सार्वजनिक कर दिया है।

तिरुवल्ला में आयोजित एक महत्वपूर्ण चुनावी सभा के दौरान वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी जे कुरियन ने एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने खुले तौर पर रमेश चेन्निथला को मुख्यमंत्री बनाने की वकालत की। कुरियन ने आत्मविश्वास के साथ कहा कि इस बार केरल में कांग्रेस की जीत निश्चित है और चेन्निथला ही प्रदेश की कमान संभालेंगे।

वरिष्ठ नेताओं का समर्थन और विरोध

कुरियन के इस बयान का समर्थन कन्नूर से कांग्रेस सांसद के सुधाकरन ने भी किया है। सुधाकरन ने भी रमेश चेन्निथला को अपनी पहली पसंद बताया। उन्होंने दावा किया कि यूडीएफ को इस बार पूर्ण बहुमत मिलने वाला है और नेतृत्व अनुभवी हाथों में होना चाहिए।

हालांकि, इन बयानों ने पार्टी के अन्य गुटों में भारी हलचल पैदा कर दी है। कोझिकोड में आयोजित यूडीएफ सम्मेलन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच मतभेद स्पष्ट रूप से दिखाई दिए। वहां कुछ कार्यकर्ता राहुल गांधी और रमेश चेन्निथला की तस्वीरों वाली टोपियां पहनकर पहुंचे थे।

कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़प और गुटबाजी

विवाद तब और बढ़ गया जब कुछ नाराज कार्यकर्ताओं ने रमेश चेन्निथला की तस्वीरें फाड़ दीं। उनका तर्क था कि पार्टी किसी भी व्यक्ति से बड़ी होती है और चुनाव से पहले व्यक्ति विशेष का इस तरह प्रचार करना गलत है। इस घटना ने कांग्रेस की एकजुटता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

इस पूरे विवाद के बीच रमेश चेन्निथला और वर्तमान विपक्ष के नेता वीडी सतीशन ने सावधानी बरतते हुए चुप्पी साधी हुई है। सतीशन और चेन्निथला का कहना है कि उनकी पहली प्राथमिकता चुनाव जीतना है। मुख्यमंत्री का चयन चुनाव परिणामों के बाद कांग्रेस हाईकमान और विधायक दल की बैठक में ही किया जाएगा।

केसी वेणुगोपाल की बढ़ती दावेदारी

दूसरी ओर, दिल्ली की राजनीति में सक्रिय केसी वेणुगोपाल का नाम भी मुख्यमंत्री की दौड़ में तेजी से उभर रहा है। वेणुगोपाल को राहुल गांधी का बेहद करीबी माना जाता है। पार्टी के भीतर एक बड़ा खेमा ऐसा भी है जो मानता है कि वेणुगोपाल के नेतृत्व में कांग्रेस केरल में नई ऊर्जा के साथ वापसी कर सकती है।

रमेश चेन्निथला का राजनीतिक कद केरल में काफी बड़ा है। वह 2016 से 2021 तक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा चुके हैं। हालांकि, 2021 की हार के बाद उन्हें पद छोड़ना पड़ा था और उनकी जगह वीडी सतीशन को जिम्मेदारी दी गई थी। अब चेन्निथला गुट फिर से सक्रिय हो गया है।

हाईकमान के सामने बड़ी चुनौती

केरल की राजनीति में गुटबाजी कोई नई बात नहीं है, लेकिन चुनाव से ठीक पहले इस तरह की खींचतान पार्टी की संभावनाओं को नुकसान पहुंचा सकती है। कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के लिए केरल में गुटबाजी को रोकना एक बड़ी चुनौती बन गई है। अगर समय रहते समन्वय नहीं बैठाया गया, तो इसका सीधा फायदा विपक्षी दलों को मिल सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि केरल में सत्ता विरोधी लहर का लाभ उठाने के लिए कांग्रेस को एक चेहरे पर सहमति बनानी होगी। मतदाताओं के बीच भी इस खींचतान को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। आने वाले दिनों में राहुल गांधी की रैलियों के दौरान इस मुद्दे पर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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