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किसिंग डिजीज और MS का गहरा रिश्ता: क्या किसिंग डिजीज से बढ़ जाता है मल्टीपल स्क्लेरोसिस का खतरा? नई स्टडी में हुआ हैरान करने वाला खुलासा

बलजीत सिंह शेखावत

हालिया शोध के अनुसार, इन्फेक्शियस मोनोन्यूक्लिओसिस (किसिंग डिजीज) के शिकार लोगों में मल्टीपल स्क्लेरोसिस का जोखिम तीन गुना तक बढ़ सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है।

HIGHLIGHTS

  • किसिंग डिजीज (Mono) होने पर भविष्य में मल्टीपल स्क्लेरोसिस का खतरा 3 गुना बढ़ सकता है।
  • यह बीमारी एपस्टीन-बार वायरस (EBV) के कारण होती है जो लार के जरिए फैलता है।
  • EBV वायरस शरीर की इम्यून सेल्स (B cells) को प्रभावित कर नर्वस सिस्टम पर हमला कर सकता है।
  • 90-95% लोगों में EBV पाया जाता है, लेकिन MS का शिकार बहुत कम लोग ही होते हैं।
kissing disease multiple sclerosis risk ebv connection

नई दिल्ली | स्वास्थ्य शोधकर्ताओं ने हाल ही में एक ऐसी खोज की है जिसने चिकित्सा जगत को चौंका दिया है। एक नई स्टडी के अनुसार, 'किसिंग डिजीज' और मल्टीपल स्क्लेरोसिस (MS) के बीच गहरा संबंध पाया गया है।

इस शोध में यह दावा किया गया है कि जिन व्यक्तियों को पूर्व में किसिंग डिजीज हुई है, उनमें भविष्य में मल्टीपल स्क्लेरोसिस विकसित होने का जोखिम तीन गुना तक बढ़ सकता है। यह जानकारी स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने वालों के लिए महत्वपूर्ण है।

क्या है 'किसिंग डिजीज' और यह कैसे फैलती है?

चिकित्सीय विज्ञान में किसिंग डिजीज को 'इन्फेक्शियस मोनोन्यूक्लिओसिस' या संक्षेप में 'मोनो' कहा जाता है। यह संक्रमण मुख्य रूप से एपस्टीन-बार वायरस (EBV) के कारण होता है।

यह वायरस मुख्य रूप से लार के माध्यम से फैलता है। इसी कारण इसे 'किसिंग डिजीज' कहा जाता है। संक्रमित व्यक्ति के साथ बर्तन साझा करने, एक ही गिलास से पानी पीने या उसके छींकने से भी यह संक्रमण फैल सकता है।

हैरानी की बात यह है कि दुनिया भर में लगभग 90 से 95 प्रतिशत लोग अपने जीवनकाल में कभी न कभी इस वायरस के संपर्क में जरूर आते हैं। हालांकि, हर किसी में इसके लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते हैं।

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

मोनो के लक्षण अक्सर सामान्य सर्दी-जुकाम या फ्लू जैसे ही प्रतीत होते हैं। इसमें मरीज को बहुत ज्यादा थकान, कमजोरी और लगातार बुखार रहने की शिकायत होती है। लोग अक्सर इसे सामान्य थकान मानकर टाल देते हैं।

इसके अन्य प्रमुख लक्षणों में गले में तेज दर्द, गर्दन की ग्रंथियों में सूजन और मांसपेशियों में दर्द शामिल है। कुछ गंभीर मामलों में यह लिवर और प्लीहा (spleen) की कार्यक्षमता को भी प्रभावित कर सकता है।

स्टडी में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

क्लीवलैंड क्लिनिक द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक, जिन लोगों को पूर्व में मोनो का संक्रमण हुआ था, उनमें MS होने की संभावना अन्य लोगों की तुलना में काफी अधिक देखी गई। यह शोध इम्यूनोलॉजी के क्षेत्र में नई बहस छेड़ चुका है।

विशेषज्ञों का मानना है कि EBV वायरस शरीर की इम्यून सेल्स (B cells) को इस तरह प्रभावित करता है कि वे शरीर की अपनी ही नसों पर हमला करने लगती हैं। यही प्रक्रिया मल्टीपल स्क्लेरोसिस का मुख्य कारण बनती है।

मल्टीपल स्क्लेरोसिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी की नसों की सुरक्षात्मक परत को नुकसान पहुंचाता है। इससे शरीर का संतुलन और अंगों का नियंत्रण बिगड़ने लगता है।

क्या आपको घबराने की जरूरत है?

हालांकि यह शोध एक गंभीर कनेक्शन की ओर इशारा करता है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि आम जनता को इससे घबराने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं है। यह अध्ययन केवल एक रिस्क फैक्टर की पहचान करता है।

चूंकि EBV वायरस बहुत आम है और MS के मामले तुलनात्मक रूप से बहुत कम हैं, इसलिए यह बीमारी की निश्चित गारंटी नहीं है। जागरूकता के लिए कुछ विशेष लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी है।

यदि आपको दृष्टि में धुंधलापन, शरीर के अंगों में सुन्नता, लगातार बनी रहने वाली थकान या चलने में संतुलन की कमी महसूस हो, तो तुरंत किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लें और आवश्यक जांच कराएं।

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