नई दिल्ली | देश में भीषण गर्मी का प्रकोप अपने चरम पर पहुंच गया है। मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट के अनुसार, अरब सागर के ऊपर एक नया वेदर सिस्टम बन रहा है। यह सिस्टम मानसूनी हवाओं की गति को बाधित कर उन्हें कमजोर कर सकता है, जिससे केरल सहित दक्षिण भारत के हिस्सों में बारिश कम होने की गंभीर आशंका पैदा हो गई है।
भीषण गर्मी और मानसून पर संकट: मानसून पर संकट: 10 राज्यों में चलेगी लू, पारा 48 पार
अरब सागर में नया सिस्टम बनने से मानसून कमजोर, 10 राज्यों में भीषण गर्मी का अलर्ट।
HIGHLIGHTS
- अरब सागर में नया सिस्टम बनने से मानसूनी हवाएं कमजोर होने की आशंका है।
- अगले 7 दिनों तक उत्तर और मध्य भारत के 10 राज्यों में भीषण लू चलेगी।
- यूपी का बांदा 48.2 डिग्री सेल्सियस के साथ देश का सबसे गर्म शहर रहा।
- शहरीकरण के कारण 'फील टेम्परेचर' वास्तविक तापमान से 4 डिग्री तक ज्यादा है।
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10 राज्यों में लू का रेड अलर्ट
स्काईमेट की रिपोर्ट के अनुसार, अगले सात दिनों तक देश के 10 प्रमुख राज्यों में सूखी और गर्म हवाओं का दौर जारी रहेगा। इन राज्यों में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, छत्तीसगढ़, ओडिशा, महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली शामिल हैं।
मौसम विभाग के मुताबिक, इन क्षेत्रों में अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक रहने की संभावना है। वर्तमान में कोई सक्रिय वेदर सिस्टम न होने के कारण बारिश की उम्मीद न के बराबर है।
रिकॉर्ड तोड़ता पारा और हीटवेव
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उत्तर प्रदेश का बांदा जिला मंगलवार को 48.2 डिग्री सेल्सियस के साथ लगातार तीसरे दिन देश का सबसे गर्म शहर रहा। यहां गर्मी ने पिछले कई सालों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है।
दिल्ली में भी मंगलवार को इस साल का चौथा हीटवेव डे दर्ज किया गया। रिज इलाके में पारा 46.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिससे राजधानी में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
"वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के कमजोर होने और किसी सक्रिय मानसूनी सिस्टम के अभाव में फिलहाल उत्तर भारत को गर्मी से राहत मिलने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं।"
बढ़ता 'फील टेम्परेचर' और शहरीकरण
क्लाइमेट एक्सपर्ट्स के अनुसार, तेजी से होते शहरीकरण के कारण शहरों में 'फील टेम्परेचर' यानी महसूस होने वाली गर्मी वास्तविक तापमान से 2 से 4 डिग्री तक अधिक है।
भोपाल, जयपुर और अहमदाबाद जैसे शहरों में लोग भीषण उमस और गर्मी से परेशान हैं। शहरी कंक्रीट के जंगलों के कारण रात के समय भी तापमान में गिरावट नहीं आ रही है।
आने वाले दिनों में मानसून की स्थिति पर सबकी नजरें टिकी हैं। यदि अरब सागर का सिस्टम और मजबूत होता है, तो मानसून की प्रगति और धीमी हो सकती है। फिलहाल, उत्तर भारत के निवासियों को भीषण लू से बचने के लिए एहतियात बरतने की जरूरत है।
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