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सुबह एड़ियों में दर्द?: सुबह उठते ही एड़ियों में होता है तेज दर्द? इसे मामूली न समझें, हो सकती हैं ये 5 गंभीर बीमारियां

मानवेन्द्र जैतावत

अगर आपको सुबह उठते ही एड़ियों में तेज दर्द महसूस होता है, तो यह प्लांटर फैसाइटिस या थायराइड जैसी बीमारियों का संकेत हो सकता है। जानें इसके लक्षण और उपचार।

HIGHLIGHTS

  • सुबह एड़ी का दर्द प्लांटर फैसाइटिस का मुख्य लक्षण हो सकता है।
  • खराब फुटवियर और अधिक वजन भी एड़ी में दर्द का कारण बनते हैं।
  • थायराइड और यूरिक एसिड बढ़ने से भी पैरों में सूजन और दर्द संभव है।
  • नियमित स्ट्रेचिंग और बर्फ की सिकाई से दर्द में राहत मिल सकती है।
morning heel pain causes and remedies

दिल्ली | सुबह की पहली किरण के साथ जब आप बिस्तर से उठते हैं, तो शरीर में स्फूर्ति महसूस होनी चाहिए। लेकिन बहुत से लोगों के लिए यह समय काफी कष्टदायक होता है। बिस्तर से जैसे ही पहला कदम जमीन पर पड़ता है, एड़ी में तेज चुभन महसूस होती है। यह दर्द इतना तीव्र हो सकता है कि व्यक्ति को लंगड़ा कर चलना पड़ता है। अक्सर लोग इसे सामान्य थकान या रात में गलत तरीके से सोने का परिणाम समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन यह आपके शरीर की ओर से आने वाला एक बड़ा चेतावनी संकेत हो सकता है।

प्लांटर फैसाइटिस: सबसे आम कारण

विशेषज्ञों के अनुसार, सुबह के समय एड़ी में दर्द का सबसे बड़ा कारण प्लांटर फैसाइटिस होता है। यह पैर के तलवे में मौजूद एक मोटी लिगामेंट की सूजन है।

यह लिगामेंट आपकी एड़ी की हड्डी को उंगलियों से जोड़ता है और पैर के आर्च को सहारा देता है। जब इसमें खिंचाव या सूजन आती है, तो दर्द शुरू हो जाता है।

रात के समय जब आप सो रहे होते हैं, तो यह लिगामेंट सिकुड़ जाता है। सुबह उठते ही जब इस पर अचानक वजन पड़ता है, तो इसमें तेज खिंचाव होता है।

यही कारण है कि सुबह के पहले कुछ कदम सबसे ज्यादा दर्दनाक होते हैं। हालांकि, थोड़ा चलने के बाद यह दर्द कम होने लगता है क्योंकि लिगामेंट ढीला हो जाता है।

एचिलीस टेंडिनाइटिस की समस्या

एड़ी के दर्द का दूसरा प्रमुख कारण एचिलीस टेंडिनाइटिस हो सकता है। यह समस्या आपकी पिंडली की मांसपेशियों और एड़ी को जोड़ने वाली नस से जुड़ी है।

जब एचिलीस टेंडन में सूजन आ जाती है, तो एड़ी के पिछले हिस्से में तेज दर्द महसूस होता है। यह समस्या उन लोगों में अधिक होती है जो अचानक शारीरिक गतिविधि बढ़ा देते हैं।

धावकों और खिलाड़ियों में यह समस्या अक्सर देखी जाती है। सुबह उठते ही इस हिस्से में जकड़न महसूस होना इसका एक प्राथमिक लक्षण है।

अगर इस समस्या का समय पर इलाज न किया जाए, तो यह टेंडन फटने का कारण भी बन सकता है। इसलिए इसे नजरअंदाज करना जोखिम भरा हो सकता है।

रूमेटॉइड आर्थराइटिस और जोड़ों का दर्द

एड़ी का दर्द केवल मांसपेशियों की समस्या नहीं है, बल्कि यह रूमेटॉइड आर्थराइटिस का संकेत भी हो सकता है। यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है।

इसमें शरीर का इम्यून सिस्टम ही स्वस्थ जोड़ों पर हमला करने लगता है। इससे जोड़ों में सूजन, दर्द और जकड़न पैदा होती है जो सुबह के समय बढ़ जाती है।

अगर आपकी एड़ी के साथ-साथ पैर के अन्य जोड़ों में भी दर्द रहता है, तो यह आर्थराइटिस हो सकता है। सुबह की जकड़न इसमें काफी लंबे समय तक बनी रहती है।

आर्थराइटिस के मरीजों को अक्सर चलने-फिरने में काफी कठिनाई होती है। इसके लिए उचित चिकित्सीय परामर्श और दवाओं की आवश्यकता होती है।

स्ट्रेस फ्रैक्चर का खतरा

अगर आपकी एड़ी का दर्द लगातार बना रहता है और चलने पर बढ़ता है, तो यह स्ट्रेस फ्रैक्चर हो सकता है। यह हड्डी में आने वाली एक छोटी दरार है।

स्ट्रेस फ्रैक्चर अक्सर हड्डियों पर बार-बार दबाव पड़ने या अचानक बहुत अधिक व्यायाम करने के कारण होता है। एड़ी की हड्डी पर दबाव इसे और गंभीर बना देता है।

यह दर्द प्लांटर फैसाइटिस से थोड़ा अलग होता है क्योंकि यह आराम करने पर भी पूरी तरह खत्म नहीं होता। हड्डी के ऊपर छूने पर भी दर्द महसूस हो सकता है।

महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस की वजह से भी स्ट्रेस फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। कैल्शियम की कमी हड्डियों को कमजोर बना देती है जिससे दरारें आ सकती हैं।

हाइपोथायरॉयडिज्म और हार्मोनल असंतुलन

क्या आप जानते हैं कि थायराइड की समस्या भी एड़ी में दर्द पैदा कर सकती है? हाइपोथायरॉयडिज्म में शरीर में हार्मोन का स्तर गिर जाता है।

इससे शरीर के विभिन्न हिस्सों में तरल पदार्थ जमा होने लगता है, जिसे एडिमा कहा जाता है। पैरों और एड़ियों में सूजन आने से नसों पर दबाव पड़ता है।

नसों पर यह दबाव सुबह उठते समय दर्द और झुनझुनी के रूप में महसूस होता है। अगर आपको थकान और वजन बढ़ने जैसे लक्षण भी हैं, तो थायराइड की जांच कराएं।

हार्मोनल असंतुलन को ठीक किए बिना केवल दर्द निवारक गोलियों से इस समस्या में आराम नहीं मिलता। इसके लिए जड़ पर काम करना जरूरी है।

गलत फुटवियर का प्रभाव

आजकल की जीवनशैली में हम फुटवियर के लुक पर ज्यादा ध्यान देते हैं और आराम पर कम। गलत जूते एड़ी के दर्द का एक बड़ा कारण हैं।

बहुत ज्यादा ऊंचे हील्स पहनने से पैरों के पिछले हिस्से और एड़ी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इससे लिगामेंट्स में खिंचाव आ जाता है।

वहीं दूसरी ओर, बिल्कुल सपाट जूते पहनने से भी पैर के आर्च को सहारा नहीं मिलता। इससे प्लांटर फेशिया पर तनाव बढ़ता है और सूजन आती है।

जूते हमेशा ऐसे चुनें जिनमें आर्च सपोर्ट और कुशनिंग अच्छी हो। पुराने और घिसे हुए जूतों को तुरंत बदल देना चाहिए क्योंकि वे पैरों को सहारा नहीं दे पाते।

मोटापा और एड़ी पर दबाव

शरीर का अतिरिक्त वजन सीधा आपके पैरों और एड़ियों पर पड़ता है। मोटापे के कारण एड़ी की हड्डियों और लिगामेंट्स पर अत्यधिक तनाव रहता है।

अधिक वजन वाले लोगों में प्लांटर फैसाइटिस होने की संभावना सामान्य वजन वाले लोगों की तुलना में बहुत अधिक होती है। वजन कम करना इसका प्रभावी समाधान है।

जैसे-जैसे वजन कम होता है, पैरों पर पड़ने वाला दबाव कम होने लगता है। इससे दर्द में प्राकृतिक रूप से सुधार आने लगता है और सूजन कम होती है।

स्वस्थ आहार और नियमित सैर वजन घटाने में मदद कर सकती है। हालांकि, दर्द के दौरान बहुत ज्यादा पैदल चलने से बचना चाहिए।

यूरिक एसिड का बढ़ना

खून में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ने से गाउट (Gout) की समस्या हो सकती है। यह भी सुबह के समय एड़ी और जोड़ों में दर्द का कारण बनता है।

यूरिक एसिड के क्रिस्टल जोड़ों में जमा होने लगते हैं, जिससे अचानक और तेज दर्द होता है। एड़ी के आसपास की त्वचा लाल और गर्म महसूस हो सकती है।

यह दर्द अक्सर रात में या सुबह उठते ही बहुत तीव्र होता है। यूरिक एसिड को नियंत्रित करने के लिए खान-पान में बदलाव और दवाओं की जरूरत होती है।

प्यूरीन युक्त खाद्य पदार्थों जैसे रेड मीट और कुछ दालों का सेवन कम करना चाहिए। भरपूर पानी पीना भी यूरिक एसिड को शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है।

घरेलू उपचार और राहत के उपाय

अगर एड़ी का दर्द शुरुआती स्तर पर है, तो कुछ घरेलू उपाय बहुत कारगर साबित हो सकते हैं। बर्फ की सिकाई इसमें सबसे ज्यादा फायदेमंद होती है।

एक ठंडी पानी की बोतल को पैर के नीचे रखकर रोल करने से सूजन में तुरंत राहत मिलती है। इसे दिन में दो से तीन बार 15 मिनट के लिए करें।

सुबह बिस्तर से उठने से पहले पैरों की हल्की स्ट्रेचिंग करें। अपने पंजों को अपनी ओर खींचें और फिर बाहर की ओर धकेलें, इससे लिगामेंट लचीला होगा।

रात में सोते समय पैरों को थोड़ा ऊंचा रखकर सोने से भी सूजन कम होती है। इसके अलावा, एड़ी के लिए विशेष सिलिकॉन कप्स का इस्तेमाल जूतों में किया जा सकता है।

व्यायाम जो देंगे राहत

  • तौलिया स्ट्रेच: जमीन पर बैठकर तौलिए को पैर के तलवे में फंसाएं और अपनी ओर खींचें।
  • काफ स्ट्रेच: दीवार के सहारे खड़े होकर एक पैर पीछे रखें और एड़ी को जमीन पर टिकाएं।
  • बॉल रोलिंग: टेनिस बॉल को पैर के नीचे रखकर धीरे-धीरे घुमाएं, इससे तलवे की मसाज होगी।
  • मार्बल पिकिंग: फर्श पर पड़े कंचों को पैर की उंगलियों से उठाने की कोशिश करें।

डॉक्टर से कब मिलें?

एड़ी के दर्द को कभी भी बहुत लंबे समय तक खुद से ठीक करने की कोशिश न करें। अगर दर्द दो सप्ताह से अधिक बना रहे, तो डॉक्टर को दिखाएं।

अगर एड़ी में सूजन के साथ बुखार महसूस हो या आप पैर पर वजन बिल्कुल न रख पा रहे हों, तो यह इमरजेंसी की स्थिति हो सकती है।

एक हड्डी रोग विशेषज्ञ (Orthopedic) एक्सरे या एमआरआई के जरिए दर्द के सटीक कारण का पता लगा सकते हैं। सही निदान ही सही उपचार की दिशा तय करता है।

शारीरिक थेरेपी (Physiotherapy) भी एड़ी के पुराने दर्द को ठीक करने में बहुत प्रभावी पाई गई है। सही समय पर हस्तक्षेप आपको सर्जरी से बचा सकता है।

निष्कर्ष

एड़ी का दर्द भले ही छोटा लगे, लेकिन यह आपके चलने-फिरने की स्वतंत्रता को छीन सकता है। यह शरीर के आंतरिक स्वास्थ्य का आईना भी हो सकता है।

अपनी जीवनशैली में छोटे बदलाव करके, सही जूतों का चुनाव करके और वजन को नियंत्रित रखकर आप इस समस्या से मुक्ति पा सकते हैं।

याद रखें, स्वस्थ पैर ही आपको जीवन के सफर में आगे ले जाते हैं। इसलिए अपने पैरों की देखभाल को अपनी प्राथमिकता बनाएं और दर्द को नजरअंदाज न करें।

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