UGPF का मोटीवेशनल सेमिनार: राजस्थान: RAS अधिकारियों ने युवाओं को दिए सफलता के मंत्र
यूनाइटेड ग्लोबल पीस फाउंडेशन ने मेधावी छात्रों के लिए स्कॉलरशिप और मोटिवेशनल सेमिनार का आयोजन किया।
HIGHLIGHTS
- जयपुर के भाटिया आश्रम में आयोजित हुआ भव्य मोटिवेशनल सेमिनार।
- नव चयनित आरएएस अधिकारियों ने साझा किए अपनी सफलता के गहरे राज।
- फाउंडेशन के चेयरमैन मेघराज सिंह रॉयल का विजन: हर गरीब बच्चा बने अफसर।
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जयपुर | यूनाइटेड ग्लोबल पीस फाउंडेशन (यूजीपीएफ) के तत्वावधान में जयपुर स्थित भाटिया आश्रम सभागार में एक भव्य और प्रेरणादायक एक दिवसीय मोटिवेशनल सेमिनार का शानदार आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम का मूल उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं की गहन तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के भीतर आत्मविश्वास का संचार करना और उन्हें सफलता के व्यावहारिक सूत्रों से अवगत कराना था।
सेमिनार में मुख्य वक्ता के रूप में हाल ही में राजस्थान प्रशासनिक सेवा (आरएएस) में नव चयनित अधिकारी सुश्री तुलसी और सुश्री अवन्तिका ने विशेष रूप से शिरकत की।
इन दोनों युवा अधिकारियों ने अपनी संघर्षपूर्ण लेकिन अत्यंत प्रेरक जीवन यात्रा के प्रसंगों को साझा करके सभागार में उपस्थित सैकड़ों अभ्यर्थियों को पूरी तरह ऊर्जान्वित कर दिया।
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उन्होंने विद्यार्थियों के मन में उठ रही हर शंका और जिज्ञासा का अत्यंत आत्मीयता के साथ समाधान किया, जिससे वहां मौजूद हर छात्र के चेहरे पर नई चमक दिखी।
मेघराज सिंह रॉयल का विजन और छात्रवृत्ति की घोषणा
इस अवसर पर उपस्थित विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए यूनाइटेड ग्लोबल पीस फाउंडेशन के निदेशक ब्रिगेडियर जितेन्द्र सिंह शेखावत ने संस्था के दूरगामी उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि समाज में यह भ्रांति है कि उच्च पदों पर केवल संपन्न परिवारों के बच्चे ही पहुंच सकते हैं, परंतु फाउंडेशन इसी मिथक को तोड़ना चाहता है।
ब्रिगेडियर शेखावत ने फाउंडेशन के चेयरमैन श्री मेघराज सिंह रॉयल के दूरदर्शी दृष्टिकोण की व्याख्या करते हुए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और लाभकारी घोषणा की।
उन्होंने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन मेधावी युवाओं को समान अवसर प्रदान करने के लिए यूनाइटेड ग्लोबल पीस फाउंडेशन अब पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
इसी कड़ी में, नब्बे प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले होनहार विद्यार्थियों को फाउंडेशन की ओर से विशेष छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है, जो सराहनीय है।
संस्था का मानना है कि अभावों में जीवन यापन कर रहे गरीब परिवारों के बच्चे भी अपनी असीम प्रतिभा के दम पर उन बड़ी कुर्सियों तक पहुंच सकें।
धैर्य और अटूट विश्वास: सफलता का असली मार्ग
नव चयनित राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों का प्रेरक उद्बोधन सेमिनार का सबसे प्रमुख हिस्सा रहा, जिसने युवाओं को एकाग्रचित्त होकर सुनने पर मजबूर कर दिया।
सुश्री अवन्तिका ने अपनी सफलता की कहानी साझा करते हुए युवाओं को यह गहराई से समझाया कि कोई भी बड़ी सफलता रातों-रात प्राप्त नहीं होती है।
"धैर्य, पूर्ण समर्पण, स्वयं पर अटूट विश्वास और निरंतर की गई कड़ी मेहनत से ही कोई भी परिश्रम अंततः सफलता के सर्वोच्च शिखर तक पहुंचता है।"
उन्होंने अभ्यर्थियों को जीवन में आने वाली कठिन चुनौतियों से घबराने के बजाय उन्हें एक मजबूत सीढ़ी बनाकर आगे बढ़ने का मूल मंत्र और साहस दिया।
इसी क्रम में, सुश्री तुलसी ने बताया कि किस प्रकार एक साधारण और ग्रामीण परिवेश से निकलकर राज्य की सर्वोच्च सेवा तक पहुंचने के लिए मेहनत करनी पड़ती है।
दोनों अधिकारियों ने समय प्रबंधन, उचित अध्ययन सामग्री के चयन और मानसिक तनाव से बचने के संबंध में पूछे गए प्रश्नों का अत्यंत सरलता से उत्तर दिया।
चरित्र निर्माण और सामाजिक समरसता का आह्वान
कार्यक्रम के दौरान फाउंडेशन के निदेशक श्री शक्ति सिंह बांदीकुई ने अपने ओजस्वी और ऊर्जा से भरपूर उद्बोधन से पूरे सभागार में एक नया उत्साह भर दिया।
उन्होंने युवा पीढ़ी को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के उदात्त चरित्र से प्रेरणा लेकर अपने जीवन पथ पर निरंतर आगे बढ़ने का पुरजोर आह्वान किया।
श्री बांदीकुई ने समझाया कि सफलता का अर्थ केवल कोई उच्च पद प्राप्त करना नहीं है, बल्कि एक श्रेष्ठ और मानवीय चरित्र का निर्माण करना भी है।
उन्होंने फाउंडेशन द्वारा संचालित रोजगार सृजन, समाज में सामाजिक समरसता की स्थापना और पर्यावरण संरक्षण के अभियानों के बारे में भी विस्तृत जानकारी प्रदान की।
उनका संदेश स्पष्ट था कि शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों का होना भी उतना ही आवश्यक है, जितना कि किसी परीक्षा में सफलता प्राप्त करना होता है।
रणनीतिक तैयारी: विशेषज्ञों की अमूल्य राय
भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के सेवानिवृत्त अधिकारी श्री राजेन्द्र सिंह शेखावत ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को रणनीतिक तरीके और महत्वपूर्ण टिप्स समझाए।
उन्होंने विशेष बल दिया कि किसी भी परीक्षा में सफलता के लिए यह जानना जरूरी है कि क्या पढ़ना है और क्या नहीं पढ़ना है।
वहीं, भारतीय प्रसारण सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी श्री के.के. बोहरा ने वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक समय में इस प्रकार के मार्गदर्शन सेमिनार की महत्ता को विस्तार से रेखांकित किया।
उन्होंने युवाओं को अपने निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एकाग्रचित्त होकर पूर्णतया समर्पित भाव से कार्य करने की अमूल्य और व्यावहारिक सीख दी।
कार्यक्रम के अंत में भाटिया आश्रम के प्रतिनिधि श्री वीरेन्द्र प्रताप सिंह ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और शांतिपूर्वक सुनने वाले श्रोताओं का हृदय से आभार व्यक्त किया।
इस एक दिवसीय सेमिनार में बीकानेर और आस-पास के क्षेत्रों से आए हजारों छात्र-छात्राओं ने भारी उत्साह के साथ भाग लिया और सफलता का संकल्प लिया।
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