सिरोही | माउंट आबू के अरावली रंगमंच पर रविवार की देर रात ग्रीष्म समारोह का समापन हुआ। विख्यात गायिका तुलसी कुमारी का कार्यक्रम देखने के लिए लोग काफी उत्साहित थे, लेकिन उनकी प्रस्तुति ने सबको निराश कर दिया।
माउंट आबू में फीकी रही शाम: माउंट आबू ग्रीष्म समारोह: तुलसी कुमारी की परफॉर्मेंस ने किया निराश
अरावली रंगमंच पर 'नाम बड़े और दर्शन छोटे' वाली कहावत हुई सच, दर्शकों ने जताया भारी रोष।
HIGHLIGHTS
- माउंट आबू के अरावली रंगमंच पर ग्रीष्म समारोह का समापन काफी निराशाजनक रहा।
- मुख्य कलाकार तुलसी कुमारी की परफॉर्मेंस से दर्शकों को कोई मनोरंजन नहीं मिला।
- कार्यक्रम सवा घंटे की देरी से शुरू हुआ, जिससे आम जनता को काफी परेशानी हुई।
- पीएम मोदी के हमशक्ल व्यक्ति कार्यक्रम के दौरान मुख्य आकर्षण का केंद्र बने रहे।
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स्टेज पर उनके गाए अधिकांश गीतों से दर्शकों को न तो रोमांच मिला और न ही कोई मनोरंजन का अहसास हुआ। 'नाम बड़े और दर्शन छोटे' वाली कहावत यहाँ पूरी तरह चरितार्थ होती नजर आई।
देरी से शुरू हुआ कार्यक्रम
यह शाम निर्धारित समय रात 9:00 बजे के बजाय सवा घंटे की देरी से आरंभ हुई। इतनी लंबी देरी के कारण पोलो ग्राउंड में मौजूद आम दर्शकों का उत्साह पूरी तरह खत्म हो गया।
मैदान में आम जनता की तुलना में वीआईपी, राजनेता, अफसर और आर्म्ड फोर्सेस के परिवारों का ही दबदबा नजर आया। जिला कलेक्टर रोहिताश कुमार सिंह सहित कई बड़े अधिकारी यहाँ सपरिवार मौजूद रहे।
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कलाकार चयन पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों में इस वर्ष के कलाकार चयन को लेकर भारी नाराजगी देखी गई। लोगों का मानना है कि पिछले वर्षों में पलक मुंजाल जैसे कलाकारों के कार्यक्रम इस बार से कहीं बेहतर थे।
अगर ऐसे ही औपचारिक कलाकारों को बुलाकर कार्यक्रम करना है, तो सरकारी धन की बर्बादी क्यों की जा रही है? इससे बेहतर तो कवि सम्मेलन या लोक संगीत का आयोजन होता।
मोदी के हमशक्ल ने बटोरी सुर्खियां
फीके कार्यक्रम की एकमात्र सुर्खी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हमशक्ल वाले व्यक्ति ने बटोरी। वे पूरे मैदान में घूमकर लोगों का ध्यान खींचते रहे और दर्शक उनके साथ उत्साह से फोटो खिंचवाते रहे।
अंत में, दर्शकों ने सुझाव दिया कि भविष्य में केवल नामचीन कलाकारों के बजाय गुणवत्तापूर्ण प्रस्तुतियों पर ध्यान देना चाहिए। इससे सरकारी बजट का सही उपयोग और जनता का वास्तविक मनोरंजन सुनिश्चित हो सकेगा।
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