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राजस्थान

लुम्बाराम चौधरी को संसद रत्न: सांसद लुम्बाराम चौधरी को मिलेगा 'संसद रत्न' सम्मान

प्रदीप बीदावत

जालोर-सिरोही सांसद लुम्बाराम चौधरी को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए संसद रत्न पुरस्कार दिया जाएगा।

HIGHLIGHTS

  • सांसद लुम्बाराम चौधरी को सक्रिय भागीदारी के लिए 'संसद रत्न' सम्मान मिलेगा।
  • उन्होंने 18वीं लोकसभा के कई सत्रों में 100 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज की है।
  • चौधरी ने अब तक 3 बिल पेश किए और 246 महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे हैं।
  • डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के सुझाव पर 2010 में इस पुरस्कार की शुरुआत हुई थी।
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सिरोही | जालोर-सिरोही संसदीय क्षेत्र के लिए एक बेहद गर्व का पल सामने आया है। यहां के सांसद लुम्बाराम चौधरी को उनकी सक्रियता के लिए 'संसद रत्न' पुरस्कार से नवाजा जाएगा।

संसद के भीतर जनता की आवाज बुलंद करने और विधायी कार्यों में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए उनका चयन किया गया है। इस साल देशभर से केवल 12 सांसदों को यह गौरव प्राप्त हुआ है।

संसद में शानदार उपस्थिति का रिकॉर्ड

सांसद लुम्बाराम चौधरी की पहचान संसद में एक अनुशासित सदस्य के रूप में बनी है। उनकी उपस्थिति के आंकड़े वाकई हैरान करने वाले और प्रेरणादायक हैं।

18वीं लोकसभा के पहले सत्र और शीतकालीन सत्र 2024 में उनकी उपस्थिति शत-प्रतिशत रही। इसके अलावा बजट सत्र 2024 और मॉनसून सत्र 2025 में भी वह पूरे समय मौजूद रहे।

इतना ही नहीं, बजट सत्र 2026 में भी उन्होंने अपनी 100 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज कराई है। यह उनकी अपने क्षेत्र के प्रति जिम्मेदारी और कर्तव्यनिष्ठा को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

सक्रिय भागीदारी और विधायी कार्य

केवल उपस्थिति ही नहीं, बल्कि सदन की कार्यवाही में सार्थक योगदान के मामले में भी चौधरी आगे रहे हैं। उन्होंने अब तक कुल 3 निजी बिल पेश किए हैं।

उन्होंने विभिन्न जनहित के मुद्दों पर 246 प्रश्न पूछे और 36 महत्वपूर्ण चर्चाओं में हिस्सा लिया। उनके इन्हीं प्रयासों ने उन्हें इस प्रतिष्ठित पुरस्कार का असली हकदार बनाया है।

क्या है 'संसद रत्न' पुरस्कार का महत्व?

संसद रत्न पुरस्कार की नींव साल 2010 में रखी गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य उन सांसदों को सम्मानित करना है जो लोकतंत्र को मजबूत करने में निरंतर जुटे हुए हैं।

यह पुरस्कार प्राइम पॉइंट फाउंडेशन द्वारा प्रदान किया जाता है। इसकी चयन प्रक्रिया बहुत सख्त होती है, जिसमें सांसद के हर एक कार्य का बारीकी से विश्लेषण किया जाता है।

यह सम्मान उन सांसदों को मिलता है जो बिना किसी हंगामे के नीति-निर्माण में अपना बहुमूल्य योगदान देते हैं। अब तक कुल 143 सांसदों को यह सम्मान मिल चुका है।

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की सोच

इस पुरस्कार की शुरुआत के पीछे भारत के मिसाइल मैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का बड़ा हाथ था। उन्होंने ही इसका सुझाव नागरिक समाज के प्रतिनिधियों को दिया था।

कलाम साहब चाहते थे कि जो सांसद संसद में शालीनता और सक्रियता से काम करते हैं, उन्हें समाज द्वारा पहचाना और सराहा जाना चाहिए ताकि अन्य भी प्रेरित हों।

आज यह पुरस्कार संसदीय उत्कृष्टता का सबसे बड़ा पैमाना बन चुका है। इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने भी इस प्रतिष्ठित सम्मान को अपनी आधिकारिक मान्यता प्रदान की है।

जनता को समर्पित है यह सम्मान

पुरस्कार के लिए नाम घोषित होने के बाद सांसद लुम्बाराम चौधरी ने अपनी खुशी साझा की। उन्होंने इसे जालोर-सिरोही की जनता की सामूहिक जीत और आशीर्वाद बताया है।

यह सम्मान मेरा नहीं, बल्कि मेरे क्षेत्र की जनता का है जिन्होंने मुझ पर भरोसा जताया। मैं हमेशा उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने का प्रयास करता रहूंगा।

चौधरी ने भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का भी आभार जताया। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें सेवा का जो मौका दिया, वह उसका पूरी ईमानदारी से निर्वहन कर रहे हैं।

भव्य समारोह में होगा सम्मान

आने वाले दिनों में दिल्ली में एक भव्य समारोह आयोजित किया जाएगा। इसमें देश की दिग्गज हस्तियों की मौजूदगी में चयनित सांसदों को ट्रॉफी प्रदान की जाएगी।

जालोर-सिरोही के इतिहास में यह पहली बार है जब किसी सांसद को यह उपलब्धि मिली है। इससे क्षेत्र के विकास की उम्मीदें और भी ज्यादा बढ़ गई हैं।

सांसद के इस सम्मान से न केवल राजस्थान का गौरव बढ़ा है, बल्कि यह अन्य जनप्रतिनिधियों के लिए भी एक मिसाल पेश करता है कि मेहनत रंग लाती है।

निष्कर्ष के तौर पर, लुम्बाराम चौधरी की यह उपलब्धि संसदीय मर्यादा और सक्रियता का जीवंत प्रमाण है। यह सम्मान भविष्य में उन्हें और बेहतर कार्य करने की ऊर्जा देगा।

*Edit with Google AI Studio

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