नागौर | राजस्थान के नागौर शहर में ट्रैफिक पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बड़े सवालिया निशान लग गया है। शहर के कृषि मंडी तिराहे पर एक ऐसी घटना घटी जिसने सबको हैरान कर दिया। ट्रैफिक पुलिस ने एक इलेक्ट्रिक वाहन (EV) का प्रदूषण मानकों के उल्लंघन के आरोप में चालान काट दिया। यह मामला अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग पुलिस की जानकारी पर सवाल उठा रहे हैं।
नागौर: ईवी कार का प्रदूषण चालान: नागौर ट्रैफिक पुलिस की बड़ी लापरवाही: जीरो पॉल्यूशन वाली इलेक्ट्रिक कार का काटा प्रदूषण चालान, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल
राजस्थान के नागौर में ट्रैफिक पुलिस की एक बड़ी चूक सामने आई है, जहां एक इलेक्ट्रिक कार का प्रदूषण उल्लंघन के नाम पर चालान काट दिया गया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
HIGHLIGHTS
- नागौर में ट्रैफिक पुलिस ने इलेक्ट्रिक कार का प्रदूषण चालान काटा।
- कार चालक और पुलिसकर्मी के बीच बहस के बाद हुई यह अजीबोगरीब कार्रवाई।
- मोटर व्हीकल एक्ट के तहत ईवी को प्रदूषण प्रमाणपत्र (PUC) की जरूरत नहीं होती।
- पुलिस प्रशासन ने इसे मानवीय भूल बताते हुए चालान निरस्त करने की बात कही है।
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क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, नागौर के कृषि मंडी तिराहे पर तैनात एएसआई रामकुमार ने 6 अप्रैल को नियमित जांच के दौरान एक कार को रोका। कार की खिड़कियों पर काली जालियां लगी हुई थीं। पुलिसकर्मियों ने जब इन जालियों को हटाने के लिए कहा, तो कार चालक और पुलिस के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यह बहस काफी देर तक चलती रही।
विवाद के बाद हुई कार्रवाई
विवाद बढ़ने पर ट्रैफिक पुलिस ने नियमानुसार कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने काली फिल्म और दृश्य संचरण के मानकों का पालन न करने के लिए 200 रुपए का जुर्माना लगाया। हैरानी की बात तब हुई जब पुलिस ने इसी कार पर प्रदूषण उल्लंघन के नाम पर 1500 रुपए का एक और चालान काट दिया। जबकि वह कार पूरी तरह से इलेक्ट्रिक थी।
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सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
कार का नंबर आरजे 19 सीओ 0119 बताया जा रहा है। घटना के दौरान किसी ने इस पूरी कार्रवाई का वीडियो बना लिया और उसे सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। वीडियो वायरल होते ही लोगों ने पुलिस की संवेदनशीलता और नियमों के ज्ञान पर तंज कसना शुरू कर दिया। लोग पूछ रहे हैं कि जो कार धुआं ही नहीं छोड़ती, उसका प्रदूषण चालान कैसे संभव है?
नियमों की अनदेखी का आरोप
इलेक्ट्रिक वाहन शून्य कार्बन उत्सर्जन करते हैं। मोटर व्हीकल एक्ट 1989 के नियम 115 के अनुसार, बैटरी से चलने वाले वाहनों को प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) की आवश्यकता नहीं होती है। प्रादेशिक परिवहन अधिकारी राजेंद्र सिंह शेखावत ने भी स्पष्ट किया है कि ईवी वाहनों को पीयूसी से छूट प्राप्त है। ऐसे में नागौर पुलिस की यह कार्रवाई कानूनन गलत मानी जा रही है।
पुलिस प्रशासन की सफाई
मामला तूल पकड़ने पर कार्यवाहक ट्रैफिक इंचार्ज शिवदेवराम ने बयान जारी किया है। उन्होंने स्वीकार किया कि कार में काली जालियां लगी थीं, जिसे लेकर विवाद हुआ था। उन्होंने कहा कि बहस के दौरान 'भूलवश' प्रदूषण का चालान कट गया। विभाग अब इस मामले की जांच कर रहा है और गलत तरीके से काटे गए चालान को एडमिन पावर से निरस्त किया जाएगा।
जागरूकता की कमी या मनमानी?
नागौर में इस तरह का यह पहला मामला है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना न केवल पुलिस की लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि नई तकनीक के प्रति जागरूकता की कमी को भी उजागर करती है। चालक ने मौके पर भी आपत्ति जताई थी कि उसकी कार इलेक्ट्रिक है, लेकिन उसकी बात अनसुनी कर दी गई। अब उच्चाधिकारी इस मामले में दोषियों पर कार्रवाई की बात कह रहे हैं।
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