Bollywood: दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में निधन
पांच दशक तक अपनी दमदार आवाज और अभिनय से दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले नाना पाटेकर अब नहीं रहे। गोवा स्थित आवास पर कार्डियक अरेस्ट से उनका निधन हुआ।
HIGHLIGHTS
- दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की आयु में गोवा में निधन हो गया।
- अस्पताल ने कार्डियक अरेस्ट को अभिनेता की मृत्यु का मुख्य कारण बताया है।
- अपने पांच दशक के करियर में उन्होंने तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीते।
- वर्ष 2013 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री सम्मान से नवाजा था।
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मुंबई/गोवा | भारतीय सिनेमा के उन कलाकारों में नाना पाटेकर का नाम हमेशा अलग अंदाज में लिया जाएगा, जिन्होंने अभिनय को केवल पर्दे पर किरदार निभाने तक सीमित नहीं रखा।
करीब पांच दशक तक हिंदी और मराठी सिनेमा में सक्रिय रहे नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है।
रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने गोवा स्थित अपने घर पर अंतिम सांस ली और अस्पताल ने कार्डियक अरेस्ट की पुष्टि की।
विश्वनाथ से नाना पाटेकर बनने का सफर
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नाना पाटेकर का पूरा नाम विश्वनाथ पाटेकर था। उनका जन्म 1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र में हुआ था।
कला और अभिनय की दुनिया में कदम रखने से पहले उन्होंने मुंबई के प्रतिष्ठित सर जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट में शिक्षा हासिल की।
अभिनय की शुरुआत उन्होंने रंगमंच से की और आगे चलकर मराठी तथा हिंदी फिल्मों में अपनी पहचान बनाई।
फिल्मी सफर की शुरुआत
उनका फिल्मी सफर 1978 में आई फिल्म 'गमन' से शुरू हुआ था।
शुरुआती दौर में उन्हें बड़े सितारों की तरह तुरंत लोकप्रियता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने लगातार अलग-अलग तरह के किरदार निभाए।
'सलाम बॉम्बे!' ने बदली पहचान
1988 में मीरा नायर की फिल्म 'सलाम बॉम्बे!' में उनके अभिनय ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई।
इसके बाद 1989 में आई 'परिंदा' ने उनके करियर को एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया।
'परिंदा' में उनके अभिनय के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और फिल्मफेयर पुरस्कार मिला।
'क्रांतिवीर' और यादगार संवाद
1994 में आई 'क्रांतिवीर' नाना पाटेकर के करियर की सबसे महत्वपूर्ण फिल्मों में शामिल रही।
इस भूमिका के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का सम्मान मिला।
फिल्म के संवाद और नाना की आवाज आज भी उनके प्रशंसकों के बीच याद किए जाते हैं।
खलनायक के रूप में छोड़ी छाप
नाना पाटेकर ने सिर्फ नायक की भूमिकाएं नहीं कीं, बल्कि नकारात्मक किरदारों में भी जान फूंक दी।
- 'अंगार' के लिए उन्हें फिल्मफेयर का सर्वश्रेष्ठ खलनायक पुरस्कार मिला।
- 'अपहरण' के लिए भी उन्हें इसी श्रेणी में सम्मानित किया गया।
कॉमेडी में भी मनवाया लोहा
गंभीर और सामाजिक विषयों वाली फिल्मों के साथ उन्होंने कॉमेडी में भी अपनी अलग पहचान बनाई।
2007 में आई 'वेलकम' में उदय शेट्टी का किरदार इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।
फिल्म में उनके संवाद और अनिल कपूर के साथ उनकी जोड़ी ने दर्शकों को खूब हंसाया।
'नटसम्राट' और अभिनय की गहराई
मराठी सिनेमा की फिल्म 'नटसम्राट' में नाना पाटेकर ने एक सेवानिवृत्त रंगमंच अभिनेता का किरदार निभाया।
इस भूमिका के लिए उन्हें मराठी फिल्मफेयर में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार भी मिला।
बहुमुखी प्रतिभा के धनी
नाना पाटेकर ने सिर्फ अभिनय तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि निर्देशन में भी हाथ आजमाया।
1991 में उन्होंने 'प्रहार: द फाइनल अटैक' का निर्देशन किया और इसमें अभिनय भी किया।
राष्ट्रीय सम्मान और पुरस्कार
नाना पाटेकर को उनके करियर में तीन बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया:
- 'परिंदा' के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता।
- 'क्रांतिवीर' के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता।
- 'अग्नि साक्षी' के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता।
वर्ष 2013 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया था।
सिनेमा में छोड़ी गई विरासत
नाना पाटेकर का जाना भारतीय सिनेमा के एक ऐसे अध्याय का अंत है, जिसमें अभिनेता ने पारंपरिक 'हीरो' की परिभाषा को बदल दिया।
उनकी प्रमुख फिल्मों की सूची में ये नाम शामिल हैं:
- परिंदा
- क्रांतिवीर
- अग्नि साक्षी
- खामोशी: द म्यूजिकल
- अब तक छप्पन
- अपहरण
- राजनीति
- नटसम्राट
- वेलकम
नाना पाटेकर चले गए, लेकिन उनकी आवाज और उनके निभाए किरदार भारतीय सिनेमा की स्मृतियों में हमेशा जीवित रहेंगे।
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