जोधपुर | राजस्थान के थार मरुस्थल की तस्वीर हमेशा के लिए बदलने वाली है। केंद्र और राज्य सरकार ने उस महत्वाकांक्षी परियोजना को हरी झंडी दे दी है, जिसके तहत गुजरात के कांडला पोर्ट से अरब सागर का पानी जालोर तक लाया जाएगा। यह राष्ट्रीय जलमार्ग-48 राज्य के लिए विकास के नए द्वार खोलेगा।
मरुस्थल में बहेगा अरब सागर!: राजस्थान में मरुस्थल चीरकर आएगा समुद्र, बदलेगी तस्वीर
कांडला पोर्ट से जालोर तक 262 किमी लंबे राष्ट्रीय जलमार्ग-48 को मिली हरी झंडी, थार में खुलेगा व्यापार का नया रास्ता।
HIGHLIGHTS
- कांडला पोर्ट से जालोर तक 262 किलोमीटर लंबा महत्वाकांक्षी जलमार्ग बनेगा।
- परियोजना की अनुमानित लागत दस हजार करोड़ रुपये से अधिक है।
- जालोर के कावतरा में राजस्थान का पहला इनलैंड पोर्ट विकसित किया जाएगा।
- इस परियोजना से राजस्थान पहली बार सीधे अरब सागर से जुड़ेगा।
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परियोजना को मिली गति
लंबे समय से अटकी इस परियोजना को अब गति मिल गई है। राजस्थान सरकार, भारतीय अन्तर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) और आईआईटी मद्रास के बीच इस परियोजना को लेकर एमओयू पर हस्ताक्षर हो चुके हैं।
इस परियोजना को नेशनल वाटर वे 48 नाम दिया गया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी अप्रैल में इसकी समीक्षा करते हुए तकनीकी, वित्तीय और कार्गो क्षमता पर विस्तृत अध्ययन के निर्देश दिए थे, जिससे इसे जल्द से जल्द धरातल पर उतारा जा सके।
कैसा होगा जलमार्ग का स्वरूप?
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यह जलमार्ग लगभग 262 किलोमीटर लंबा, 300 मीटर चौड़ा और 25 मीटर गहरा होगा। इसकी अनुमानित लागत दस हजार करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है।
यह जलमार्ग पाली जिले के जवाई बांध क्षेत्र से शुरू होगा और लूणी नदी के रास्ते गुजरात में कच्छ के रण से होते हुए कांडला बंदरगाह तक पहुंचेगा। यह राजस्थान को सीधे समुद्री मार्ग से जोड़ने वाला पहला प्रोजेक्ट होगा।
जालोर बनेगा नया लॉजिस्टिक हब
इस परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र जालोर जिला होगा। जालोर के कावतरा क्षेत्र में राजस्थान का पहला इनलैंड पोर्ट (अंतर्देशीय बंदरगाह) विकसित करने का प्रस्ताव है।
यहां माल की लोडिंग-अनलोडिंग के लिए जेट्टी, बड़े-बड़े गोदाम और अन्य लॉजिस्टिक्स सुविधाएं विकसित की जाएंगी। यह क्षेत्र पश्चिमी राजस्थान के औद्योगिक विकास का नया केंद्र बनेगा।
इन जिलों को मिलेगा सीधा फायदा
प्रारंभिक योजना के अनुसार, इस जलमार्ग से पाली, सिरोही, जालोर और सांचौर जिलों को सीधा लाभ मिलेगा।
पाली के जवाई बांध, सुमेरपुर, सिरोही के शिवगंज, जालोर के सायला, आहोर, कावतरा और सांचौर के चितलवाना, हाड़ेचा जैसे क्षेत्र सीधे तौर पर इस जलमार्ग के प्रभाव क्षेत्र में आएंगे। इन क्षेत्रों में सर्वे और बुनियादी ढांचे का विकास किया जाएगा।
परियोजना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "यह सिर्फ एक जलमार्ग नहीं, बल्कि राजस्थान की अर्थव्यवस्था के लिए एक जीवन रेखा है। इससे लॉजिस्टिक्स लागत में भारी कमी आएगी और हमारे उत्पाद आसानी से अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच सकेंगे।"
राजस्थान के लिए गेम-चेंजर
यह जलमार्ग राजस्थान की अर्थव्यवस्था के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है। इससे राज्य के खनिज, सीमेंट, मार्बल, पेट्रोकेमिकल, कृषि उत्पाद और ग्वार जैसे औद्योगिक सामान कम लागत में कांडला बंदरगाह तक पहुंचेंगे।
इससे न केवल सड़क और रेल नेटवर्क पर दबाव कम होगा, बल्कि परिवहन खर्च भी घटेगा। निर्यात को नई गति मिलने से राज्य की जीडीपी में भी उछाल आने की उम्मीद है।
ईंधन की बचत और कार्बन उत्सर्जन में कमी से यह परियोजना पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद साबित होगी। कुल मिलाकर, यह महत्वाकांक्षी योजना राजस्थान को विकास की एक नई राह पर ले जाएगी, जिससे राज्य की आर्थिक और सामाजिक तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी।
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