नई दिल्ली | नीट पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि नीट-26 परीक्षा के लिए तैयार किए गए दोनों पेपर सेट प्रिंटिंग प्रेस जाने से पहले ही नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के भीतर से लीक हो गए थे।
NEET पेपर लीक में बड़ा खुलासा: NEET पेपर लीक: NTA से ही चोरी हुए थे दोनों सेट, CBI का खुलासा
सीबीआई जांच में खुलासा हुआ है कि प्रिंटिंग से पहले ही एनटीए से नीट के दोनों पेपर सेट लीक हो गए थे।
HIGHLIGHTS
- NEET-26 के दोनों पेपर सेट प्रिंटिंग से पहले ही NTA से लीक हो गए थे।
- बायोलॉजी के 90 और केमिस्ट्री के 45 सवाल हूबहू गेस पेपर से मैच हुए।
- पुणे के प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी और मनीषा मांधरे को मास्टरमाइंड बताया गया।
- एनटीए की पेपर वेटिंग टीम के सदस्यों पर सवाल चोरी करने का आरोप है।
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एनटीए के भीतर से ही लीक हुए सवाल
सीबीआई की जांच के अनुसार, जो पेपर 3 मई को परीक्षा में आया और जो रिजर्व में रखा गया था, दोनों के सवाल पहले ही बाहर आ चुके थे। बायोलॉजी और केमिस्ट्री के लगभग सभी सवाल एक गेस पेपर यानी क्वेश्चन बैंक में हूबहू पाए गए हैं।
एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह चोरी एनटीए की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी सेंधमारी को दर्शाती है। जांच में पाया गया कि बायोलॉजी के 180 और केमिस्ट्री के 90 सवाल इन दोनों सेटों से ही लिए गए थे।
प्रोफेसर और टीचर ने की सवालों की चोरी
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इस मामले में पुणे के केमिस्ट्री प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी और सीनियर टीचर मनीषा गुरुनाथ मांधरे को मुख्य आरोपी बनाया गया है। सीबीआई ने कुलकर्णी को इस पूरे लीक कांड का मास्टरमाइंड बताया है।
कुलकर्णी और मांधरे एनटीए की उस 'पेपर वेटिंग टीम' का हिस्सा थे, जिसका काम अंतिम रूप से सवालों की जांच करना होता है। इसी पद का फायदा उठाकर उन्होंने सवालों तक अपनी पहुंच बनाई और उन्हें चोरी कर लिया।
पांच चरणों की जटिल प्रक्रिया में सेंध
नीट परीक्षा का पेपर कुल पांच चरणों में फाइनल होता है। पहले चरण में विभिन्न विषयों के एक्सपर्ट प्रश्नों के पांच अलग-अलग सेट तैयार करते हैं। इसके बाद दूसरे चरण में मॉडरेशन के जरिए दो सेट फाइनल किए जाते हैं।
तीसरा चरण 'वेटिंग' का होता है, जिसमें प्रश्नों की गलतियां और अशुद्धियां सुधारी जाती हैं। पीवी कुलकर्णी और मनीषा इसी चरण में शामिल थे। चौथे चरण में प्रश्नों को कंपाइल किया जाता है और पांचवें चरण में प्रिंटिंग होती है।
"एनटीए दफ्तर में सुरक्षा इतनी सख्त होती है कि बिना किसी अंदरूनी मिलीभगत के प्रश्न बाहर आना असंभव है। सीसीटीवी के अलावा 10-12 अधिकारी हर एक्सपर्ट पर निगाह रखते हैं।"
फिजिक्स के सवाल भी होने लगे थे लीक
सीबीआई को जांच के दौरान फिजिक्स के भी कुछ सवाल लीक होने के पुख्ता सबूत मिले हैं। एजेंसी ने इस संबंध में एक अन्य संदिग्ध की पहचान कर ली है, जो जल्द ही गिरफ्त में हो सकता है।
जांच में यह भी पता चला है कि जिस क्वेश्चन बैंक की कई राज्यों में लाखों रुपये में खरीद-फरोख्त हुई, उसे इन्हीं आरोपियों ने मिलकर तैयार किया था। इसमें शामिल 90 बायोलॉजी और 45 केमिस्ट्री के सवाल सीधे परीक्षा पेपर से मेल खाते थे।
एनटीए की साख पर मंडराता खतरा
इस बड़े खुलासे के बाद एनटीए की साख पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कई वरिष्ठ प्रोफेसरों ने अब एनटीए के साथ काम करने से मना कर दिया है। उन्हें डर है कि भविष्य में किसी भी विवाद में उनका नाम घसीटा जा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इतने कड़े पहरे के बावजूद अगर एक्सपर्ट लाइब्रेरी जाने पर भी निगरानी में रहते हैं, तो फिर सवाल बाहर कैसे आए? यह जांच का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण बिंदु बना हुआ है।
भविष्य की परीक्षाओं पर असर
यह मामला न केवल एनटीए की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा करता है, बल्कि लाखों छात्रों के भविष्य के साथ हुए खिलवाड़ को भी उजागर करता है। सीबीआई अब इस नेटवर्क के अन्य गुर्गों की तलाश में जुटी हुई है।
निष्कर्षतः, नीट पेपर लीक मामले ने देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की पवित्रता को भंग किया है। अब देखना यह है कि सरकार और एनटीए भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कड़े कदम उठाते हैं।
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