बालोतरा | राजस्थान की 'भाग्य रेखा' कही जाने वाली पचपदरा रिफाइनरी में 20 अप्रैल को हुए भीषण अग्निकांड के बाद अब वहां का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित दौरे के लिए बनाए गए विशालकाय डोम को अब हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
पचपदरा रिफाइनरी: डोम हटाने का काम शुरू: रिफाइनरी अग्निकांड: मोदी सभा स्थल पर हलचल, हटने लगे डोम
पचपदरा रिफाइनरी अग्निकांड के बाद पीएम मोदी की सभा के लिए बने विशाल डोम हटाए जा रहे हैं।
HIGHLIGHTS
- 20 अप्रैल को लगी भीषण आग के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने साक्ष्य जुटाने का काम पूरा कर लिया है।
- प्रधानमंत्री मोदी की सभा के लिए बनाए गए तीन विशालकाय वाटरप्रूफ डोम अब हटाए जा रहे हैं।
- एचआरआरएल का लक्ष्य 1 जुलाई 2026 से रिफाइनरी में व्यावसायिक उत्पादन शुरू करना है।
- टाटा प्रोजेक्ट्स द्वारा क्षतिग्रस्त हीट एक्सचेंजर्स की मरम्मत का कार्य युद्धस्तर पर शुरू किया गया।
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अग्निकांड के बाद सभा स्थल पर लौटी हलचल
20 अप्रैल की रात क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट (सीडीयू) में लगी भीषण आग ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था। इस घटना के बाद से ही सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे परिसर को अपनी निगरानी में ले लिया था और जांच शुरू की थी।
अब साक्ष्य जुटाने का काम पूरा होने के बाद ठेकेदारों ने सभा स्थल से टेंट और डोम हटाना शुरू कर दिया है। क्रेन और सैकड़ों श्रमिकों की मदद से इन भारी ढांचों को खोलने का काम युद्धस्तर पर किया जा रहा है।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना था कि डोम हटाने की प्रक्रिया में आग की घटना से जुड़े अहम तकनीकी सबूत नष्ट हो सकते थे। इसी कारण पिछले कई दिनों से सभा स्थल पर काम पूरी तरह से बंद कर दिया गया था।
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विशालकाय डोम और भव्य तैयारियों का अंत
प्रधानमंत्री की जनसभा को ऐतिहासिक बनाने के लिए प्रशासन ने यहां अभूतपूर्व इंतजाम किए थे। सभा स्थल पर तीन बड़े वाटरप्रूफ डोम खड़े किए गए थे, जिनमें लाखों लोगों के बैठने की व्यवस्था थी।
इन डोमों में कुल 35 ब्लॉक बनाए गए थे और प्रत्येक ब्लॉक में लगभग 1700 लोगों के बैठने की क्षमता निर्धारित की गई थी। लगभग 500 से अधिक मजदूर इन ढांचों को तैयार करने में दिन-रात लगे हुए थे।
अब वही मजदूर नम आंखों से इन ढांचों को समेट रहे हैं, क्योंकि लोकार्पण का वह उत्सव एक हादसे की भेंट चढ़ गया। अगले दो से चार दिनों में यह पूरा मैदान फिर से खाली और सामान्य नजर आने लगेगा।
तकनीकी जांच और आग के कारणों का विश्लेषण
एचपीसीएल की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के अनुसार, आग हीट एक्सचेंजर स्टैक तक ही सीमित रही थी। आग लगने का मुख्य कारण वैक्यूम रेजिड्यू एक्सचेंजर की इनलेट लाइन पर प्रेशर गेज टैपिंग पॉइंट से रिसाव था।
इस रिसाव के कारण छह एक्सचेंजर और उनसे जुड़े सहायक उपकरण बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। सुरक्षा ऑडिट के बाद अब टाटा प्रोजेक्ट्स ने इन उपकरणों को दुरुस्त करने का काम अपने हाथ में ले लिया है।
तकनीकी विशेषज्ञों की एक टीम लगातार यूनिट की निगरानी कर रही है ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी दुर्घटना को रोका जा सके। औद्योगिक सुरक्षा मानकों को लेकर भी नए सिरे से दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
उत्पादन लक्ष्य और आगामी कार्ययोजना
रिफाइनरी से 1 जुलाई 2026 से व्यावसायिक उत्पादन शुरू करने के लक्ष्य को लेकर काम ने फिर से रफ्तार पकड़ ली है। एचआरआरएल प्रबंधन का प्रयास है कि निर्धारित समय सीमा से पहले ही परीक्षण उत्पादन शुरू हो जाए।
मई के दूसरे पखवाड़े से एलपीजी, मोटर स्पिरिट और हाई स्पीड डीजल जैसे मुख्य उत्पादों का परीक्षण उत्पादन शुरू करने की योजना है। इससे व्यावसायिक उत्पादन की प्रक्रिया को समय पर पूरा करने में बड़ी मदद मिलेगी।
"तीन से चार सप्ताह में मरम्मत कार्य पूरा कर लिया जाएगा और मई के दूसरे पखवाड़े से परीक्षण उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य है।" - एचआरआरएल आधिकारिक सूत्र।
राजनीतिक प्रभाव और जनता की प्रतीक्षा
प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा राजस्थान में विकास के एक नए युग की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा था। आग की घटना ने न केवल लोकार्पण को टाला है, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बाड़मेर, बालोतरा और पूरे पश्चिमी राजस्थान की नजरें अब केंद्र सरकार और एचपीसीएल के अगले फैसले पर टिकी हैं। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि मरम्मत के बाद प्रधानमंत्री जल्द ही नई तारीख के साथ यहां आएंगे।
फिलहाल प्रशासन 'वेट एंड वॉच' की स्थिति में है और रिफाइनरी परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक पुख्ता किया जा रहा है। औद्योगिक सुरक्षा के नए प्रोटोकॉल लागू करने पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
निष्कर्ष और भविष्य की राह
पचपदरा रिफाइनरी में डोम का हटाया जाना भले ही एक अस्थायी ठहराव का संकेत हो, लेकिन मरम्मत कार्य की गति विकास के प्रति प्रतिबद्धता दर्शाती है। राजस्थान के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का सफल संचालन प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
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