thinQ360
🏠 टॉप 🔥 राजनीति 📍 राज्य 📰 लाइफ स्टाइल 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 📰 जालोर 👤 शख्सियत 💻 तकनीक ✍️ Blog ⭐ सफलता की कहानी 🚨 क्राइम 📰 मनचाही ▶️ YouTube
राजनीति

पिंडवाड़ा में बड़ा उलटफेर: 30 साल बाद पिंडवाड़ा में कांग्रेस का बोर्ड, भाजपा का गढ़ ढहा

गणपत सिंह मांडोली

पिंडवाड़ा नगर पालिका में 30 साल बाद कांग्रेस का बोर्ड बनेगा। कांग्रेस ने 25 में से 13 वार्डों में जीत दर्ज की, जबकि भाजपा को सिर्फ 7 सीटें मिलीं। 5 निर्दलीय भी जीते।

+Follow us
thinQ360 को गूगल पर फेवरेट बनाएँ

HIGHLIGHTS

  • पिंडवाड़ा नगर पालिका में 30 साल बाद कांग्रेस का बोर्ड बनने जा रहा है।
  • कांग्रेस ने 25 में से 13 वार्डों में जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल किया।
  • भाजपा को केवल 7 सीटों से संतोष करना पड़ा, 5 पर निर्दलीय विजयी रहे।
  • वार्ड संख्या 6 में टाई होने पर लॉटरी से निर्दलीय प्रत्याशी को विजेता घोषित किया गया।
pindwara municipal election result congress wins after 30 years bjp

पिंडवाड़ा | पिंडवाड़ा नगर पालिका में लगभग तीन दशकों के बाद एक बड़ा राजनीतिक उलटफेर हुआ है। सोमवार को हुई मतगणना के बाद कांग्रेस ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है, जिससे 30 साल बाद पार्टी का बोर्ड बनना तय हो गया है।

इन नतीजों ने पिंडवाड़ा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक पकड़ को एक बड़ा झटका दिया है।

चुनाव परिणाम एक नजर में

सोमवार सुबह 8 बजे मतगणना शुरू हुई और पांच राउंड में पूरी हुई। कुल 25 वार्डों के लिए हुए चुनाव में कांग्रेस ने 13 वार्डों में शानदार जीत दर्ज की।

वहीं, सत्ता में रही भाजपा को केवल 7 सीटों से ही संतोष करना पड़ा। इसके अलावा 5 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत हासिल की। परिणाम सामने आते ही कांग्रेस समर्थकों में जश्न का माहौल बन गया।

क्यों ढहा भाजपा का 30 साल पुराना किला?

पिंडवाड़ा में भाजपा का गढ़ ढहना केवल चुनावी हार नहीं है, बल्कि यह स्थानीय राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत भी है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस हार के पीछे कई प्रमुख कारण रहे।

  • संगठनात्मक कमजोरी: आरोप है कि समय के साथ पार्टी में निर्णय लेने की प्रक्रिया कुछ विशेष लोगों तक ही सीमित हो गई, जिससे कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ा।
  • जनसुविधाओं का मुद्दा: रेलवे जंक्शन, अस्पताल और कॉलेज जैसी जनसुविधाओं के स्थानांतरण को लेकर स्थानीय लोगों में काफी नाराजगी थी, जो चुनाव में एक बड़ा मुद्दा बना।
  • बदलाव की चाहत: तीन दशक तक एक ही पार्टी का शासन रहने के कारण मतदाताओं में बदलाव की स्वाभाविक इच्छा थी। जनता ने इस बार नए चेहरों को मौका देने का मन बनाया।
  • आंतरिक कलह: पिछले दो बोर्डों में भाजपा पार्षदों द्वारा ही अपनी पार्टी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना पार्टी की आंतरिक खींचतान को उजागर करता है, जिसका असर चुनाव पर पड़ा।

वार्ड 6 में लॉटरी से हुआ फैसला

इस चुनाव का सबसे दिलचस्प मुकाबला वार्ड संख्या 6 में देखने को मिला। यहां भाजपा और एक निर्दलीय प्रत्याशी को बराबर-बराबर वोट मिले।

नतीजा टाई होने के बाद, चुनावी प्रक्रिया के अनुसार लॉटरी का सहारा लिया गया। लॉटरी में किस्मत ने निर्दलीय प्रत्याशी का साथ दिया और उन्हें विजेता घोषित किया गया।

नई परिषद में अनुभव और युवाओं का संगम

इस चुनाव के बाद बनने वाली नई नगर पालिका परिषद में नए और पुराने चेहरों का मिश्रण देखने को मिलेगा। कई नए चेहरे पहली बार जीतकर आए हैं, जबकि कुछ पूर्व पार्षदों ने भी वापसी की है।

अब कांग्रेस के सामने इस जनादेश पर खरा उतरने और पिंडवाड़ा में विकास, पारदर्शिता और एक मजबूत स्थानीय नेतृत्व प्रदान करने की बड़ी चुनौती होगी।

शेयर करें: