thinQ360
🏠 टॉप 🔥 राजनीति 📍 राज्य 📰 लाइफ स्टाइल 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 📰 जालोर 👤 शख्सियत 💻 तकनीक ✍️ Blog ⭐ सफलता की कहानी 🚨 क्राइम 📰 मनचाही ▶️ YouTube
राजनीति

संकट में भारत की कूटनीति: युद्ध संकट में भारत: PM मोदी ने बताया कैसे देश उबरा

Pradeep Beedawat

पीएम मोदी ने बताया कि कैसे वैश्विक युद्धों के बीच भारत ने पेट्रोल-डीजल और खाद संकट का सामना किया। उन्होंने सरकार की कूटनीति, दूरदर्शी नीतियों और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की रणनीति पर प्रकाश डाला।

+Follow us
thinQ360 को गूगल पर फेवरेट बनाएँ

HIGHLIGHTS

  • युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी।
  • संकट के समय भारत ने अपनी ईंधन आयात रणनीति का विस्तार किया और 25-26 देशों के बजाय 40 से अधिक देशों से ईंधन मंगाना शुरू किया।
  • सरकार ने जनता को राहत देने के लिए अप्रैल से जून के बीच अकेले डीजल-पेट्रोल पर 75,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का घाटा उठाया।
  • यूक्रेन युद्ध के बाद जब यूरिया की बोरी की कीमत 3000 रुपये तक पहुंच गई, तब भी भारत में किसानों को यह सिर्फ 300 रुपये में दी गई।

राजस्थान | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक संकटों के दौरान भारत की मजबूत स्थिति और सरकार की दूरदर्शी नीतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कैसे युद्धों से उत्पन्न हुए पेट्रोल-डीजल और खाद संकट का देश ने सफलतापूर्वक सामना किया और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा।

पेट्रोल-डीजल संकट: जब आसमान छू रहे थे दाम

पीएम मोदी ने कहा कि युद्ध की वजह से डीजल और पेट्रोल पर बहुत बड़ा संकट आया था।

उन्होंने याद दिलाया कि हमारे देश में तेल के बड़े-बड़े कुएं नहीं हैं।

जब यह संकट बढ़ा, तो क्रूड ऑयल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी।

आयात के रास्ते भी बंद हो गए थे, जिससे स्थिति और भी गंभीर हो गई।

दुनिया के कई देशों में डीजल-पेट्रोल की कीमतों में 40 से 50 प्रतिशत का इजाफा हो गया।

कई देशों में तो हालात इतने खराब हो गए कि डीजल-पेट्रोल कोटे के आधार पर मिलने लगा था।

सरकार ने उठाया 75,000 करोड़ का घाटा

पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि इन वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, भारत में एक दिन भी ऐसे हालात नहीं आए।

उन्होंने कहा, "अफवाहें बहुत फैलाई गईं, लोगों को डराया गया, भड़काया गया, राजनीति के खेल खेले गए।"

लेकिन जिनके इरादे गलत थे, वे सफल नहीं हो पाए।

दूर-सुदूर इलाकों में भी छोटी-मोटी अड़चनों के अलावा सप्लाई की कोई बड़ी चुनौती नहीं आई।

सरकार ने जनता पर बोझ कम करने के लिए बड़े कदम उठाए।

अप्रैल से जून के बीच ही अकेले डीजल-पेट्रोल में 75,000 करोड़ से ज्यादा का घाटा कंपनियों को उठाना पड़ा।

यह घाटा इतना बड़ा था कि इससे एक नई रिफाइनरी बन सकती थी।

इस घाटे को पूरा करने की जिम्मेदारी सरकारी खजाने से उठाई गई।

सरकार ने प्रति लीटर एक रुपये की एक्साइज ड्यूटी भी कम की ताकि जनता पर बहुत ज्यादा बोझ न पड़े।

कूटनीति का कमाल: 40 देशों से ईंधन आयात

प्रधानमंत्री ने कहा कि युद्ध के इसी समय में भारत की दूसरे देशों के साथ दोस्ती बहुत काम आई।

उन्होंने बताया कि जब यह संकट शुरू हुआ था, उससे पहले भारत 25-26 देशों से ही ईंधन का आयात करता था।

लेकिन संकट के समय भारत की डिप्लोमेसी का जलवा दिखा।

दूसरे देशों के साथ हमारे अच्छे संबंध इस संकट की घड़ी में बहुत काम आए।

युद्ध के दौरान ही भारत ने अपनी रणनीति बदली और 40 से ज्यादा देशों से ईंधन मंगाने लगा।

राष्ट्रहित सर्वोपरि: भारत का स्पष्ट संदेश

भारत ने दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया कि हमारे लिए राष्ट्रहित और राष्ट्र के नागरिकों का हित सर्वोपरि है।

पीएम मोदी ने कहा, "नागरिक देवभव, यह हमारा मंत्र है।"

उन्होंने कहा कि देश इतनी अप्रत्याशित चुनौती से ऐसे ही नहीं उबरा, इसके पीछे हमारी एक दशक से चल रही दूरदर्शी नीतियों की सफलता भी है।

दूरदर्शी नीतियां: रिफाइनरी क्षमता में भारत बना चौथा सबसे बड़ा देश

आज हम राजस्थान रिफाइनरी का उद्घाटन कर रहे हैं। हमने 2017 में इसके लिए एमओयू साइन किया था।

उन्होंने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि 2018 से 2023 तक राजस्थान में कांग्रेस सरकार के असहयोग के कारण यहां का काम लगभग ठप ही रह गया।

लेकिन जैसे ही डबल इंजन सरकार आई, इसका काम तेजी से आगे बढ़ा और आज हम इसका लोकार्पण भी कर रहे हैं।

पीएम मोदी ने अपनी कार्यशैली पर जोर देते हुए कहा, "जिसका शिलान्यास हम करते हैं, उसका लोकार्पण भी हम ही करते हैं।"

इसी तरह, भारत ने अपनी रिफाइनरी क्षमता को लगातार बढ़ाया है।

उन्होंने तुलना करते हुए बताया कि अमेरिका में पिछले 50 वर्षों में एक भी नई रिफाइनरी नहीं बनी है।

यूरोप की रिफाइनरी क्षमता लगातार कम होती गई है।

वहीं, भारत आज विश्व की चौथी सबसे बड़ी रिफाइनरी क्षमता वाला देश बन चुका है।

उन्होंने भविष्य की योजनाओं पर कहा, "हम यहां रुकने वाले नहीं हैं। आने वाले वर्षों में यह क्षमता और भी बढ़ने वाली है।"

इन्हीं प्रयासों के कारण भारत सदी के सबसे बड़े ऊर्जा संकट से लड़कर उभरा है।

किसानों का संकट: जब खाद के लिए मची थी हाहाकार

पीएम मोदी ने किसानों की चुनौतियों का भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि दुनिया में युद्ध और अशांति से हमारे किसानों के लिए भी चुनौतियां पैदा होती हैं।

वेस्ट एशिया क्राइसिस और यूक्रेन युद्ध के कारण दुनिया में खाद का बड़ा संकट पैदा हुआ।

फर्टिलाइजर के लिए गंभीर समस्या पैदा हो गई थी।

किसानों को मिली ₹3000 की यूरिया सिर्फ ₹300 में

यूक्रेन युद्ध के बाद एक समय ऐसा आया जब एक यूरिया की बोरी की कीमत 3000 रुपये से भी ऊपर पहुंच गई थी।

लेकिन हमने अपने किसानों को राहत दी। जो बोरी दुनिया के बाजार में 3000 की थी, हम मेरे देश के किसानों को सिर्फ 300 रुपये में देते रहे।

इसके लिए सरकारी खजाने से लाखों करोड़ रुपये खर्च करने पड़े और सब्सिडी दी गई।

आपूर्ति के लिए जो सप्लाई चेन प्रभावित हुई थी, भारत ने उसके लिए भी समाधान निकाले।

सरकार ने वैकल्पिक रास्ते तलाशे। हमने कई देशों में हमारे दूतावासों को विशेष जिम्मेदारी सौंपी।

दूसरे देशों से उर्वरक खरीदने की पहल की गई।

आयात के साथ-साथ हमने घरेलू उत्पादन भी बढ़ाया और उस पर ध्यान केंद्रित किया।

इतना ही नहीं, हमने प्राकृतिक खेती जैसे विकल्पों को भी बढ़ावा दिया और जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ भी सख्ती की।

MSME को सहारा: इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम

साथियों, इसी तरह हमने हमारे उद्योगों और एमएसएमई का भी ध्यान रखा।

एमएसएमई को बढ़ती लागत का सामना करना पड़ रहा था।

इसलिए हम इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम का एक नया चरण लेकर आए।

इस स्कीम के तहत बैंकों ने एमएसएमई को 20% तक का अतिरिक्त लोन दिया।

सरकार ने एमएसएमई के इन सभी लोन के लिए 100% गारंटी दी, और यह मोदी की गारंटी है।

इसका बहुत लाभ लघु उद्योगों और कुटीर उद्योगों को मिला।

140 करोड़ देशवासियों का आभार

ऐसे ही अनेक फैसलों का नतीजा है कि आज हमारे छोटे-बड़े उद्योग खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

हमारी सरकार ने निरंतर निर्णय लिए क्योंकि हमें भारत के सामर्थ्य पर भरोसा था।

हमें हमारे देशवासियों की क्षमताओं पर, उनकी सूझबूझ पर शत-प्रतिशत भरोसा था।

आज मैं 140 करोड़ देशवासियों का आभार प्रकट करता हूं।

मैं देशवासियों को नमन करते हुए धन्यवाद कहता हूं, जिस तरह वो इस मुश्किल समय में देश के साथ मजबूती से खड़े रहे।

जिस तरह देशवासियों ने अफवाह, डर और भ्रम फैलाने वालों का सामना किया, देश में अस्थिरता फैलाने की साजिशों को नाकाम किया।

देश उसी विश्वास के भरोसे आगे बढ़ पाया है।

जो लोग भारत को असफल होते देखना चाह रहे थे, इसके लिए भविष्यवाणी भी करने लग गए थे, वो जरूर आज निराशा की गर्त में पड़े होंगे।

अंत में उन्होंने कहा कि आज विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास के साथ ही, मुझे यहां 'एक पेड़ मां के नाम' खेजड़ी का पौधा लगाने का सौभाग्य भी मिला है।

*Edit with Google AI Studio

शेयर करें: