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जालोर: बहुचर्चित गणपतसिंह मांडोली मौत प्रकरण में बड़ा खुलासा, मुख्य आरोपी सहित तीन गिरफ्तार

गणपत सिंह मांडोली गणपत सिंह मांडोली 123

जालोर के मांडोली में 18 महीने पहले हुई गणपतसिंह राजपूत की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मुख्य आरोपी गजेंद्रसिंह ने नार्को टेस्ट के लिए 2 करोड़ रुपये की मांग की थी, जिसके बाद पुलिस ने ठोस साक्ष्य जुटाकर यह कार्रवाई की।

HIGHLIGHTS

  1. 1 18 महीने पुराने गणपतसिंह राजपूत मौत मामले में पुलिस को मिली बड़ी सफलता। मुख्य आरोपी गजेंद्रसिंह ने नार्को टेस्ट की सहमति के लिए मांगे थे 2 करोड़ रुपये। 80 वर्षीय बुजुर्ग मां और पत्नी ने 18 दिन बाद समाप्त किया आमरण अनशन। आईपीएस काम्बले की जांच में चिन्हित संदिग्धों को पुलिस ने किया गिरफ्तार।

जालोर | राजस्थान के जालोर जिले के बहुचर्चित गणपतसिंह राजपूत मांडोली मौत प्रकरण में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। करीब 18 महीने से न्याय की राह देख रहे परिवार के लिए यह एक बड़ी जीत मानी जा रही है। पुलिस ने मंगलवार, 17 मार्च को मांडोली निवासी गजेंद्रसिंह पुत्र सुरेंद्रसिंह राजपूत, वागाराम पुत्र कानाराम भील और लच्छू पत्नी सवाराम चौधरी को गिरफ्तार किया। इन आरोपियों को भीनमाल न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें चार दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।

डेढ़ साल पुराना है पूरा मामला

यह मामला करीब 18 महीने पहले का है जब मांडोली गांव के निवासी गणपतसिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। परिजनों ने इसे हत्या करार देते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की थी। इस मामले को लेकर जिले भर में काफी आक्रोश था और राजपूत समाज सहित विभिन्न संगठनों ने तीन बार बड़े स्तर पर धरना प्रदर्शन किए थे। पुलिस पर लंबे समय से आरोपियों को पकड़ने का दबाव था, लेकिन ठोस साक्ष्यों के अभाव में गिरफ्तारी रुकी हुई थी।

आईपीएस काम्बले की जांच और 2 करोड़ की मांग

इस मामले की जांच पूर्व में आईपीएस अधिकारी गोपीनाथ शरण काम्बले द्वारा की गई थी। उन्होंने अपनी जांच के दौरान तीन आरोपियों को संदिग्ध के रूप में चिन्हित कर लिया था। हालांकि, मामले को तार्किक अंजाम तक पहुंचाने के लिए नार्को टेस्ट की आवश्यकता महसूस की गई थी। जब मुख्य आरोपी गजेंद्रसिंह से नार्को टेस्ट के लिए सहमति मांगी गई, तो उसने पुलिस के सामने एक चौंकाने वाली शर्त रख दी। गजेंद्रसिंह ने नार्को टेस्ट के लिए अपनी सहमति देने के बदले 2 करोड़ रुपये की मांग की थी। इस अजीबोगरीब मांग के कारण जांच में एक समय गतिरोध पैदा हो गया था।

पुलिस की विशेष टीम और ठोस साक्ष्य

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भूपेंद्रसिंह ने बताया कि पुलिस इस मामले में लगातार वैकल्पिक साक्ष्य जुटाने की कोशिश कर रही थी। विशेष जांच दल ने तकनीकी साक्ष्यों और स्थानीय इनपुट के आधार पर कड़ियां जोड़ीं। जैसे ही पुलिस को ठोस सुराग मिले, आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। गहन पूछताछ के बाद पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार करने का निर्णय लिया। जांच अधिकारी ने स्पष्ट किया कि पुलिस हर पहलू पर गहराई से जांच कर रही है और यदि इस मामले में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता पाई जाती है, तो उसे भी बख्शा नहीं जाएगा।

18 दिनों का अनशन और भावुक अंत

न्याय की मांग को लेकर गणपतसिंह की 80 वर्षीय बुजुर्ग मां हवा कंवर और उनकी पत्नी भारती कंवर पिछले 18 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठी थीं। उनकी बिगड़ती सेहत और प्रशासन की चुप्पी को लेकर स्थानीय लोगों में भारी रोष था। आरोपियों की गिरफ्तारी की खबर मिलते ही रानीवाड़ा विधायक नारायण सिंह देवल, राम सिंह चारणीम, रविंद्र सिंह बालावत और अन्य समाजबंधु धरना स्थल पर पहुंचे। वहां विधायक ने बुजुर्ग मां और पत्नी को जूस पिलाकर उनका अनशन समाप्त करवाया।

न्याय की उम्मीद और परिवार का धन्यवाद

अनशन समाप्त करने के बाद गणपतसिंह की मां हवा कंवर ने भावुक होते हुए उन सभी लोगों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने इस लंबे संघर्ष में उनका साथ दिया। उन्होंने उम्मीद जताई कि पुलिस अब न्यायालय में मजबूत पैरवी करेगी ताकि आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा मिल सके। मृतक के भाई अभय सिंह और कल्याण सिंह ने भी पुलिस की कार्रवाई पर संतोष जताया और कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य न्याय प्राप्त करना था। फिलहाल पुलिस रिमांड के दौरान आरोपियों से इस घटनाक्रम के पीछे के असली मकसद और साजिश के अन्य पहलुओं के बारे में पूछताछ कर रही है।

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