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भारत

सऊदी अरब ने ट्रम्प से कहा- ईरान पर हमले जारी रखें, मिडिल ईस्ट में सत्ता परिवर्तन का यही सही मौका

प्रदीप बीदावत प्रदीप बीदावत 6

सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने डोनाल्ड ट्रम्प से ईरान पर हमले जारी रखने की अपील की है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी इसे खाड़ी क्षेत्र के लिए बड़ा खतरा मानता है और वहां सत्ता परिवर्तन चाहता है, जबकि आधिकारिक तौर पर सऊदी शांति की बात कर रहा है।

HIGHLIGHTS

  1. 1 सऊदी क्राउन प्रिंस ने ट्रम्प से ईरान की मौजूदा सरकार को खत्म करने की अपील की।डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान पर हमले को 5 दिनों के लिए टाल दिया है।चीन और पाकिस्तान मध्यस्थता के जरिए शांति स्थापित करने की कोशिश में जुटे।मिडिल ईस्ट संकट के कारण तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचीं।
saudi arabia urges trump continue iran attacks regime change

नई दिल्ली |  पश्चिम एशिया यानी मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और शांति दांव पर लगी है। हाल ही में आई एक चौंकाने वाली रिपोर्ट ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ एक गुप्त और बेहद महत्वपूर्ण चर्चा की है। इस बातचीत में क्राउन प्रिंस ने ट्रम्प से अपील की है कि वे ईरान पर सैन्य हमले जारी रखें। सऊदी अरब का मानना है कि ईरान की मौजूदा सरकार न केवल उनके देश के लिए, बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र के लिए एक स्थायी खतरा है।

सऊदी की गुप्त रणनीति और सत्ता परिवर्तन की मांग

सऊदी अरब की इस मांग ने विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है, क्योंकि सार्वजनिक मंचों पर रियाद हमेशा शांति और कूटनीति की बात करता रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, क्राउन प्रिंस ने ट्रम्प से कहा कि यह मिडिल ईस्ट के नक्शे और भविष्य को बदलने का सबसे सटीक मौका है। सऊदी अरब का मानना है कि जब तक ईरान में सत्ता परिवर्तन नहीं होता, तब तक क्षेत्र में स्थिरता आना नामुमकिन है। हालांकि, इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद सऊदी सरकार ने तुरंत सफाई दी है। आधिकारिक बयान में कहा गया है कि रियाद की नीति अब भी संघर्ष का शांतिपूर्ण समाधान ढूंढने की है और वह किसी भी तरह के युद्ध विस्तार के पक्ष में नहीं है। लेकिन पर्दे के पीछे की कहानी कुछ और ही इशारा कर रही है।

ट्रम्प का 5 दिनों का अल्टीमेटम और 15 मुद्दों पर सहमति

दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस पूरे मामले में एक सधा हुआ रुख अपनाया है। ट्रम्प ने घोषणा की है कि अमेरिका और ईरान के बीच हालिया बातचीत के दौरान 15 प्रमुख मुद्दों पर सहमति बनी है। हालांकि, इन मुद्दों की पूरी सूची अभी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन इसे एक बड़ी कूटनीतिक जीत माना जा रहा है। ट्रम्प ने ईरान के पावर प्लांट्स पर होने वाले संभावित हमलों को फिलहाल 5 दिनों के लिए टाल दिया है। इससे पहले उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए केवल 48 घंटे की चेतावनी दी थी। ट्रम्प का यह कदम दिखाता है कि वे सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ बातचीत का रास्ता भी खुला रखना चाहते हैं।

चीन और पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशें

इस महासंकट के बीच दुनिया की अन्य महाशक्तियां भी सक्रिय हो गई हैं। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फोन पर लंबी बातचीत की है। चीन ने अपील की है कि सभी पक्षों को हर संभव मौके का फायदा उठाकर शांति वार्ता शुरू करनी चाहिए। वांग यी का कहना है कि लड़ाई के बजाय संवाद ही एकमात्र समाधान है। वहीं, पाकिस्तान भी इस मामले में एक पुल की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने हाल ही में डोनाल्ड ट्रम्प से बात की है। पाकिस्तान ने प्रस्ताव दिया है कि यदि अमेरिका और ईरान सहमत हों, तो वह सार्थक और निर्णायक बातचीत की मेजबानी करने के लिए तैयार है।

ईरान की सैन्य ताकत का प्रदर्शन और इजराइल की कार्रवाई

तनाव के बीच ईरान ने अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करते हुए एक वीडियो जारी किया है। इस वीडियो में जमीन के नीचे बने गुप्त ठिकानों में सैकड़ों मिसाइलें दिखाई गई हैं। ईरान का कहना है कि यह तो केवल एक झलक है, उसकी असली ताकत इससे कहीं ज्यादा है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह केवल अस्थायी युद्धविराम नहीं, बल्कि संघर्ष का स्थायी समाधान चाहता है। इस बीच, इजराइल ने भी अपनी आक्रामक कार्रवाई जारी रखी है। इजराइली सेना ने लेबनान की लितानी नदी पर स्थित अल-कासमिया ब्रिज को नष्ट कर दिया है, जिससे दक्षिणी लेबनान का संपर्क देश के बाकी हिस्सों से कट गया है। लेबनान में अब तक इजराइली हमलों में 1,000 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।

भारत पर असर और वैश्विक आर्थिक संकट

मिडिल ईस्ट की इस जंग का सीधा असर भारत पर भी पड़ रहा है। भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने नई दिल्ली में ईरानी राजदूत मोहम्मद फतहाली से मुलाकात की है। भारत की सबसे बड़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे अपने 20 जहाजों और वहां रहने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर है। इसके अलावा, वैश्विक तेल बाजार में भी भारी उथल-पुथल मची हुई है। कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बनी हुई हैं। यूरोपीय यूनियन ने रूसी तेल पर प्रतिबंध लगाने का फैसला फिलहाल टाल दिया है, क्योंकि ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बहुत अधिक है। वियतनाम जैसे देशों में ईंधन की कमी के कारण उड़ानें रद्द करनी पड़ रही हैं। यह युद्ध अब केवल दो देशों के बीच नहीं, बल्कि एक वैश्विक आर्थिक संकट का रूप ले चुका है।

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