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राज्य

शुपालकों के लिए आधुनिक शिक्षा और संसाधनों को मिलेगा बढ़ावा

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HIGHLIGHTS

  1. 1 कार्यशाला में मुख्य अतिथि पशुपालन, डेयरी और गोपालन मंत्री  जोराराम कुमावत ने राज्य सरकार द्वारा पशुपालन के क्षेत्र में उठाए गए कदमों के बारे में जिक्र करते हुए कहा कि पशुओं को बेहतर चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराना हमारा लक्ष्य है
modern education and resources will get a boost for shupalaks

जयपुर । जामडोली स्थित पोस्ट ग्रेजुएट इन्स्टीट्यूट ऑफ वेटरिनरी एजुकेशन एंड रिसर्च संस्थान में बुधवार को पशुपालन डिप्लोमा कार्यक्रम: सुधार और उपलब्धियां विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला में मुख्य अतिथि पशुपालन, डेयरी और गोपालन मंत्री  जोराराम कुमावत ने राज्य सरकार द्वारा पशुपालन के क्षेत्र में उठाए गए कदमों के बारे में जिक्र करते हुए कहा कि पशुओं को बेहतर चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराना हमारा लक्ष्य है।

किसान और पशुपालक मजबूत होंगे तो राज्य मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों में पशु चिकित्सा सेवाओं को मजबूत बनाने में पशुपालन डिप्लोमा कार्यक्रमों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। राज्य में सरकारी और निजी संस्थानों के माध्यम से पशुपालन डिप्लोमा कोर्स संचालित किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि पशु चिकित्सा शिक्षा से जुड़े संस्थान निर्धारित मापदंडों के अनुसार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर कुशल एवं सक्षम मानव संसाधन उपलब्ध कराएं।

भौतिक और मानव संसाधन के बीच संतुलन पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता के लिए क्षेत्र में काम कर रहे पशु चिकित्सा अधिकारियों और शिक्षा संस्थानों के बीच तालमेल होना भी आवश्यक है। 

कार्यशाला में शासन सचिव पशुपालन डॉ. समित शर्मा ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा व्यवस्थाएं प्रदान करना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। हमें डिप्लोमा संस्थानों में भी आधुनिक शिक्षण तकनीकों का उपयोग करना चाहिए जिससे हमारे विद्यार्थी उच्च स्तर की व्यावसायिक दक्षता के साथ अपने क्षेत्र में सेवा के लिए उतर सकें। उन्होंने कहा कि सभी संस्थानों के पास शिक्षण के लिए आवश्यक सभी प्रकार के उपकरण और औजारों की उपलब्धता भी सुनिश्चित होनी चाहिए। 

पशुपालन निदेशक डॉ आनंद सेजरा ने कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य पशु चिकित्सा शिक्षा में सुधार लाना है जिससे पशुपालकों को पशुओं के लिए बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में मदद मिलेगी।
कार्यशाला में उप शासन सचिव श्रीमती संतोष करोल, पशुपालन निदेशक डॉ आनंद सेजरा, राजुवास के प्रतिकुलपति डॉ. हेमन्त दाधीच तथा संस्थान के अधिष्ठाता डॉ. धर्म सिंह मीना सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

कार्यशाला में प्रदेश के सभी सरकारी और निजी क्षेत्र के ए. एच. डी. पी. संस्थान के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और अपने अपने संस्थानों की वर्तमान स्थिति तथा उपलब्धियों के बारे में पावर प्वाइंट के माध्यम से अपनी प्रस्तुति दी। कार्यशाला में संस्थानों को और बेहतर बनाने के लिए विद्यार्थियों और स्टाफ के लिए बायोमीट्रिक उपस्थिति के क्रियान्वयन, सीसीटीवी कैमरा प्रणालियों के एकीकरण तथा संस्थागत वेबसाइट के लिए यू आर एल के प्रावधानों पर चर्चा हुई और महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

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