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भारत

संजय राउत के बयान पर प्रियंका की असहमति: संजय राउत के बयान पर प्रियंका चतुर्वेदी ने जताई आपत्ति

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शिवसेना (UBT) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने अपनी ही पार्टी के सांसद संजय राउत के अल्बानिया में सुप्रीम कोर्ट जलाए जाने संबंधी बयान पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने हिंसा को देश के हितों के खिलाफ बताते हुए शांतिपूर्ण विरोध पर जोर दिया है।

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HIGHLIGHTS

  • प्रियंका चतुर्वेदी ने संजय राउत के अल्बानिया घटना संबंधी बयान पर आपत्ति जताई है।
  • राउत ने अल्बानिया में सुप्रीम कोर्ट जलाए जाने का जिक्र करते हुए भारत को सबक लेने की बात कही थी।
  • प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि हिंसा से कुछ हासिल नहीं होता और यह देश के हितों के खिलाफ है।
  • उन्होंने जोर दिया कि विरोध का तरीका हमेशा शांतिपूर्ण और संवैधानिक होना चाहिए।
priyanka chaturvedi objects sanjay raut statement

संजय राउत के बयान पर प्रियंका चतुर्वेदी की प्रतिक्रिया

शिवसेना (UBT) की नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने अपनी ही पार्टी के सांसद संजय राउत के एक बयान पर सवाल उठाए हैं। यह मामला अल्बानिया में सुप्रीम कोर्ट की इमारत को जलाए जाने की घटना से जुड़ा है।

राउत का सोशल मीडिया पोस्ट

संजय राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट साझा की थी। इसमें उन्होंने अल्बानिया में सुप्रीम कोर्ट जलाए जाने की घटना का उल्लेख किया था।

राउत ने दावा किया कि वहां के लोग भ्रष्ट प्रधानमंत्री की मदद के आरोपों को लेकर सुप्रीम कोर्ट से नाराज थे। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने संसद और सरकारी कार्यालयों को भी निशाना बनाया था।

भारत के लिए सबक की बात

अपनी पोस्ट में संजय राउत ने कहा था कि सभी देशों को, विशेषकर भारत को, इन घटनाओं से सबक लेना चाहिए। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ गई है।

प्रियंका चतुर्वेदी का रुख

समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में प्रियंका चतुर्वेदी ने इस पर आपत्ति जताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी घटनाओं से हिंसक विरोध प्रदर्शनों को बढ़ावा देने वाला संदेश नहीं जाना चाहिए।

हमें इस घटना से केवल यही सबक लेना चाहिए कि हमें कभी भी न्याय प्रणाली और कानून-व्यवस्था को अपने हाथों में नहीं लेना चाहिए। हिंसक प्रदर्शनों से बचना बेहद जरूरी है। हिंसा से कुछ हासिल नहीं होता और यह देश के हितों के खिलाफ है।

शांतिपूर्ण विरोध की वकालत

प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए लोगों को कानून के दायरे में रहकर अपनी बात रखनी चाहिए।

उन्होंने बांग्लादेश, नेपाल, अल्बानिया और फ्रांस में हुए प्रदर्शनों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विरोध का अधिकार सबको है, लेकिन तरीका शांतिपूर्ण होना चाहिए।

*Edit with Google AI Studio

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