चंडीगढ़ | पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी कमर कस ली है। पार्टी राज्य में सांगठनिक बदलाव करते हुए नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त करने की तैयारी में है। यह फैसला वर्तमान अध्यक्ष सुनील जाखड़ का कार्यकाल समाप्त होने के मद्देनजर लिया जा रहा है। जाखड़ का तीन साल का कार्यकाल जुलाई में पूरा हो रहा है।
पंजाब: BJP को नए अध्यक्ष की तलाश, सिख चेहरे पर दांव
पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 के लिए भाजपा नए सिख चेहरे को अध्यक्ष बना सकती है।
HIGHLIGHTS
- पंजाब भाजपा में जुलाई में समाप्त हो रहा है सुनील जाखड़ का कार्यकाल।
- 2027 विधानसभा चुनावों के लिए सिख चेहरे को कमान देने की तैयारी।
- रवनीत बिट्टू, मनप्रीत बादल और मनजीत राय रेस में सबसे आगे।
- पार्टी पंजाब में अपनी 'बाहरी' छवि बदलने की रणनीति पर कर रही काम।
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सिख चेहरे पर दांव खेलने की तैयारी
भाजपा इस बार पंजाब में किसी प्रभावशाली सिख चेहरे को जिम्मेदारी दे सकती है। सिख बहुसंख्यक राज्य में यह दांव पार्टी के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इससे भाजपा की 'बाहरी पार्टी' वाली छवि बदलने में मदद मिलेगी। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी पंजाब में सिख नेतृत्व की आवश्यकता पर लगातार जोर दे रहे हैं।
मुख्यमंत्री सैनी हाल ही में पंजाब के कार्यक्रमों और रैलियों में काफी सक्रिय रहे हैं। वे लगातार पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कर रहे हैं और रणनीति बना रहे हैं।
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रेस में शामिल ये दिग्गज नाम
अध्यक्ष पद की दौड़ में केंद्रीय मंत्री रवनीत बिट्टू और पूर्व वित्त मंत्री मनप्रीत बादल का नाम सबसे ऊपर है। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने केवल ढिल्लों के नाम का सुझाव दिया है।
मालवा क्षेत्र के सक्रिय नेता मनजीत राय का नाम भी चौंकाने वाला है। वहीं, पूर्व नौकरशाह जगमोहन राजू को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का बेहद करीबी माना जाता है।
जगमोहन राजू ने 2022 में सरकारी सेवा छोड़कर राजनीति में प्रवेश किया था। फिलहाल वे पंजाब भाजपा में महासचिव की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और संगठन में सक्रिय हैं।
राज्यसभा सांसद सतनाम संधू और तरुण चुघ भी अध्यक्ष पद के मजबूत दावेदार हैं। राणा गुरमीत सोढ़ी और फतेह जंग बाजवा के नामों पर भी विचार संभव है।
"पंजाब में सिख चेहरा पार्टी के विस्तार और सामाजिक समीकरणों को साधने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।"
तरुण चुघ लंबे समय से पंजाब के मामलों से जुड़े वरिष्ठ नेता हैं। उनका पुराना संगठनात्मक अनुभव 2027 के चुनाव में पार्टी के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।
मई के अंत या जून की शुरुआत में नए नाम की घोषणा हो सकती है। पार्टी अब राज्य में अपनी राजनीतिक जड़ें गहरी करना चाहती है और जनाधार बढ़ाना चाहती है।
यह बदलाव 2027 के चुनावों में भाजपा के लिए निर्णायक साबित होगा। सुनील जाखड़ पद छोड़ने के बाद भी चुनाव अभियान में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।
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