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राजनीति

लड़कियों पर पाबंदी क्यों?: लड़के गाली दें तो ठीक, लड़कियां दें तो कल्चरल शॉक: राहुल

जोगेन्द्र सिंह शेखावत

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पीएम मोदी के 'कल्चरल शॉक' बयान पर हमला बोलते हुए इसे संकीर्ण और पितृसत्तात्मक सोच बताया। उन्होंने कहा कि लड़कों को छूट और लड़कियों पर पाबंदी क्यों?

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HIGHLIGHTS

  • कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पीएम मोदी के 'कल्चरल शॉक' वाले बयान की कड़ी आलोचना की है।
  • राहुल ने सवाल उठाया कि जब लड़के अपशब्द बोलते हैं तो समाज को कोई दिक्कत नहीं होती, लेकिन लड़कियों के बोलने पर आपत्ति क्यों?
  • उन्होंने प्रधानमंत्री की टिप्पणी को 'मनुस्मृति' वाली पुरानी और पितृसत्तात्मक सोच से जोड़ा।
  • राहुल ने देश की महिलाओं और युवाओं से इस संकीर्ण मानसिकता के खिलाफ आवाज उठाने का आह्वान किया।
rahul gandhi attacks pm modi over cultural shock comment on women

पीएम मोदी के बयान पर राहुल गांधी का तीखा हमला

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक हालिया बयान को लेकर उन पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश में महिलाओं को लेकर एक खास वर्ग की सोच आज भी बेहद संकीर्ण और पितृसत्तात्मक बनी हुई है।

उन्होंने यह बातें 'छात्रों की गूंज' नामक एक कार्यक्रम में छात्रों के साथ संवाद के दौरान कहीं। इस दौरान उन्होंने जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन का मुद्दा प्रमुखता से उठाया।

'लड़कों को छूट और लड़कियों पर पाबंदी क्यों?'

राहुल गांधी ने कहा कि जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में लड़के और लड़कियां दोनों ही शामिल थे, लेकिन प्रधानमंत्री का ध्यान केवल लड़कियों द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्दों पर ही गया।

कार्यक्रम के दौरान, राहुल गांधी ने पीएम मोदी का एक वीडियो क्लिप भी चलाया। इस वीडियो में प्रधानमंत्री ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी लड़कियों द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा को 'सांस्कृतिक झटका' (कल्चरल शॉक) करार दिया था।

इस पर कटाक्ष करते हुए राहुल गांधी ने कहा, "अगर लड़के अपशब्दों का इस्तेमाल करते हैं, तो समाज में किसी को कोई समस्या नहीं होती, उसे एक सामान्य बात मान लिया जाता है।"

उन्होंने आगे कहा, "लेकिन जब हमारी बेटियां वही बात कहती हैं, तो इसे 'कल्चरल शॉक' बता दिया जाता है। यह किस तरह की दोहरी मानसिकता है?"

राहुल ने सवाल किया कि एक तरफ लड़कों को हर तरह की आजादी दी जाती है, जबकि दूसरी ओर लड़कियों को एक पिंजरे में कैद रखने की कोशिश की जाती है।

पुरानी और पितृसत्तात्मक सोच पर बोला हमला

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी की इस टिप्पणी की तुलना 'मनुस्मृति' की सोच से की। उन्होंने कहा कि यह वही पुरानी मानसिकता है जो महिलाओं को हमेशा किसी न किसी के नियंत्रण में ही देखना चाहती है।

उन्होंने कहा, "मनुस्मृति में लिखा है कि एक महिला को पहले अपने पिता, फिर अपने पति और अंत में अपने बेटे के नियंत्रण में रहना चाहिए।"

राहुल ने इस सोच को खारिज करते हुए कहा कि आज के आधुनिक भारत में लड़कियों का अपना एक स्वतंत्र अस्तित्व है।

उन्होंने जोर देकर कहा, "किसी की बेटी, पत्नी या मां होना ही एक महिला की एकमात्र पहचान नहीं हो सकती। लड़कियों की अपनी एक अलग पहचान है और उनका जीवन पूरी तरह से उनके अपने फैसलों पर निर्भर होना चाहिए।"

देश की महिलाओं और बेटियों से किया आह्वान

नेता प्रतिपक्ष ने देश के युवाओं, विशेषकर महिलाओं से इस पितृसत्तात्मक और संकीर्ण सोच को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए आगे आने की अपील की।

उन्होंने कहा, "देश की बेटियां भारत की सबसे बड़ी अमानत हैं और उन्हें किसी भी तरह के दबाव में रहने या किसी की सोच के अनुसार चलने की कोई जरूरत नहीं है।"

*Edit with Google AI Studio

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