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राजस्थान

पशुपालकों के लिए बड़ी खबर: राजस्थान: पशु बीमा और नई योजनाओं पर मंत्री के कड़े निर्देश

पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने बीमा और सेक्स सॉर्टेड सीमन योजना की समीक्षा कर लक्ष्य तय किए।

HIGHLIGHTS

  • मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना के तहत जून माह तक 42 लाख बीमा पॉलिसी का लक्ष्य रखा गया है।
  • अब तक 15,741 दावों का निस्तारण कर पशुपालकों को 30.73 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।
  • अगस्त तक 5 लाख पशुओं का सेक्स सॉर्टेड सीमन के माध्यम से कृत्रिम गर्भाधान पूरा करने का निर्देश।
  • पशुपालन विभाग के अधिकारी अब प्रतिदिन पांच गांवों की भौतिक मॉनिटरिंग कर रिपोर्ट निदेशालय भेजेंगे।
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जयपुर | राजस्थान में पशुपालन क्षेत्र को आधुनिक और सुरक्षित बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं। शासन सचिवालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना और सेक्स सॉर्टेड सीमन योजना की प्रगति की बारीकी से जांच की। उन्होंने अधिकारियों को काम में गति लाने के सख्त निर्देश दिए हैं।

मंत्री कुमावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में सरकार पशुधन संवर्द्धन के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। विकास की यह धारा रुकनी नहीं चाहिए।

मंगला पशु बीमा योजना: लक्ष्य और प्रगति

बैठक के दौरान अधिकारियों ने बताया कि मार्च महीने तक प्रदेश में 35 लाख से अधिक पशुओं का पंजीकरण सफलतापूर्वक किया जा चुका है। यह योजना पशुपालकों के लिए सुरक्षा कवच साबित हो रही है।

अब तक 20 लाख 24 हजार से अधिक पशुओं की बीमा पॉलिसी जारी की जा चुकी है। मंत्री ने निर्देश दिए कि जून माह तक 42 लाख बीमा पॉलिसी का लक्ष्य हर हाल में पूरा हो।

बीमा दावों के निस्तारण में तेजी लाने के लिए मंत्री ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने बीमा कंपनियों को सर्वेयर की संख्या बढ़ाने और पेंडेंसी खत्म करने के निर्देश दिए हैं ताकि किसानों को राहत मिले।

दावों का भुगतान और पोर्टल अपडेट

योजना के तहत अब तक 15 हजार 741 दावों का निस्तारण किया जा चुका है। इसके माध्यम से पशुपालकों के बैंक खातों में 30 करोड़ 73 लाख 3 हजार रुपये भेजे गए हैं।

मंत्री ने निर्देश दिए कि जिन बीमा पॉलिसियों का एक वर्ष पूरा हो चुका है, उनके नवीनीकरण के लिए पोर्टल पर विशेष व्यवस्था की जाए। इससे पशुपालकों को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।

साथ ही, योजना से जुड़े पशु चिकित्सकों और सर्वेयर के मानदेय का भुगतान भी शीघ्र करने पर बल दिया गया। समय पर भुगतान होने से फील्ड स्टाफ का उत्साह बना रहता है।

सेक्स सॉर्टेड सीमन: पशुपालन में नई क्रांति

सेक्स सॉर्टेड सीमन योजना राजस्थान के डेयरी क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होने वाली है। यह बजट घोषणा का प्रमुख हिस्सा है, जिसकी समयबद्धता पर मंत्री ने विशेष ध्यान दिया है।

अधिकारियों ने बताया कि अब तक 2 लाख पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान इस आधुनिक तकनीक से किया जा चुका है। अप्रैल माह तक जिलों को 5 लाख डोजेज भेजी जा चुकी हैं।

मंत्री कुमावत ने निर्देश दिए कि अगस्त माह तक 5 लाख कृत्रिम गर्भाधान का लक्ष्य पूरा किया जाए। इस तकनीक से पशुपालकों को केवल बछड़ियां प्राप्त होंगी, जिससे दूध उत्पादन बढ़ेगा।

निगरानी और जवाबदेही तय

योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अब अधिकारियों की जवाबदेही तय की गई है। रेंज, जिला और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों को अब फील्ड में उतरकर काम देखना होगा।

मंत्री ने निर्देश दिए कि हर अधिकारी प्रतिदिन कम से कम पांच गांवों की भौतिक मॉनिटरिंग करेगा। इसकी विस्तृत रिपोर्ट निदेशालय स्तर पर प्रतिदिन भेजी जानी अनिवार्य कर दी गई है।

बीमारियों से बचाव और टीकाकरण अभियान

पशुओं में फैलने वाली मौसमी बीमारियों को लेकर भी बैठक में विस्तृत चर्चा हुई। एफएमडी (खुरपका-मुंहपका) और लंपी जैसी बीमारियों के टीकाकरण पर विशेष फोकस करने को कहा गया है।

एफएमडी और अन्य टीकाकरण कार्यक्रमों में फर्जीवाड़ा बिल्कुल बरदाश्त नहीं होगी। सभी अधिकारी पूरी पारदर्शिता के साथ काम करें।

प्रमुख शासन सचिव विकास सीतारामजी भाले ने कहा कि 2030 तक एफएमडी के उन्मूलन का लक्ष्य है। इसके लिए सभी पशु चिकित्सा संस्थानों में अनिवार्य रूप से टीकाकरण कैलेंडर लगाया जाएगा।

दवाइयों और सप्लीमेंट की उपलब्धता

निदेशक डॉ सुरेश मीना ने बताया कि कर्रा रोग की सूचना कहीं से नहीं मिली है। एहतियात के तौर पर मिनरल मिक्सचर और अन्य जरूरी सप्लीमेंट का वितरण पहले ही किया जा चुका है।

मंत्री ने आगाह किया कि दवाइयां गोदामों में बेकार नहीं पड़ी रहनी चाहिए। उन्होंने नियमित जांच के निर्देश दिए ताकि पशुओं को समय पर उपचार और पोषण मिल सके।

योजनाओं में उत्कृष्ट कार्य करने वाले चिकित्सकों और कर्मियों को सम्मानित भी किया जाएगा। इससे विभाग में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और बेहतर कार्य संस्कृति विकसित होने की उम्मीद है।

राजस्थान सरकार के ये प्रयास न केवल पशुधन की रक्षा करेंगे, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेंगे। बीमा और तकनीक का यह संगम पशुपालकों के लिए खुशहाली लाएगा।

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