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राजस्थान विधानसभा में 208 विधायक!: राजस्थान विधानसभा का अनोखा सिस्टम: सीटें 200 लेकिन उपस्थिति 208 विधायकों की, जानें क्या है पूरा मामला

मानवेन्द्र जैतावत

राजस्थान विधानसभा में उस समय अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई जब 200 सीटों वाली विधानसभा में 208 विधायकों की उपस्थिति दर्ज होने का मामला सामने आया। डिजिटल सूची में पुराने विधायकों के नाम न हटने के कारण यह तकनीकी खामी उजागर हुई है।

HIGHLIGHTS

  • राजस्थान विधानसभा में 200 सीटों के बावजूद 208 विधायकों की उपस्थिति दर्ज की गई।
  • डिजिटल सूची में पूर्व विधायकों और सांसदों के नाम नहीं हटाए जाने से यह भारी चूक हुई।
  • मीडिया द्वारा मामला उठाए जाने के बाद विधानसभा सचिव ने डिजिटल रिकॉर्ड में सुधार करवाया।
  • विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने 16 नई समितियों का गठन किया है, जिसमें दिग्गजों को जगह मिली है।
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जयपुर | राजस्थान की राजनीति में अक्सर नए रिकॉर्ड बनते हैं, लेकिन इस बार विधानसभा की कार्यप्रणाली को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। प्रदेश की विधानसभा में कुल विधायकों की संख्या 200 तय है, लेकिन पिछले सत्र के दौरान उपस्थिति का आंकड़ा 208 तक पहुंच गया। यह सुनने में भले ही अविश्वसनीय लगे, लेकिन यह हकीकत है।

डिजिटल सिस्टम की बड़ी चूक

राजस्थान विधानसभा के डिजिटल रिकॉर्ड में यह बड़ी खामी देखने को मिली है। वर्तमान विधानसभा के पिछले सत्र में विधायकों की जो उपस्थिति जांची गई, वह 208 सदस्यों की थी। दरअसल, साल 2023 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद कई राजनीतिक बदलाव हुए। कुछ विधायकों ने लोकसभा चुनाव जीतकर संसद का रुख किया, तो कुछ का दुखद निधन हो गया। नियमों के मुताबिक, इन सीटों पर उपचुनाव हुए और नए सदस्य चुनकर आए। लेकिन विधानसभा की डिजिटल सूची में पुराने विधायकों के नाम अपडेट नहीं किए गए थे।

इन पूर्व विधायकों के नाम थे शामिल

हैरानी की बात यह है कि पिछले माह समाप्त हुए सत्र में भी इन पूर्व विधायकों के नामों के आगे 'हस्ताक्षर नहीं' जैसे कॉलम खाली रखे गए थे। इस सूची में कंवर लाल मीणा (निलंबित), सांसद बन चुके हरीश मीना (टोंक-सवाई माधोपुर) और बृजेन्द्र सिंह ओला (झुंझुनूं) के नाम शामिल थे। इसके अलावा महेंद्रजीत सिंह मालवीया, मुरारी लाल मीणा और हनुमान बेनीवाल जैसे नेताओं के नाम भी विधायक सूची से नहीं हटाए गए थे। दिवंगत विधायक जुबेर खान और अमृत लाल मीणा के नाम भी डिजिटल रिकॉर्ड में बने रहने के कारण कुल संख्या 208 तक पहुंच गई थी।

मीडिया के हस्तक्षेप के बाद सुधार

जब इस विसंगति के बारे में विधानसभा सचिव भारत भूषण शर्मा से संपर्क किया गया, तो उन्होंने इसे एक प्रक्रियात्मक हिस्सा बताया। सचिव ने स्पष्ट किया कि पुराने सदस्यों की उपस्थिति नहीं ली जाती है और नाम समय-समय पर हटा दिए जाते हैं। हालांकि, मीडिया की पूछताछ के तुरंत बाद वेबसाइट को अपडेट किया गया। अब उन पूर्व विधायकों के नाम डिजिटल पोर्टल से हटा दिए गए हैं, जो अब सदन के सदस्य नहीं हैं। इस घटना ने सरकारी डिजिटल सिस्टम की सुस्ती पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

16 नई समितियों का हुआ गठन

इस विवाद के बीच राजस्थान विधानसभा में 16 विभिन्न समितियों के गठन की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने इसकी आधिकारिक घोषणा की। इन 16 समितियों में से 11 की कमान सत्ताधारी भाजपा के पास है, जबकि 3 समितियों में कांग्रेस विधायकों को सभापति नियुक्त किया गया है। विशेष बात यह है कि नियम समिति में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, वसुंधरा राजे और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट को एक साथ सदस्य बनाया गया है।

मुख्यमंत्री पहली बार समिति के सदस्य

सामान्य प्रयोजन समिति के सभापति स्वयं विधानसभा अध्यक्ष होंगे। इसमें मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पहली बार सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। पिछली बार वे इस समिति का हिस्सा नहीं थे। इस महत्वपूर्ण समिति में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली सहित कुल 16 वरिष्ठ सदस्य शामिल हैं। महिला सशक्तिकरण की दिशा में कदम बढ़ाते हुए भाजपा विधायक कल्पना देवी को महिलाओं एवं बालकों के कल्याण संबंधी समिति की अध्यक्ष बनाया गया है। याचिका एवं सदाचार समिति की जिम्मेदारी एक बार फिर विधायक कैलाश वर्मा को सौंपी गई है। इन सभी समितियों का कार्यकाल अगले वर्ष मार्च तक प्रभावी रहेगा।

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