भीलवाड़ा | राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में एक भाई ने अपनी बहन के प्रति प्रेम और परंपरा के प्रति सम्मान की अनूठी मिसाल पेश की है. पंडेर गांव के किसान मुकेश जाट ने 11 ऊंट गाड़ियों और 51 ट्रैक्टरों के साथ 7 किलोमीटर की भव्य भात यात्रा निकाली.
11 ऊंट गाड़ियों से भरा अनूठा मायरा: राजस्थान: 11 ऊंट गाड़ियों और 51 ट्रैक्टरों से भरा 11 लाख का भात
भीलवाड़ा में किसान ने पुरानी परंपरा को जीवित रखते हुए 11 लाख रुपये का भात भरा.
HIGHLIGHTS
- भीलवाड़ा के मुकेश जाट ने 11 ऊंट गाड़ियों और 51 ट्रैक्टरों के साथ अनूठी भात यात्रा निकाली.
- किसान भाई ने अपनी बहन के घर पहुंचकर 11 लाख रुपये का मायरा भरकर परंपरा निभाई.
- पंडेर गांव से टिठोडी गांव तक 7 किलोमीटर के सफर में ग्रामीणों ने पुष्प वर्षा की.
- पिता के निधन के बाद मुकेश ने बहन को पिता की कमी महसूस न होने देने का संकल्प पूरा किया.
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परंपरा और आधुनिकता का संगम
इस आधुनिक दौर में जहां लोग अक्सर लग्जरी कारों का इस्तेमाल करते हैं, वहीं मुकेश ने अपनी पुरानी जड़ों की ओर लौटने के लिए ऊंट गाड़ियों का चयन किया.
भीलवाड़ा के पंडेर गांव से टिठोडी गांव तक निकली इस भव्य शोभायात्रा का रास्ते भर ग्रामीणों ने पुष्प वर्षा कर जोरदार स्वागत किया.
मुकेश ने अपनी बहन के घर पहुंचकर 11 लाख रुपये का मायरा (भात) भरकर सबको हैरान कर दिया और पुरानी रीतियों को फिर से जीवित कर दिया.
पिता के सपनों को किया पूरा
मुकेश जाट ने भावुक होते हुए बताया कि उनके पिता के निधन के बाद घर की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी.
वह हमेशा से चाहते थे कि उनकी बहन को कभी भी पिता की कमी महसूस न हो और वह अपने पिता के हर सपने को पूरा कर सकें.
मुकेश की पत्नी माया, जो स्वयं पंचायत प्रशासक हैं, उन्होंने भी इस पारंपरिक और गौरवशाली पहल में अपने पति का पूरा सहयोग दिया. हमारी पुरानी परंपराएं ही हमारी असली पहचान हैं, इसलिए मैंने उसी गौरवशाली संस्कृति को जीवित रखने का एक छोटा सा प्रयास किया है.
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सोशल मीडिया पर वायरल हुई यात्रा
करीब 7 किलोमीटर के इस लंबे सफर के दौरान पूरा परिवार और ग्रामीण नाचते-गाते हुए बहन के घर पहुंचे.
इस अनूठी भात यात्रा के वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं और लोग भाई के इस कदम की जमकर सराहना कर रहे हैं.
यह आयोजन न केवल एक रस्म थी, बल्कि राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और भाई-बहन के अटूट प्रेम को प्रदर्शित करने का एक सशक्त माध्यम बनी.
मुकेश जाट की इस पहल ने समाज को संदेश दिया है कि आधुनिकता की दौड़ के बीच हमें अपनी जड़ों और गौरवशाली परंपराओं को कभी नहीं भूलना चाहिए.
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