मोदरा | राजस्थान के जालोर जिले के निकटवर्ती धानसा गांव से एक ऐसी खबर आई है, जो शिक्षा व्यवस्था पर सवाल भी उठाती है और मेहनत करने वालों को प्रेरित भी करती है। यहां के महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय की छात्राओं ने साबित कर दिया है कि अगर हौसले बुलंद हों, तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती। सीमित संसाधनों में भी इन बेटियों ने इतिहास रच दिया है।
अभावों में बेटियों का कमाल: 24 में से सिर्फ 6 टीचर, फिर भी बेटियों ने गाड़ा झंडा: संयमी कुमारी ने 98.20% अंक लाकर रचा इतिहास
धानसा गांव के महात्मा गांधी स्कूल में शिक्षकों की भारी कमी के बावजूद छात्राओं ने बोर्ड परीक्षा में शानदार प्रदर्शन किया है। संयमी कुमारी ने 98.20% अंक हासिल कर अपनी मेहनत का लोहा मनवाया है।
HIGHLIGHTS
- धानसा के महात्मा गांधी स्कूल में 24 में से केवल 6 शिक्षक कार्यरत हैं।
- छात्रा संयमी कुमारी ने 98.20% अंक प्राप्त कर क्षेत्र का नाम रोशन किया।
- उर्मिला कंवर ने 97.60% और ओसिया कुमारी ने 96% अंक हासिल किए।
- सीमित संसाधनों और स्टाफ की कमी के बावजूद बेटियों ने रचा इतिहास।
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अभावों के बीच ऐतिहासिक सफलता
इस स्कूल में संसाधनों की भारी कमी है। स्वीकृत 24 पदों के मुकाबले यहां केवल 6 शिक्षक ही कार्यरत हैं। यानी स्कूल सिर्फ 25 प्रतिशत स्टाफ के भरोसे चल रहा है। इसके बावजूद, छात्राओं ने जो परीक्षा परिणाम दिया है, वह किसी चमत्कार से कम नहीं है। बेटियों की इस सफलता ने पूरे गांव को जश्न मनाने का मौका दे दिया है और हर कोई हैरान है।
संयमी कुमारी ने किया टॉप
विद्यालय की प्रतिभाशाली छात्रा संयमी कुमारी, जो भीखा राम सुंदेशा की पुत्री हैं, उन्होंने 98.20 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। उनकी इस उपलब्धि ने पूरे क्षेत्र का मान बढ़ाया है। संयमी की सफलता उनकी दिन-रात की मेहनत और लगन का नतीजा है। उनकी इस कामयाबी से परिवार में खुशी की लहर है और गांव के लोग उन्हें बधाई देने पहुंच रहे हैं।
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अन्य छात्राओं का भी शानदार प्रदर्शन
सिर्फ संयमी ही नहीं, बल्कि स्कूल की अन्य छात्राओं ने भी बेहतरीन प्रदर्शन किया है। उर्मिला कंवर ने 97.60 प्रतिशत और ओसिया कुमारी ने 96.00 प्रतिशत अंक प्राप्त कर गौरव बढ़ाया। इन बेटियों ने दिखा दिया कि ग्रामीण परिवेश की प्रतिभा किसी भी शहरी स्कूल से कम नहीं है। संसाधनों की कमी के बाद भी इन छात्राओं ने अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं भटकने दिया।
शिक्षकों का समर्पण और मार्गदर्शन
स्कूल स्टाफ ने बताया कि शिक्षकों की भारी कमी के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। शिक्षक गणपत सिंह राठौड़ और व्याख्याता राजकुमार ने बताया कि स्टाफ ने समर्पण के साथ मार्गदर्शन किया। नियमित अध्ययन, अनुशासन और कठिन परिश्रम ही इस सफलता की कुंजी रहे। पहाड़सिंह जैतावत ने कहा कि इन छात्राओं ने अभाव में भी प्रभाव दिखाकर एक नई मिसाल कायम की है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर स्कूल में पूरे शिक्षक होते, तो परिणाम और भी बेहतर हो सकते थे। फिलहाल, इन बेटियों की मेहनत की चर्चा पूरे राजस्थान में हो रही है।
जावेद खान की रिपोर्ट
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