जयपुर | राजस्थान की गुलाबी नगरी जयपुर में पर्यटन के सबसे बड़े मंच 'द ग्रेट इंडियन ट्रैवल बाजार' (जीआईटीबी) के 15वें संस्करण का भव्य आगाज हो चुका है।
इस आयोजन के माध्यम से प्रदेश सरकार राजस्थान को एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी ने होटल जय महल पैलेस में आयोजित उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए राज्य की नई पर्यटन दृष्टि को साझा किया।
उन्होंने कहा कि जीआईटीबी केवल एक साधारण आयोजन नहीं है, बल्कि यह वैश्विक साझेदारियों और निवेश को बढ़ावा देने का एक सशक्त माध्यम है।
राजस्थान अब दुनिया के सामने अपनी सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ एक नए अवतार में प्रस्तुत होने के लिए तैयार है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत 2047' के विजन को ध्यान में रखते हुए पर्यटन को विकास का मुख्य आधार बनाया गया है।
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उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी ने GITB के 15वें संस्करण का उद्घाटन किया, पर्यटन से बढ़ेगा रोजगार।
HIGHLIGHTS
- जीआईटीबी के 15वें संस्करण का जयपुर के होटल जय महल पैलेस में भव्य उद्घाटन हुआ।
- उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी ने पर्यटन को राजस्थान का 'ग्रोथ इंजन' और रोजगार का आधार बताया।
- अगले दो दिनों में 50 देशों के विदेशी ऑपरेटरों के साथ 10,000 से अधिक बीटूबी बैठकें होंगी।
- भारत का लक्ष्य अगले 10 वर्षों में पर्यटन का जीडीपी योगदान 5.2% से बढ़ाकर 10% करना है।
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पर्यटन बनेगा राजस्थान का ग्रोथ इंजन
राजस्थान सरकार मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के कुशल नेतृत्व में पर्यटन क्षेत्र को राज्य की अर्थव्यवस्था का मुख्य 'ग्रोथ इंजन' मान रही है।
उप मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पर्यटन से न केवल राजस्व मिलता है, बल्कि यह लाखों लोगों की आजीविका का सबसे बड़ा सहारा भी है।
राज्य में पारदर्शी प्रशासन और निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए कई महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव किए जा रहे हैं जो भविष्य बदलेंगे।
उदयपुर की शांत झीलें और थार का विशाल रेगिस्तान आज भी दुनिया भर के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करने की क्षमता रखते हैं।
जयपुर और चित्तौड़गढ़ के ऐतिहासिक किले हमारी वीरता की कहानियों को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करने का एक बेहतरीन माध्यम बने हुए हैं।
यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स और 660 से अधिक प्राचीन हवेलियों का संरक्षण सरकार की प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर रखा गया है।
अनुभव-आधारित पर्यटन पर विशेष ध्यान
राजस्थान अब केवल किलों और महलों तक सीमित नहीं है, बल्कि अनुभव-आधारित पर्यटन (Experience-based Tourism) की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है।
राज्य में वाइल्डलाइफ डेस्टिनेशन्स, आध्यात्मिक पर्यटन और ग्रामीण परिवेश को पर्यटकों के लिए एक नए अनुभव के रूप में विकसित किया जा रहा है।
हवाई और रेल कनेक्टिविटी में सुधार के कारण अब राजस्थान के दूर-दराज के पर्यटन स्थल भी वैश्विक मानचित्र पर अपनी जगह बना रहे हैं।
MICE (Meetings, Incentives, Conferences, and Exhibitions) और फिल्म पर्यटन के विस्तार से राज्य को साल भर सक्रिय गंतव्य बनाया जाएगा।
विदेशी पर्यटकों के साथ-साथ घरेलू पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए नए टूरिस्ट सर्किट और विशेष पैकेज तैयार किए जा रहे हैं।
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"मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के नेतृत्व में हम पर्यटन को एक ऐसी शक्ति बना रहे हैं जो समावेशी आर्थिक विकास को नई गति प्रदान करेगी।"
निवेश अनुकूल नीतियों से बढ़ेगा आकर्षण
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने इस अवसर पर कहा कि राजस्थान अपनी निवेश-अनुकूल नीतियों के कारण आज निवेशकों की पहली पसंद बनता जा रहा है।
सरल प्रक्रियाओं और समयबद्ध निर्णय व्यवस्था ने पर्यटन क्षेत्र में निवेश करने वाले उद्यमियों के लिए एक सकारात्मक वातावरण तैयार किया है।
हेरिटेज टूरिज्म और डेजर्ट सर्किट्स के अलावा वेलनेस और इको-टूरिज्म में भी निवेश के व्यापक अवसर अब खुले तौर पर उपलब्ध हैं।
पीपीपी (Public-Private Partnership) आधारित पहलों ने पर्यटन प्रबंधन को और अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाने में मदद की है।
डिजिटल सिस्टम्स के माध्यम से अब पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं और सुरक्षा प्रदान की जा रही है, जिससे उनका अनुभव सुखद बनता है।
सरकार का उद्देश्य केवल संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाकर क्षेत्रीय विकास का मजबूत आधार तैयार करना है।
भारत का पर्यटन लक्ष्य और वैश्विक परिदृश्य
पर्यटन मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव सुमन बिल्ला ने भारत के वैश्विक पर्यटन लक्ष्यों पर प्रकाश डालते हुए भविष्य की एक उज्ज्वल तस्वीर पेश की।
उन्होंने बताया कि भारत का लक्ष्य अगले एक दशक में पर्यटन के जीडीपी योगदान को 5.2% से बढ़ाकर सीधे 10% तक ले जाना है।
वर्ष 2014 के बाद से देश में हवाई अड्डों की संख्या 75 से बढ़कर 150 हो गई है, जो कनेक्टिविटी की क्रांति को दर्शाता है।
घरेलू पर्यटकों के आगमन की संख्या 1.5 बिलियन से बढ़कर 4 बिलियन तक पहुंचना भारतीय पर्यटन की बढ़ती ताकत का प्रमाण है।
विदेशी पर्यटकों की संख्या में भी दोगुनी वृद्धि दर्ज की गई है, जो 10 मिलियन से बढ़कर अब 20 मिलियन के पार पहुंच चुकी है।
होटल क्षमता को दोगुना करने और उच्च मूल्य वाले अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए बुनियादी ढांचे में भारी निवेश किया जा रहा है।
स्थानीय सहभागिता और आजीविका का संरक्षण
शासन सचिव शुचि त्यागी ने कहा कि राजस्थान सरकार पर्यटन को एक ऐसे मॉडल के रूप में देख रही है जहां संरक्षण और आजीविका साथ चलें।
जीआईटीबी के मंच से स्थानीय गाइड्स, कार रेंटल ऑपरेटर्स और स्वयं सहायता समूहों को सीधे वैश्विक बाजार से जोड़ने का प्रयास किया गया है।
नीति और बाजार के बीच की दूरी को समाप्त करने के लिए पर्यटन नीतियों को सीधे हितधारकों तक प्रभावी रूप से पहुंचाया जा रहा है।
इको-टूरिज्म पहलों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन के बीच एक सुंदर संतुलन स्थापित करने की योजना पर काम हो रहा है।
स्थानीय हस्तशिल्प और कला को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन स्थलों पर विशेष हाट और प्रदर्शनियों का आयोजन नियमित रूप से किया जाएगा।
इस तरह की पहल से न केवल पर्यटन बढ़ेगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे जो पलायन को रोकेंगे।
साझेदारी की शक्ति और जीआईटीबी की सफलता
फिक्की की मेंटर डॉ. ज्योत्सना सूरी ने पिछले 15 वर्षों में जीआईटीबी की सफलता और इसकी विकास यात्रा के बारे में विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने कहा कि यह आयोजन पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप की शक्ति का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसने भारतीय पर्यटन को नई दिशा दी है।
राजस्थान सरकार और फिक्की के बीच का यह मजबूत समन्वय अंतरराष्ट्रीय खरीदारों और भारतीय विक्रेताओं के लिए एक सेतु का काम करता है।
आज जीआईटीबी एक वैश्विक इनबाउंड टूरिज्म मार्केटप्लेस बन चुका है, जो भारत की विविधता को पूरी दुनिया के सामने मजबूती से रखता है।
आगामी वर्षों में भी यह मंच नई साझेदारियां बनाने और पर्यटन उद्योग के लिए नए अवसर सृजित करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।
हॉस्पिटैलिटी और ट्रैवल ट्रेड के हितधारकों की निरंतर भागीदारी ही इस आयोजन को हर साल पहले से अधिक सफल और प्रभावी बनाती है।
50 देशों की भागीदारी और 10,000 बैठकें
फिक्की के सेक्रेटरी जनरल अनंत स्वरूप ने जानकारी दी कि इस वर्ष 50 से अधिक देशों के 185 विदेशी टूर ऑपरेटर्स भाग ले रहे हैं।
अगले दो दिनों में जयपुर एग्जीबिशन एंड कन्वेंशन सेंटर (जेईसीसी) में 10,000 से अधिक प्री-शेड्यूल्ड बीटूबी बैठकें आयोजित की जाएंगी।
विभिन्न राज्यों के पर्यटन बोर्ड्स, होटल्स और रिसॉर्ट्स अपनी सेवाओं का प्रदर्शन करने के लिए इस विशाल प्रदर्शनी का हिस्सा बने हैं।
यह मंच 2008 में अपनी स्थापना के बाद से भारत के प्रमुख इनबाउंड टूरिज्म प्लेटफॉर्म के रूप में अपनी धाक जमा चुका है।
प्रदर्शनी का औपचारिक उद्घाटन 27 अप्रैल को सीतापुरा स्थित जेईसीसी में उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी द्वारा किया जाएगा।
इस आयोजन को राटो, आईएचएचए और एचआरएआर जैसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और क्षेत्रीय संगठनों का भी पूर्ण समर्थन प्राप्त है।
सांस्कृतिक संध्या: 'एकम – एकता की भावना'
उद्घाटन समारोह में 'एकम – द स्पिरिट ऑफ वननैस' थीम पर आयोजित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उपस्थित मेहमानों का दिल जीत लिया।
इन प्रस्तुतियों ने दिखाया कि कैसे भारत की विभिन्न कला शैलियां और संस्कृतियां अंततः एक ही सूत्र में पिरोई हुई हैं।
कथक, मणिपुरी, घूमर, चारी और छऊ जैसे नृत्यों के संगम ने भारत की समृद्ध शास्त्रीय और लोक परंपराओं का सजीव चित्रण किया।
भगवान कृष्ण को शाश्वत सारथी के रूप में दर्शाने वाली प्रस्तुति ने दर्शकों को एक आध्यात्मिक और भावनात्मक अनुभव प्रदान किया।
नाथद्वारा की भक्ति और राजस्थान की शाही भव्यता का यह अनूठा मेल अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा।
इस सांस्कृतिक संध्या ने जीआईटीबी के उद्घाटन सत्र को एक यादगार और गरिमामयी स्वरूप प्रदान किया जो लंबे समय तक याद रहेगा।
निष्कर्ष: भविष्य की ओर बढ़ता राजस्थान
जीआईटीबी का यह 15वां संस्करण राजस्थान के पर्यटन इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होने वाला है जो नए द्वार खोलेगा।
निवेश, नवाचार और सांस्कृतिक गौरव के साथ राजस्थान अब दुनिया के सबसे पसंदीदा पर्यटन स्थलों की सूची में शीर्ष पर पहुंचने को तैयार है।
यह आयोजन न केवल व्यापारिक सौदे करेगा, बल्कि राजस्थान की अतिथि देवो भवः की परंपरा को भी वैश्विक स्तर पर मजबूती देगा।
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