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राजस्थान

स्कूलों में पासबुक पर बैन खत्म: राजस्थान के सरकारी स्कूलों में 9 साल बाद फिर से लौटेंगी पासबुक: शिक्षा विभाग ने हटाया प्रतिबंध, हाईकोर्ट के आदेश पर लिया फैसला

जोगेन्द्र सिंह शेखावत

राजस्थान के सरकारी स्कूलों में अब शिक्षक और छात्र फिर से पासबुक का उपयोग कर सकेंगे। शिक्षा विभाग ने पिछले 9 वर्षों से जारी प्रतिबंध को वापस ले लिया है, जिससे अब छात्रों को अतिरिक्त शैक्षिक सामग्री मिल सकेगी।

HIGHLIGHTS

  • राजस्थान के सरकारी स्कूलों में पासबुक के उपयोग पर लगी 9 साल पुरानी रोक हटा दी गई है।
  • शिक्षा विभाग ने हाईकोर्ट के आदेश के बाद अपने प्रतिबंधात्मक आदेशों को वापस ले लिया है।
  • 2018 और 2023 में जारी किए गए प्रतिबंध के आदेश अब आधिकारिक रूप से निरस्त हो गए हैं।
  • अब छात्रों और शिक्षकों के पास पासबुक पाए जाने पर उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
rajasthan government schools passbook ban lifted education department

बीकानेर | राजस्थान के सरकारी स्कूलों में अब एक बड़ा शैक्षिक बदलाव देखने को मिलेगा। पिछले 9 सालों से स्कूलों में जिस पासबुक के इस्तेमाल पर पाबंदी थी, उसे अब पूरी तरह हटा दिया गया है। शिक्षा विभाग ने अपने पुराने आदेशों को वापस ले लिया है।

अब सरकारी स्कूलों के शिक्षक और विद्यार्थी पढ़ाई के लिए पासबुक का सहारा ले सकेंगे। माध्यमिक शिक्षा विभाग के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) डॉ. रामगोपाल शर्मा ने इस संबंध में सोमवार को आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं।

9 साल पुराना प्रतिबंध हटा

शिक्षा विभाग ने करीब 9 साल पहले सरकारी स्कूलों में पासबुक के उपयोग पर पूरी तरह रोक लगा दी थी। यह फैसला 13 मार्च 2018 को राजस्थान माध्यमिक शिक्षा परिषद और शिक्षा निदेशक ने मिलकर लिया था।

उस समय विभाग का मानना था कि पासबुक के इस्तेमाल से छात्र मूल किताबों से दूर हो जाते हैं। इससे छात्रों में रटने की प्रवृत्ति बढ़ती है और उनकी मौलिक सोच विकसित नहीं हो पाती है। इसी तर्क के साथ प्रतिबंध लगाया गया था।

सख्ती का था प्रावधान

2018 के आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया था कि अगर किसी छात्र या शिक्षक के पास स्कूल परिसर में पासबुक मिलती है, तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इससे शिक्षकों में काफी भय का माहौल रहता था।

बाद में 6 नवंबर 2023 को माध्यमिक शिक्षा निदेशक कानाराम ने इसी प्रतिबंध को फिर से दोहराया था। इसके बाद प्राइवेट पब्लिशर्स ने इस फैसले को चुनौती देने का मन बनाया और कानूनी लड़ाई शुरू हुई।

कोर्ट का हस्तक्षेप और सरकार का निर्णय

इस प्रतिबंध के खिलाफ निजी पब्लिशर ‘संजीव पासबुक’ ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने दलील दी थी कि पासबुक केवल एक सहायक सामग्री है और इस पर रोक लगाना छात्रों के हितों के खिलाफ है।

मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की जयपुर बेंच ने शिक्षा विभाग के इस आदेश पर रोक लगा दी थी। इसके बाद विभाग के पास आगे अपील करने का मौका था, लेकिन सरकार ने अब आगे अपील नहीं करने का फैसला किया है।

छात्रों और शिक्षकों को मिलेगी राहत

17 मार्च 2026 को संयुक्त विधि परामर्शी ऋतु शर्मा ने निर्देश दिए कि पासबुक पर लगे प्रतिबंध को वापस लिया जाए। अब स्कूलों में पासबुक का उपयोग फिर से शुरू हो सकेगा। इससे उन छात्रों को मदद मिलेगी जो कठिन विषयों को समझने के लिए गाइड चाहते हैं।

यह फैसला शिक्षकों के लिए भी राहत भरा है, क्योंकि अब उन पर पासबुक रखने के कारण होने वाली किसी भी कार्रवाई का खतरा खत्म हो गया है। सरकारी स्कूलों में अब पढ़ाई का तरीका फिर से सुगम और सरल हो सकेगा।

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