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राजस्थान

विलायती बबूल पर सरकार का बड़ा फैसला: विलायती बबूल का होगा खात्मा, राजस्थान सरकार का बड़ा प्लान

जोगेन्द्र सिंह शेखावत

राजस्थान में पर्यावरण बचाने के लिए विलायती बबूल के उन्मूलन हेतु विशेष अभियान चलेगा।

HIGHLIGHTS

  • राजस्थान सरकार विलायती बबूल के उन्मूलन के लिए चरणबद्ध अभियान चलाएगी।
  • विलायती बबूल की जड़ें 10 मीटर गहरी होती हैं और यह भारी पानी सोखता है।
  • बबूल की लकड़ी से कोयला बनाने के लिए प्रभावी ऑक्शन प्लान तैयार होगा।
  • कोयले के परिवहन हेतु NGT पोर्टल के जरिए टीपी जारी की जाएगी।
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जयपुर | राजस्थान में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में विलायती बबूल (जूलिफ्लोरा) को जड़ से खत्म करने के लिए व्यापक अभियान चलाने का फैसला लिया गया है।

विलायती बबूल से पर्यावरण को खतरा

मंत्री मदन दिलावर ने बैठक में अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह विदेशी प्रजाति स्थानीय वनस्पतियों को पनपने नहीं देती है। इसकी जड़ें 10 मीटर तक गहरी होती हैं और यह जमीन का अत्यधिक पानी सोखती है।

इससे राजस्थान की प्राकृतिक जैव विविधता बुरी तरह प्रभावित हो रही है। सरकार अब चरणबद्ध तरीके से इसके उन्मूलन के लिए कार्ययोजना तैयार कर रही है। ताकि स्थानीय पौधों और चरागाहों को बचाया जा सके और पर्यावरण संतुलन बना रहे।

कोयले के लिए बनेगा ऑक्शन प्लान

बैठक में बबूल की लकड़ी के सदुपयोग पर भी विचार किया गया। मंत्री ने इसकी लकड़ी से कोयला बनाने और उसके प्रभावी ऑक्शन (नीलामी) की योजना बनाने के निर्देश दिए। इससे पर्यावरण सुधार के साथ-साथ राजस्व भी प्राप्त होगा।

वन मंत्री संजय शर्मा ने परिवहन संबंधी समस्याओं पर समाधान बताया। उन्होंने कहा कि कोयले के परिवहन हेतु भारत सरकार के NGT पोर्टल के जरिए टीपी जारी की जाएगी। इससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुगमता सुनिश्चित की जा सकेगी।

"विलायती बबूल अन्य वनस्पतियों को पनपने नहीं देता। इसके उन्मूलन के लिए विभागीय समन्वय के साथ व्यापक अभियान चलाया जाएगा और पर्यावरणीय संतुलन को मजबूती दी जाएगी।"

इस बैठक में राजस्व, ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए। सभी ने अभियान की तकनीकी बारीकियों और क्षेत्रवार रणनीति पर महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए ताकि स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को बचाया जा सके।

यह अभियान राजस्थान के पारिस्थितिक संतुलन को बहाल करने में मील का पत्थर साबित होगा। स्थानीय प्रजातियों के संरक्षण से आने वाली पीढ़ियों को हरा-भरा पर्यावरण मिलेगा। यह राज्य की जैव विविधता के लिए एक बड़ी संजीवनी बनकर उभरेगा।

*Edit with Google AI Studio

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