जयपुर | राजस्थान के बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में एक नया और बेहद चौंकाने वाला मोड़ आ गया है। इस मामले में गिरफ्तार सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल ने सीधे तौर पर तत्कालीन प्रशासनिक व्यवस्था को चुनौती दी है।
सोमवार को जयपुर की अदालत में पेशी के दौरान अग्रवाल ने पूर्व मुख्य सचिव सुधांश पंत का नाम लेकर प्रशासनिक और सियासी गलियारों में सनसनी फैला दी। इस बयान के बाद राज्य की ब्यूरोक्रेसी में आंतरिक खींचतान खुलकर सामने आ गई है।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की रिमांड अवधि समाप्त होने पर सुबोध अग्रवाल को कोर्ट लाया गया था। जैसे ही वे कोर्ट परिसर से बाहर निकले, मीडियाकर्मियों ने उन्हें सवालों से घेर लिया। इसी दौरान उन्होंने सुधांश पंत पर गंभीर आरोप मढ़े।
सुबोध अग्रवाल का बड़ा धमाका: JJM घोटाला: सुबोध अग्रवाल ने सुधांश पंत पर फोड़ा ठीकरा, कहा- '600 करोड़ का मामला उनके समय का'
राजस्थान के जल जीवन मिशन घोटाले में गिरफ्तार सुबोध अग्रवाल ने कोर्ट में बड़ा बयान दिया है। उन्होंने पूर्व मुख्य सचिव सुधांश पंत पर गंभीर आरोप लगाते हुए 33 मामलों के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया है।
HIGHLIGHTS
- सुबोध अग्रवाल ने कोर्ट में पूर्व मुख्य सचिव सुधांश पंत का नाम लेकर खलबली मचाई।
- अग्रवाल का दावा: 37 में से केवल 4 केस उनके कार्यकाल के, 33 केस पंत के समय के।
- 960 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में एसीबी ने अग्रवाल से पूछे 125 सवाल।
- अग्रवाल ने एसीबी की जांच प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
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सुधांश पंत पर लगाए गंभीर आरोप
सुबोध अग्रवाल ने मीडिया के सामने दावा किया कि उन पर लगाए जा रहे आरोप बेबुनियाद हैं। उन्होंने कहा कि वित्त समिति के जिन 37 प्रकरणों की जांच हो रही है, उनमें से अधिकांश उनके कार्यकाल के नहीं हैं।
अग्रवाल ने स्पष्ट रूप से कहा, "मेरे कार्यकाल के केवल 4 मामले हैं। बाकी के 33 प्रकरण सुधांश पंत के समय के हैं।" उन्होंने आरोप लगाया कि इन 33 प्रकरणों में करीब 600 करोड़ रुपये का संदिग्ध लेनदेन जुड़ा हुआ है।
उन्होंने आगे कहा कि जहां वास्तव में पैसा देकर गबन किया गया है, वहां जांच एजेंसियां मौन हैं। उनके अनुसार, एसीबी उन फाइलों की जांच कर रही है जिनमें अभी तक भुगतान भी नहीं किया गया है।
960 करोड़ का कथित घोटाला और जांच
बता दें कि एसीबी ने सुबोध अग्रवाल को 960 करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार किया था। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने एसीबी को अग्रवाल की 3 दिन की रिमांड सौंपी थी, जबकि एजेंसी ने 5 दिन की मांग की थी।
इस रिमांड अवधि के दौरान एसीबी की विशेष टीम ने अग्रवाल के सामने 125 सवालों की एक लंबी सूची रखी। सूत्रों के अनुसार, अग्रवाल ने अधिकांश सवालों के जवाब दिए हैं लेकिन खुद को निर्दोष बताया है।
अग्रवाल का तर्क है कि जैसे ही उन्हें इस घोटाले की जानकारी मिली थी, उन्होंने स्वयं इसकी जांच के आदेश दिए थे। उन्होंने दावा किया कि वे खुद भ्रष्टाचार के खिलाफ कदम उठा रहे थे, लेकिन उन्हें ही फंसा दिया गया।
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ब्यूरोक्रेसी में छिड़ी 'जंग'
सुबोध अग्रवाल द्वारा सुधांश पंत का नाम लिए जाने के बाद यह मामला अब केवल एक घोटाले तक सीमित नहीं रहा है। यह अब राजस्थान के दो सबसे शक्तिशाली आईएएस अधिकारियों के बीच की जंग में तब्दील हो गया है।
सुधांश पंत राजस्थान के मुख्य सचिव रह चुके हैं और वर्तमान में केंद्र में महत्वपूर्ण भूमिका में हैं। उनके नाम का इस तरह से कोर्ट परिसर में उछालना राज्य की प्रशासनिक छवि पर भी सवाल खड़े करता है।
एसीबी के सूत्रों का कहना है कि सुबोध अग्रवाल के बयानों की पुष्टि जब्त किए गए दस्तावेजों से की जा रही है। जांच एजेंसी अब उन 33 फाइलों का भी बारीकी से अध्ययन कर सकती है जिनका जिक्र अग्रवाल ने किया है।
जांच का बढ़ता हुआ दायरा
जल जीवन मिशन घोटाले की जड़ें काफी गहरी नजर आ रही हैं। एसीबी फिलहाल जयपुर के मुख्य मुख्यालय में दर्ज मुकदमों और एक ट्रैप मामले की जांच कर रही है। लेकिन मामला सिर्फ जयपुर तक सीमित नहीं है।
- जयपुर में दो अन्य बड़े मामले एसीबी के पास लंबित हैं।
- डूंगरपुर जिले में भी जल जीवन मिशन से जुड़ी अनियमितताओं की जांच चल रही है।
- आने वाले दिनों में कुछ और बड़े अधिकारियों से पूछताछ संभव है।
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, दस्तावेजों की कड़ियां जुड़ती जा रही हैं। जानकारों का मानना है कि यदि सुबोध अग्रवाल के आरोपों में सच्चाई है, तो राजस्थान के प्रशासनिक इतिहास के कई और काले पन्ने खुल सकते हैं।
सियासी हलचल और कानूनी पक्ष
इस पूरे घटनाक्रम ने राजस्थान की राजनीति को भी गरमा दिया है। विपक्षी दल अब सरकार और ब्यूरोक्रेसी पर हमलावर हैं। दूसरी तरफ, बचाव पक्ष ने अग्रवाल की गिरफ्तारी के कानूनी आधार को ही चुनौती दी है।
अग्रवाल के वकीलों का कहना है कि उनके मुवक्किल को केवल बलि का बकरा बनाया जा रहा है। उन्होंने कोर्ट से निष्पक्ष जांच की मांग की है। अब सबकी नजरें कोर्ट की अगली सुनवाई और एसीबी की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
यह मामला अब राजस्थान की राजनीति और प्रशासन के लिए एक बड़ी अग्निपरीक्षा बन गया है। भ्रष्टाचार के इस जाल में कौन-कौन फंसा है, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन अग्रवाल के बयान ने आग में घी डालने का काम जरूर किया है।
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