जयपुर | राजस्थान के शिक्षा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक और सकारात्मक बदलाव की शुरुआत होने जा रही है। अब प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षक के साथ-साथ जज भी छात्रों को पढ़ाते नजर आएंगे। राज्य में ‘ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूजडे’ अभियान के तहत न्यायिक अधिकारी सीधे छात्रों से संवाद करेंगे। इस पहल के माध्यम से प्रदेश के 1400 न्यायाधीश चयनित स्कूलों में विशेष कक्षाएं लेंगे।
राजस्थान: अब जज बनेंगे टीचर: राजस्थान के स्कूलों में अब जज सिखाएंगे साइबर सुरक्षा के गुर, ‘ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूजडे’ अभियान की बड़ी शुरुआत
राजस्थान में ‘ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूजडे’ अभियान के तहत 1400 जज स्कूलों में जाकर विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा और कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करेंगे। इस पहल का उद्देश्य छात्रों को डिजिटल खतरों से बचाना और उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनाना है।
HIGHLIGHTS
- राजस्थान के 1400 स्कूलों में न्यायाधीश विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा और विधिक साक्षरता की जानकारी देंगे।
- अभियान के तहत साइबर बुलिंग, डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन फ्रॉड जैसे विषयों पर जागरूकता फैलाई जाएगी।
- कक्षा 8 से 12 तक के 4 लाख से अधिक छात्रों को इस पहल से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
- छात्रों की समस्याओं के समाधान के लिए स्कूलों में 'कोर्ट वाली दीदी शिकायत पेटी' रखी जाएगी।
संबंधित खबरें
साइबर अपराधों से सुरक्षा की शिक्षा
इस अभियान का प्राथमिक उद्देश्य विद्यार्थियों को डिजिटल दुनिया के खतरों के प्रति सचेत करना है। न्यायाधीश बच्चों को साइबर बुलिंग और डिजिटल अरेस्ट की बारीकियों से अवगत कराएंगे। आजकल ऑनलाइन फ्रॉड की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। छात्रों को सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग और वित्तीय धोखाधड़ी से बचने के व्यावहारिक तरीके सिखाए जाएंगे।
न्यायपालिका की सराहनीय पहल
राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव हरिओम अत्री ने इस अभियान की रूपरेखा साझा की है। यह राजस्थान हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की एक बड़ी पहल है। अभियान का शुभारंभ पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीशों की उपस्थिति में किया गया था। इसका उद्देश्य विधिक साक्षरता को जमीनी स्तर तक पहुंचाना है।
संबंधित खबरें
लाखों विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ
यह कार्यक्रम विशेष रूप से कक्षा 8 से 12 तक के किशोर विद्यार्थियों के लिए डिजाइन किया गया है। एक ही दिन में 4 लाख से अधिक छात्रों तक पहुंचने का विशाल लक्ष्य है। यह अभियान केवल एक दिन का नहीं, बल्कि पूरे वर्ष चलने वाला कार्यक्रम है। हर महीने के प्रत्येक मंगलवार को विभिन्न कानूनी विषयों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।
विधिक साक्षरता और संवैधानिक ज्ञान
साइबर सुरक्षा के साथ-साथ छात्रों को उनके मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों की जानकारी दी जाएगी। इसमें बाल अधिकार, महिला अधिकार और विधिक सहायता तंत्र शामिल हैं। न्यायाधीश बच्चों को बताएंगे कि एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में उनकी समाज के प्रति क्या भूमिका है। इससे भविष्य की पीढ़ी में कानून के प्रति गहरा सम्मान पैदा होगा।
शिकायत पेटी से होगा समाधान
इस अभियान की एक अनूठी विशेषता ‘कोर्ट वाली दीदी शिकायत पेटी’ का उपयोग है। यह पेटी स्कूल परिसर में रखी जाएगी, जहां छात्र अपनी परेशानियां साझा कर सकेंगे। इन शिकायतों पर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की टीम गंभीरता से विचार करेगी। गोपनीय तरीके से समस्याओं का समाधान कर छात्रों को त्वरित न्याय दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
सशक्त युवा, सशक्त राजस्थान
यह पूरी योजना ‘एम्पावरिंग राजस्थान यूथ ए लीगल लिटरेसी इनेशेटिव-2026’ का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका लक्ष्य युवाओं को कानूनी रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। इस पहल से न केवल अपराधों में कमी आएगी, बल्कि छात्र अपनी समस्याओं के लिए सही मंच तक पहुंच सकेंगे। यह राजस्थान के भविष्य के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।
ताज़ा खबरें
बिहार के बोधगया में बनेगा '7 वंडर्स ऑफ द वर्ल्ड' पार्क, 14 करोड़ की लागत से दिखेंगे दुनिया के सात अजूबे
अरुणाचल की वांचो जनजाति की अनूठी दुनिया: शादी से पहले संबंध और शरीर पर गुदे टैटू का गहरा राज
IPL 2026 RR vs MI: गुवाहाटी में राजस्थान रॉयल्स और मुंबई इंडियंस की टक्कर, जानें पिच रिपोर्ट और हेड-टू-हेड आंकड़े
घर के मंदिर में न रखें खंडित मूर्तियां: वास्तु और धर्म के अनुसार जानें पूजा-पाठ के जरूरी नियम और सही दिशा