जयपुर | राजस्थान में बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार के नए दरवाजे खुलने जा रहे हैं। राज्य सरकार ने एक ऐसी योजना को मंजूरी दी है, जो प्रशिक्षण के बाद सीधे नौकरी की गारंटी देगी। इस पहल से प्रदेश के लाखों युवाओं के सपनों को नई उड़ान मिलेगी।
नौकरी की गारंटी!: राजस्थान में RTD मॉडल: ट्रेनिंग के बाद सीधी नौकरी
राजस्थान सरकार ने बेरोजगारों के लिए 'रिक्रूट-ट्रेन-डेप्लॉय' मॉडल लागू किया, जिससे उद्योगों की मांग के अनुसार प्रशिक्षण देकर रोजगार मिलेगा।
HIGHLIGHTS
- राजस्थान सरकार ने बेरोजगारों के लिए 'रिक्रूट-ट्रेन-डेप्लॉय' (RTD) मॉडल को मंजूरी दी है।
- इस मॉडल के तहत प्रशिक्षण पूरा होने पर युवाओं को शत-प्रतिशत प्लेसमेंट की गारंटी मिलेगी।
- योजना का लाभ केवल बेरोजगार युवा ही उठा सकते हैं, नियमित छात्र इसके पात्र नहीं होंगे।
- प्रशिक्षण सहयोगियों का चयन पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से होगा और मूल्यांकन थर्ड पार्टी करेगी।
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क्या है राजस्थान का RTD मॉडल?
राजस्थान सरकार ने कौशल नीति 2025 के तहत 'भर्ती-प्रशिक्षण-तैनाती' (Recruit-Train-Deploy - RTD) मॉडल को लागू करने का फैसला किया है।
कौशल व उद्यमिता विभाग की बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की 50वीं बैठक में इस महत्वाकांक्षी योजना को अंतिम प्रशासनिक मंजूरी दे दी गई है।
इस मॉडल का मुख्य उद्देश्य युवाओं को उद्योगों की वास्तविक जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षित करना है। इससे कौशल की कमी को दूर किया जा सकेगा।
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युवाओं के लिए कैसे बदलेगी तस्वीर?
इस योजना का सबसे बड़ा आकर्षण प्रशिक्षण के बाद सीधे नौकरी मिलना है। सरकार का लक्ष्य युवाओं को सिर्फ प्रशिक्षित करना नहीं, बल्कि उन्हें रोजगार से जोड़ना है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि सरकार युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि बदलती अर्थव्यवस्था में युवाओं को आधुनिक तकनीकों से लैस करना समय की मांग है।
यह मॉडल सुनिश्चित करेगा कि युवा जो कौशल सीख रहे हैं, उसकी बाजार में मांग हो, जिससे बेरोजगारी की समस्या पर सीधा प्रहार होगा।
सरकार युवाओं को कौशल विकास और रोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। आरटीडी मॉडल से उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण मिलेगा और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। - संदीप वर्मा, एसीएस, कौशल विकास एवं उद्यमिता विभाग।
योजना की पात्रता और शर्तें
इस कार्यक्रम को विशेष रूप से बेरोजगार युवाओं के लिए डिजाइन किया गया है। इसका लाभ उठाने के लिए कुछ शर्तें निर्धारित की गई हैं।
आवेदक की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए। शैक्षणिक योग्यता का निर्धारण राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (NSQF) के मानकों के अनुसार होगा।
एक महत्वपूर्ण शर्त यह है कि जो छात्र स्कूलों या कॉलेजों में नियमित रूप से पढ़ाई कर रहे हैं, वे इस कार्यक्रम के लिए पात्र नहीं होंगे।
सर्वांगीण विकास पर भी जोर
यह योजना केवल तकनीकी कौशल तक सीमित नहीं है। इसमें युवाओं के सर्वांगीण विकास पर भी ध्यान दिया गया है।
पाठ्यक्रम के दौरान 120 घंटे का एक विशेष अनिवार्य मॉड्यूल शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य सॉफ्ट स्किल्स, संवाद क्षमता और पेशेवर व्यवहार को बेहतर बनाना है।
कैसे होगी चयन और प्लेसमेंट प्रक्रिया?
इस कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए चार प्रमुख मॉडल बनाए गए हैं। इनमें उद्योग-नेतृत्व, मानव संसाधन एजेंसी-नेतृत्व, और विशेष परियोजनाएं शामिल हैं।
प्रशिक्षण देने वाले सहयोगियों का चयन 'रुचि की अभिव्यक्ति' (EOI) प्रक्रिया के माध्यम से पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाएगा।
चयन का आधार संस्था की कानूनी स्थिति, वित्तीय क्षमता और सबसे महत्वपूर्ण, उनका पिछला प्लेसमेंट रिकॉर्ड होगा।
निष्पक्ष मूल्यांकन और 100% प्लेसमेंट
प्रशिक्षण के दौरान युवाओं को कार्यस्थल पर व्यावहारिक प्रशिक्षण (On-the-Job Training) भी दिया जाएगा, ताकि वे उद्योग के माहौल से परिचित हो सकें।
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद, निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए मूल्यांकन किसी तीसरे पक्ष (Third Party) द्वारा किया जाएगा।
मूल्यांकन में सफल होने वाले युवाओं को चयनित एजेंसी के माध्यम से शत-प्रतिशत प्लेसमेंट यानी रोजगार सुनिश्चित किया जाएगा।
यह कदम राजस्थान के औद्योगिक विकास को भी गति देगा, क्योंकि उद्योगों को उनकी जरूरत के मुताबिक कुशल कार्यबल आसानी से उपलब्ध हो सकेगा। सरकार की यह पहल युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है।
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