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राजस्थान

राजस्थान में पांडुलिपियों का महासंग्रह: ज्ञान भारतम मिशन: पांडुलिपियों में राजस्थान नंबर 1

जोगेन्द्र सिंह शेखावत

राजस्थान में 15 लाख से अधिक पांडुलिपियों का सत्यापन हुआ, जो देश में सबसे ज्यादा है।

HIGHLIGHTS

  • राजस्थान ने 15,21,034 पांडुलिपियों के सत्यापन के साथ देश में पहला स्थान हासिल किया है।
  • जयपुर जिला 4,91,688 पांडुलिपियों के साथ राज्य में शीर्ष स्थान पर बना हुआ है।
  • मिशन का मुख्य उद्देश्य प्राचीन पांडुलिपियों का सर्वेक्षण, संरक्षण और डिजिटलीकरण करना है।
  • शिक्षकों और छात्रों की टीमें घर-घर जाकर इन ऐतिहासिक दस्तावेजों की मैपिंग कर रही हैं।
rajasthan leads in manuscript conservation gyan bharatam mission

जयपुर | राजस्थान ने भारत की बौद्धिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में एक बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'ज्ञान भारतम' मिशन के अंतर्गत प्रदेश अब पूरे देश में अग्रणी बनकर उभरा है।

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में हुई बैठक में बताया गया कि राजस्थान में अब तक 15 लाख 21 हजार 34 पांडुलिपियों का सत्यापन किया जा चुका है। यह संख्या पूरे भारत में सर्वाधिक है।

राजस्थान के जिलों का शानदार प्रदर्शन

इस मिशन के तहत जयपुर जिला 4,91,688 पांडुलिपियों के साथ राज्य में पहले पायदान पर है। इसके बाद बीकानेर में 3,39,740 और जोधपुर में 1,90,847 पांडुलिपियों का महत्वपूर्ण डेटा संकलित किया गया है।

राज्य में 'राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान, जोधपुर' को नोडल विभाग बनाया गया है। वहीं राजस्थान संस्कृत अकादमी, जयपुर के निदेशक को इस महत्वपूर्ण मिशन के लिए राज्य नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

विशेषज्ञों की देखरेख में संरक्षण कार्य

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि पांडुलिपियों के सर्वेक्षण के लिए केवल उन्हीं व्यक्तियों को नोडल अधिकारी बनाया जाए जिन्हें लिपियों की गहरी समझ हो। संस्कृत भाषा के लिए विशेष रूप से विभागाध्यक्षों को जोड़ा गया है।

"जिस व्यक्ति को लिपि की समझ हो उसे ही नोडल अधिकारी बनाया जाए। पांडुलिपियों का सर्वेक्षण लक्ष्य-केंद्रित हो ताकि भारत के प्रभावशाली इतिहास का सही संकलन हो सके।" - वी. श्रीनिवास, मुख्य सचिव

सर्वेक्षण का मुख्य फोकस उन पांडुलिपियों पर है जिनका भारत के इतिहास और संस्कृति पर गहरा प्रभाव रहा है। इनका संकलन और संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अनमोल उपहार साबित होगा।

डिजिटलीकरण से सुरक्षित होगा भविष्य

ज्ञान भारतम मिशन का अंतिम लक्ष्य इन अमूल्य दस्तावेजों को आधुनिक तकनीक के जरिए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराना है। इससे शोधकर्ताओं और छात्रों को भारतीय ज्ञान परंपरा को समझने में बड़ी मदद मिलेगी।

इस अभियान में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों, पुस्तकालय अध्यक्षों और विश्वविद्यालयों के छात्रों को 'सर्वेक्षण प्रगणक' के रूप में शामिल किया गया है। ये टीमें विभिन्न मंदिरों, मठों और निजी पुस्तकालयों में जाकर सत्यापन कर रही हैं।

सर्वेक्षण के दौरान पांडुलिपि स्वामियों के अधिकारों और सांस्कृतिक संवेदनशीलता का पूरा सम्मान सुनिश्चित किया जा रहा है। जिला कलेक्टरों द्वारा नामित अधिकारी जिला स्तर पर इस पूरी प्रक्रिया की निरंतर निगरानी कर रहे हैं।

सांस्कृतिक विरासत की नई पहचान

बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रवीण गुप्ता और प्रमुख शासन सचिव सुबीर कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सभी ने राजस्थान की इस उपलब्धि को राज्य के गौरवशाली इतिहास के संरक्षण के लिए मील का पत्थर बताया।

यह मिशन न केवल प्राचीन ज्ञान को बचाएगा, बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक पटल पर और मजबूती देगा। अब हमारी सभ्यता का यह अनमोल ज्ञान डिजिटल माध्यम से पूरी दुनिया के लिए सुलभ होगा।

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