पाली | राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर इन दिनों अपने 'रोडवेज सफर' और सादगी को लेकर सुर्खियों में हैं। उन्होंने पाली से कोटा तक सरकारी बस में यात्रा कर सबको चौंका दिया। इस यात्रा के जरिए मंत्रीजी ने आम जनता को ईंधन बचाने और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग का कड़ा संदेश दिया। हालांकि मंत्रियों को मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलती है।
मदन दिलावर का रोडवेज सफर: राजस्थान शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का रोडवेज बस में सफर
ईंधन बचाने का संदेश देने बस में चढ़े मंत्री, जोधपुर में 9 करोड़ का बड़ा घोटाला।
HIGHLIGHTS
- शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने पाली से कोटा तक रोडवेज बस में सफर कर ईंधन बचाने का संदेश दिया।
- मंत्री ने मुफ्त सुविधा के बावजूद टिकट खरीदा और आम यात्रियों के साथ संवाद किया।
- जोधपुर में 9 करोड़ के पोषाहार घोटाले में ACB ने 18 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा।
- एसीबी की 29 हजार पन्नों की जांच रिपोर्ट में खराब माल सप्लाई और फर्जी पेमेंट का खुलासा हुआ।
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ईंधन बचाने का संदेश और बस का सफर
मंत्री मदन दिलावर ने बड़ा दिल दिखाते हुए बस का टिकट खरीदा। उन्होंने कंडक्टर को पैसे दिए और आम यात्री की तरह अपनी निर्धारित सीट पर बैठे। नेताओं का आम आदमी की तरह व्यवहार करना जनता में विश्वास जगाता है। सफर के दौरान मंत्रीजी मोबाइल देखते और अन्य यात्रियों से सहज संवाद करते नजर आए। सफर के दौरान एक मजेदार वाकया भी हुआ। जब मंत्रीजी अपने मुकाम पर पहुंचकर उतरने वाले थे, तभी एक पत्रकार ने उन्हें रुकने का आग्रह किया। दरअसल, पत्रकार का कैमरामैन उस वक्त मौके पर नहीं था। मंत्रीजी ने भी शालीनता दिखाई और फोटो क्लिक करवाने के लिए दोबारा सीट पर जाकर बैठ गए।
"जनता के बीच रहकर ही उनकी जमीनी समस्याओं को समझा जा सकता है। रोडवेज बस का यह सफर ईंधन बचाने की एक छोटी सी कोशिश है।"
जोधपुर में ACB की बड़ी कार्रवाई: 18 गिरफ्तार
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एक तरफ मंत्रीजी बस में सफर कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ जोधपुर में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा एक्शन हुआ। एसीबी ने 9 करोड़ के घोटाले में 18 लोगों को पकड़ा। एएसपी कल्पना सोलंकी के नेतृत्व में यह कार्रवाई की गई। पोषाहार वितरण में हुए इस बड़े घोटाले की जांच रिपोर्ट करीब 29 हजार पन्नों की तैयार हुई है।
पोषाहार घोटाले की पूरी कहानी और गिरफ्तारियां
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने आंगनबाड़ी केंद्रों पर खराब माल सप्लाई किया था। कई जगहों पर तो सामग्री बांटी ही नहीं गई और फर्जी पेमेंट उठा लिया गया। गिरफ्तार लोगों में महिला पर्यवेक्षक, कनिष्ठ लिपिक (LDC) और संविदा कर्मी शामिल हैं। कुचामन सिटी, परबतसर, मकराना और डेगाना से कई गिरफ्तारियां की गई हैं। एसीबी को इस घोटाले की भनक साल 2018 में लगी थी। तब चार दिनों तक चली सर्च में करीब 50 लाख 75 हजार रुपये नकद बरामद किए गए थे। अब पुख्ता सबूतों के आधार पर 9 महिलाओं और 10 पुरुषों के खिलाफ कार्रवाई हुई है। इनमें से एक मुख्य आरोपी नरेश दायमा फिलहाल फरार बताया जा रहा है। इस बड़ी कार्रवाई ने पूरे विभाग में हड़कंप मचा दिया है। भ्रष्टाचार के खिलाफ राजस्थान सरकार और एसीबी की यह 'जीरो टॉलरेंस' नीति का एक बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। इस घटनाक्रम के साथ ही डीग में गृह राज्यमंत्री द्वारा पदयात्री की सेवा और जोधपुर ट्रेनिंग कैंप में भाजपा नेताओं की जुगलबंदी भी चर्चा का विषय बनी रही।
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