2 बच्चों की बाध्यता खत्म: राजस्थान में 2 से ज्यादा बच्चों वाले भी लड़ सकेंगे चुनाव: विधानसभा में बिल पास, 31 साल पुराना नियम खत्म

राजस्थान में 2 से ज्यादा बच्चों वाले भी लड़ सकेंगे चुनाव: विधानसभा में बिल पास, 31 साल पुराना नियम खत्म
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Highlights

  • राजस्थान पंचायतीराज संशोधन विधेयक 2026 विधानसभा में ध्वनि मत से पारित।
  • वार्ड पंच से लेकर जिला प्रमुख तक के चुनाव में अब 2 बच्चों की बाध्यता नहीं रहेगी।
  • अजमेर में खुलेगी नई आयुर्वेद-योग यूनिवर्सिटी, खेल विभाग में होगी 840 कोचों की भर्ती।
  • शिक्षा मंत्री मदन दिलावर और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के बीच 'भांग' वाले बयान पर तीखी नोकझोंक।

जयपुर | राजस्थान की राजनीति में आज एक बड़ा विधायी कार्य संपन्न हुआ, जिससे राज्य की ग्रामीण राजनीति की दिशा और दशा बदलने की संभावना है। भजनलाल सरकार ने पंचायतीराज चुनावों में दो से ज्यादा बच्चों की बाध्यता को समाप्त करने वाला 'राजस्थान पंचायतीराज संशोधन विधेयक 2026' सदन में चर्चा के बाद पारित कर दिया। यह विधेयक न केवल चुनावी मानदंडों को सरल बनाता है, बल्कि पिछले तीन दशकों से चले आ रहे एक कड़े प्रतिबंध को भी हटाता है।

पंचायतीराज संशोधन विधेयक: एक ऐतिहासिक कदम

राजस्थान पंचायतीराज संशोधन बिल के माध्यम से राजस्थान पंचायतीराज कानून की धारा 19 में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। अब तक इस धारा के तहत चुनाव लड़ने के लिए दो से अधिक बच्चों वाले उम्मीदवारों पर प्रतिबंध था। विधानसभा में इस संशोधन के पारित होने के बाद अब वार्ड पंच, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य, प्रधान और जिला प्रमुख जैसे महत्वपूर्ण पदों के लिए बच्चों की संख्या की कोई बाध्यता नहीं रहेगी। यह कदम उन हजारों संभावित उम्मीदवारों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है जो अब तक इस तकनीकी कारण से चुनावी दौड़ से बाहर थे।

31 साल पुराने नियम का हुआ अंत

उल्लेखनीय है कि राजस्थान में यह प्रतिबंध आज से लगभग 31 साल पहले तत्कालीन भैरोंसिंह शेखावत सरकार द्वारा लागू किया गया था। उस समय इसका उद्देश्य जनसंख्या नियंत्रण के प्रति जागरूकता फैलाना और जनप्रतिनिधियों को एक आदर्श के रूप में प्रस्तुत करना था। हालांकि, बदलते सामाजिक और राजनीतिक परिवेश में इस नियम को हटाने की मांग लंबे समय से की जा रही थी। 5 मार्च को विधानसभा के पटल पर रखे गए इस बिल पर गहन बहस हुई, जिसके बाद इसे ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। सरकार का तर्क है कि इस बदलाव से लोकतांत्रिक भागीदारी बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर नेतृत्व के अधिक अवसर उपलब्ध होंगे।

ग्रामीण राजनीति के समीकरणों में बदलाव

इस विधेयक के कानून बनते ही गांवों की सियासत में जबरदस्त हलचल देखने को मिलेगी। अब तक जो अनुभवी नेता दो से ज्यादा बच्चों के कारण चुनाव नहीं लड़ पा रहे थे, वे अब फिर से चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी करेंगे। इससे स्थानीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा और अधिक तीव्र होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रावधान के हटने से कई पुराने सियासी दिग्गज सक्रिय होंगे, जिसका सीधा असर आने वाले पंचायतीराज चुनावों के नतीजों पर पड़ेगा। इसके साथ ही, शहरी निकायों के लिए भी इसी तरह का बदलाव लाने वाला 'राजस्थान नगरपालिका संशोधन बिल' मंगलवार को सदन में पेश किया जाएगा।

विधानसभा में तीखी नोकझोंक: 'भांग' वाले बयान पर हंगामा

सदन की कार्यवाही के दौरान केवल विधायी कार्य ही नहीं हुए, बल्कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखे जुबानी तीर भी चले। स्कूलों में शिक्षकों के खाली पदों के मुद्दे पर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के बीच जबरदस्त नोकझोंक हुई। भाजपा विधायक बालकनाथ के सवाल का जवाब देते हुए दिलावर ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने बिना पद सृजित किए हजारों स्कूलों को अंग्रेजी माध्यम में बदल दिया। इसी दौरान दिलावर ने विवादित टिप्पणी करते हुए कहा कि 'पता नहीं भांग खाकर स्कूल खोल दिए'। उन्होंने पूर्व शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा का नाम लेते हुए यह टिप्पणी की, जिस पर विपक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई।

अजमेर को मिली आयुर्वेद-योग यूनिवर्सिटी की सौगात

शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी विधानसभा ने महत्वपूर्ण निर्णय लिए। सदन ने 'राजस्थान आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा विश्वविद्यालय, अजमेर विधेयक 2026' को पारित कर दिया। इस विश्वविद्यालय की स्थापना से राज्य में प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा मिलेगा। चर्चा के दौरान कई विधायकों ने इसका नाम 'आयुष विश्वविद्यालय' रखने का सुझाव भी दिया। यह संस्थान अजमेर और आसपास के क्षेत्रों के लिए शिक्षा और चिकित्सा के नए द्वार खोलेगा।

खेल और रोजगार: 840 कोचों की होगी भर्ती

युवाओं और खिलाड़ियों के लिए भी सदन से अच्छी खबर आई। खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने जानकारी दी कि खेल विभाग में कुल 840 कोचों की भर्ती की जाएगी। इनमें 140 स्थायी पद होंगे, जिनके लिए वित्त विभाग से मंजूरी मिल चुकी है और कर्मचारी चयन बोर्ड प्रक्रिया शुरू कर रहा है। इसके अतिरिक्त, 700 अस्थायी कोच भी नियुक्त किए जाएंगे ताकि प्रदेश के सभी प्रशिक्षण केंद्रों पर खिलाड़ियों को उचित मार्गदर्शन मिल सके। यह 2012 के बाद खेल विभाग में होने वाली पहली बड़ी भर्ती प्रक्रिया है।

मनरेगा भुगतान और अन्य मुद्दे

ग्रामीण विकास मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने सदन में स्वीकार किया कि मनरेगा मजदूरों को मजदूरी के भुगतान में देरी हो रही है। उन्होंने इसका मुख्य कारण केंद्र सरकार से मिलने वाले अंशदान में देरी और तकनीकी दस्तावेजों की कमी को बताया। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे स्वयं व्यक्तिगत रूप से केंद्र से संपर्क कर बकाया राशि जारी करवाएंगे। मंत्री ने स्पष्ट किया कि जैसे ही केंद्रीय फंड प्राप्त होगा, सभी श्रमिकों का भुगतान तुरंत कर दिया जाएगा। यह विधानसभा सत्र राजस्थान की प्रशासनिक और राजनीतिक व्यवस्था में कई दूरगामी बदलावों का गवाह बना है, जिसका प्रभाव आने वाले समय में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

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