जयपुर/बीकानेर | राजस्थान में पंचायती राज संस्थाओं के आम चुनाव के दौरान मतदान के दिन औद्योगिक एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में कार्यरत कर्मचारियों को सवैतनिक अवकाश देना होगा। श्रम विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं।
पंचायती राज चुनाव: मतदान के दिन मिलेगा सवैतनिक अवकाश
राजस्थान में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में मतदान दिवस पर औद्योगिक व वाणिज्यिक संस्थानों के पात्र कामगारों को सवैतनिक अवकाश दिया जाएगा।
HIGHLIGHTS
- पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव के दौरान मतदान दिवस पर कर्मचारियों को सवैतनिक अवकाश मिलेगा।
- आदेश में आकस्मिक कामगारों सहित सभी पात्र कर्मचारियों को शामिल किया गया है।
- अवकाश न देने वाले नियोजकों पर नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई और जुर्माना हो सकता है।
- श्रम आयुक्त पूजा पार्थ की ओर से इस संबंध में आवश्यक आदेश जारी किए गए हैं।
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विभाग ने नियोजकों को सभी पात्र कामगारों को मतदान के दिन अवकाश प्रदान करने के स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।
श्रम विभाग द्वारा जारी इन निर्देशों के दायरे में नियमित कामगारों के साथ-साथ आकस्मिक कामगार भी शामिल रहेंगे।
श्रम विभाग के निर्देश और कानूनी प्रावधान
श्रम आयुक्त पूजा पार्थ की ओर से इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किए गए हैं।
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आदेश के अनुसार, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 135ख के प्रावधान लागू रहेंगे।
इसके साथ ही राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 22 के प्रावधान भी इन चुनावों पर प्रभावी होंगे।
वेतन में कटौती पर पूरी तरह रोक
आदेश के तहत मतदान के दिन अवकाश देने के कारण कर्मचारियों के वेतन में कोई कटौती नहीं की जा सकेगी।
सभी पात्र कामगारों को मतदान दिवस का पूरा वेतन नियमानुसार दिया जाएगा।
नियमों का उल्लंघन करने पर होगी कार्रवाई
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई नियोजक कर्मचारी को मतदान के लिए अवकाश नहीं देता है, तो उस पर कार्रवाई होगी।
नियमों की अनदेखी करने वाले नियोजकों के खिलाफ दंडात्मक कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं।
शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया
कर्मचारी संबंधित रिटर्निंग अधिकारी को तथ्यात्मक विवरण के साथ अपनी शिकायत प्रस्तुत कर सकते हैं।
इसके अलावा जिला निर्वाचन अधिकारी को भी इस संबंध में लिखित शिकायत सौंपी जा सकती है।
जुर्माने का प्रावधान और विशेष अपवाद
धारा 135ख के तहत प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले नियोजक पर 500 रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि तय नियमों का पालन करना सभी नियोजकों के लिए अनिवार्य रहेगा।
हालांकि, कर्मचारी की अनुपस्थिति से प्रतिष्ठान को खतरा या गंभीर नुकसान होने की स्थिति में इस प्रावधान का अपवाद लागू हो सकता है।
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