जयपुर | राजस्थान की राजधानी जयपुर में स्थित पुलिस मुख्यालय में कानून-व्यवस्था को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय बैठक संपन्न हुई। महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक चाक-चौबंद बनाने के लिए एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है। मुख्यालय के सभागार में यह मैराथन बैठक करीब 6 घंटे से भी अधिक समय तक चली। इसमें अपराध नियंत्रण के साथ-साथ पुलिसिंग को आधुनिक बनाने और नवाचारों के क्रियान्वयन को लेकर रेंजवार प्रगति की गहन समीक्षा की गई। अधिकारियों ने इस दौरान भविष्य की चुनौतियों से निपटने का रोडमैप भी साझा किया।
राजस्थान पुलिस का नया एक्शन प्लान: राजस्थान पुलिस का महामंथन: अपराधियों की अब खैर नहीं
डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था सुधारने के लिए दिए कड़े निर्देश।
HIGHLIGHTS
- डीजीपी ने अपराधियों की अवैध संपत्तियों को जब्त करने और वित्तीय जांच के आदेश दिए।
- झूठे मुकदमे दर्ज कराने वालों के खिलाफ धारा 182/211 के तहत होगी कड़ी कार्रवाई।
- जोधपुर पुलिस की तर्ज पर अब वरिष्ठ अधिकारी थानों को गोद लेकर सुधार करेंगे।
- साइबर अपराधों के लिए 1930 हेल्पलाइन और बीट प्रणाली को किया जाएगा और मजबूत।
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अपराध नियंत्रण और अपराधियों पर वित्तीय प्रहार की तैयारी
बैठक के दौरान डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने गंभीर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए एक बहुआयामी रणनीति अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल गिरफ्तारी ही काफी नहीं है, बल्कि अपराधियों की कमर तोड़ने के लिए उन पर आर्थिक प्रहार करना बहुत जरूरी है। डीजीपी ने निर्देश दिए कि एनडीपीएस, गैंगस्टर्स और हार्डकोर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान फाइनेंशियल इन्वेस्टिगेशन को अनिवार्य बनाया जाए। अपराधियों की अवैध रूप से अर्जित की गई संपत्तियों को चिन्हित करना अब पुलिस की प्राथमिकता होगी ताकि उन्हें कानूनी रूप से जब्त किया जा सके। इसके साथ ही, 5 साल से अधिक पुराने लंबित प्रकरणों के त्वरित निस्तारण के लिए भी कड़े निर्देश दिए गए हैं। डीजीपी ने कहा कि एडीजी क्राइम द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन हर हाल में सुनिश्चित किया जाए ताकि पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सके और फाइलों का बोझ कम हो।
हिस्ट्रीशीटर और आदतन अपराधियों पर होगी सख्त निगरानी
पुराने और चिन्हित हार्डकोर अपराधियों तथा हिस्ट्रीशीटरों द्वारा बार-बार अपराध किए जाने की घटनाओं पर डीजीपी ने गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने अधिकारियों को इसे एक बड़ी चुनौती के रूप में स्वीकार करने और इन अपराधियों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई करने का आदेश दिया। पुलिस थानों के मालखानों में वर्षों से पड़ी सामग्री की स्थिति को देखते हुए, डीजीपी ने इसके निस्तारण के लिए एक विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। इससे थानों में जगह की कमी दूर होगी और संसाधनों का बेहतर प्रबंधन संभव हो सकेगा।
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पुलिसिंग में तकनीक का बढ़ता इस्तेमाल और राजकॉप एप
आम जनता को तकनीक का सीधा लाभ पहुंचाने के लिए डीजीपी ने 'राजकॉप सिटीजन एप' के अधिकतम उपयोग पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि पुलिसिंग को डिजिटल युग के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना होगा ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ सके। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे अपने-अपने जिलों के लिए अलग से मोबाइल एप बनाने के बजाय अपने नए आइडिया मुख्यालय को भेजें। इन सुझावों को मुख्य एप में ही शामिल किया जाएगा ताकि जनता को भ्रम न हो और एक ही मंच पर सारी सुविधाएं मिल सकें। डीजीपी ने थानों में लगे सीसीटीवी कैमरों की कार्यशीलता और उनकी नियमित रिकॉर्डिंग सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि अपराधों के डिटेक्शन, चालानी प्रतिशत और रिकवरी की दर में सुधार करना पुलिस अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
सड़क सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के नए आयाम
सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में जयपुर रेंज द्वारा अपनाई गई 'लेन ड्राइविंग' व्यवस्था की सराहना की गई और इसे अन्य क्षेत्रों में भी विस्तार देने के निर्देश दिए गए। टोल प्लाजा पर जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से सड़क दुर्घटनाओं को कम करने का प्रयास किया जाएगा। थानों के 'स्वागत कक्षों' को अधिक प्रभावी बनाने के लिए वहां कंप्यूटर, सीसीटीएनएस और ऑनलाइन एंट्री की सुविधा सुनिश्चित करने को कहा गया है। इससे परिवादियों की शिकायतें तत्काल डिजिटल माध्यम से दर्ज हो सकेंगी और पुलिस की कार्यप्रणाली में सुधार आएगा।
झूठे मुकदमों पर लगाम और थाना गोद लेने की पहल
बैठक में महिला अत्याचार और एससी/एसटी एक्ट से संबंधित प्रकरणों में अनुसंधान की गुणवत्ता पर भी विस्तार से चर्चा हुई। डीजीपी ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण निर्देश दिया कि जो लोग जानबूझकर झूठे मुकदमे दर्ज कराते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
"झूठे मुकदमे दर्ज कराने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार धारा 182/211 के तहत प्रभावी कार्रवाई कर इस्तगासा पेश किया जाए, ताकि न्याय प्रणाली का दुरुपयोग न हो सके।"
बैठक में जोधपुर पुलिस आयुक्तालय द्वारा 'थाना गोद लेने' की एक विशेष प्रस्तुति दी गई। इस अभिनव योजना का उद्देश्य थानों की कार्यप्रणाली में गुणात्मक सुधार लाना और पुलिस-पब्लिक समन्वय को मजबूत करना है। 10 वर्ष से अधिक सेवा वाले अधिकारी अब थानों को गोद लेंगे।
बीट प्रणाली और हेल्पलाइन का सुदृढ़ीकरण
जमीनी स्तर पर सूचना तंत्र को मजबूत करने के लिए बीट कांस्टेबल व्यवस्था को अधिक सक्रिय बनाया जाएगा। डीजीपी ने कहा कि बीट कांस्टेबल ही पुलिस का चेहरा होता है और उसे अपने क्षेत्र की हर गतिविधि की सटीक जानकारी होनी चाहिए। राजस्थान संपर्क (181) हेल्पलाइन पर दर्ज होने वाले प्रकरणों के निस्तारण की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए गए। डीजीपी ने निर्देश दिए कि केवल फाइलों में निस्तारण न दिखाया जाए, बल्कि यह सुनिश्चित किया जाए कि परिवादी को वास्तव में न्याय मिला है या नहीं।
साइबर क्राइम और भविष्य की चुनौतियां
बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए डीजीपी ने 1930 हेल्पलाइन को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। जिला पुलिस अधीक्षकों (SP) को खुद इन मामलों की प्रगति की निगरानी करने को कहा गया है ताकि साइबर ठगों पर लगाम कसी जा सके। क्षेत्र में होने वाली किसी भी बड़ी घटना पर संबंधित एसपी को तत्काल तथ्यात्मक रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को भेजनी होगी। महिला बीट ऑफिसर स्कीम को भी अब और अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा, जिसकी समीक्षा एक महीने बाद दोबारा की जाएगी। बैठक के अंत में डीजी लॉ एंड ऑर्डर संजय अग्रवाल, डीजी ट्रैफिक अनिल पालीवाल और डीजी स्पेशल ऑपरेशंस आनंद श्रीवास्तव ने भी अपने सुझाव दिए। इस महामंथन से यह साफ है कि राजस्थान पुलिस अब अपराधियों के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर काम करेगी। इस व्यापक कार्ययोजना और नवाचारों के माध्यम से राजस्थान पुलिस न केवल अपराधों पर नियंत्रण पाने की कोशिश कर रही है, बल्कि आम जनता के बीच पुलिस के प्रति विश्वास को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में भी कदम बढ़ा रही है।
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