thinQ360
🏠 टॉप 🔥 राजनीति 📍 राज्य 📰 लाइफ स्टाइल 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 📰 जालोर 👤 शख्सियत 💻 तकनीक ✍️ Blog ⭐ सफलता की कहानी 🚨 क्राइम 📰 मनचाही ▶️ YouTube
राजनीति

राजस्थान में परिवारवाद पर रार: राजस्थान की सियासत में 'परिवारवाद' पर संग्राम: अशोक गहलोत की नसीहत पर बीजेपी का पलटवार, याद दिलाया 'पुत्र मोह'

बलजीत सिंह शेखावत

राजस्थान में पूर्व सीएम अशोक गहलोत द्वारा मंत्रियों को अपने बेटों को सरकारी काम से दूर रखने की सलाह देने पर सियासी बवाल मच गया है। बीजेपी ने इसे गहलोत का दोहरा मापदंड बताया है।

+Follow us
thinQ360 को गूगल पर फेवरेट बनाएँ

HIGHLIGHTS

  • अशोक गहलोत ने मंत्रियों को अपने बेटों को सरकारी कामकाज से दूर रखने की नसीहत दी है।
  • बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने गहलोत पर पलटवार करते हुए इसे 'पुत्र मोह' करार दिया।
  • मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने तंज कसा कि गहलोत और सोनिया गांधी अपने बेटों को लॉन्च करने में विफल रहे।
  • राजस्थान के करीब 20 प्रतिशत विधायक किसी न किसी राजनीतिक परिवार की विरासत से आते हैं।
rajasthan politics dynastic row ashok gehlot vs bjp vaibhav gehlot

जयपुर | राजस्थान की राजनीति में इन दिनों 'परिवारवाद' का मुद्दा सुर्खियों में है। अमूमन बीजेपी इस मुद्दे पर कांग्रेस को घेरती रही है, लेकिन इस बार जंग की शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के एक बयान से हुई है।

गहलोत ने हाल ही में मंत्रियों को नसीहत दी कि वे अपने परिजनों, खासकर बेटों को सरकारी कामकाज में दखल देने से रोकें। उन्होंने कहा कि सत्ता में परिजनों का प्रभाव सरकार की छवि खराब करता है।

बीजेपी ने याद दिलाया 'पुत्र मोह'

बीजेपी ने गहलोत के इस बयान को आड़े हाथों लिया है। प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि गहलोत खुद 'पुत्र मोह' से बाहर नहीं निकल पाए हैं। वे सालों से वैभव गहलोत को स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।

संसदीय कार्यमंत्री जोगाराम पटेल ने भी कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जिनके घर कांच के होते हैं, वे दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकते। कांग्रेस खुद भ्रष्टाचार और परिवारवाद में डूबी हुई पार्टी है।

पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने प्रेस वार्ता कर आरोप लगाया कि गहलोत ने अपने कार्यकाल में कभी यह नियम नहीं अपनाया। उन्होंने आरसीए में बेटे की ताजपोशी के लिए वरिष्ठ नेताओं को साइडलाइन किया था।

मुख्यमंत्री का तीखा तंज

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी इस विवाद में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी राहुल गांधी को और अशोक गहलोत वैभव गहलोत को कई बार लॉन्च करने की कोशिश कर चुके हैं, लेकिन जनता ने नकार दिया।

विवाद बढ़ने पर अशोक गहलोत ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनका मतलब राजनीति से नहीं, बल्कि सरकारी कामकाज से था। उन्होंने दावा किया कि सीएम रहते हुए उन्होंने बेटे को सरकारी आवास से दूर रखा था।

गहलोत ने आगे कहा कि अगर किसी में काबिलियत है, तो परिवार का सदस्य राजनीति में आ सकता है। उन्होंने इसे एक 'लाइन ऑफ डिस्टिंक्शन' बनाए रखने की जरूरत बताया।

राजस्थान में परिवारवाद की हकीकत

राजस्थान की राजनीति में परिवारवाद एक स्थापित सच है। आंकड़ों के अनुसार, राज्य के करीब 20 प्रतिशत विधायक राजनीतिक परिवारों से आते हैं। इसमें बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दल शामिल हैं।

गहलोत, पायलट, राजे और मिर्धा जैसे बड़े नाम इस सूची का हिस्सा हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पहचान और संसाधनों के कारण मतदाता अक्सर परिचित चेहरों पर ही भरोसा करते हैं।

यह बहस अब सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं है। आने वाले निकाय और पंचायत चुनावों में 'मेरिट बनाम वंशवाद' का यह मुद्दा एक बड़ी चुनावी रणनीति के रूप में उभरने वाला है।

शेयर करें: