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रीट परीक्षा में बड़ा फर्जीवाड़ा: राजस्थान रीट परीक्षा में बड़ा फर्जीवाड़ा: डमी कैंडिडेट के जरिए शिक्षक बने 30 लोगों पर FIR दर्ज, SOG की बड़ी कार्रवाई

मानवेन्द्र जैतावत

राजस्थान में रीट परीक्षा-2022 में डमी अभ्यर्थियों के जरिए सरकारी नौकरी पाने वाले 30 शिक्षकों के खिलाफ एसओजी ने मामला दर्ज किया है। बायोमेट्रिक जांच में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद यह कड़ी कार्रवाई की गई है।

HIGHLIGHTS

  • एसओजी ने डमी कैंडिडेट के जरिए परीक्षा पास करने वाले 30 शिक्षकों पर FIR दर्ज की है।
  • बायोमेट्रिक मिलान के दौरान आवेदन पत्र और वास्तविक अभ्यर्थी में अंतर पाया गया।
  • यह मामला 25 फरवरी 2023 को आयोजित प्राथमिक विद्यालय अध्यापक सीधी भर्ती से जुड़ा है।
  • आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज।
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जयपुर | राजस्थान में शिक्षक भर्ती परीक्षाओं को लेकर एक बार फिर बड़ा खुलासा हुआ है। स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG) ने रीट परीक्षा-2022 में बड़ी धांधली पकड़ी है।

एसओजी ने डमी अभ्यर्थियों के जरिए परीक्षा पास कर सरकारी नौकरी हासिल करने वाले 30 शिक्षकों के खिलाफ शिकंजा कसा है। इन सभी के खिलाफ जयपुर के एसओजी थाने में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं।

यह मामला उन अभ्यर्थियों से जुड़ा है जिन्होंने परीक्षा खुद न देकर किसी और को अपनी जगह बैठाया था। जांच के बाद पुख्ता सबूत मिलने पर यह कानूनी कार्रवाई की गई है।

बायोमेट्रिक जांच में हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा

एडीजी एसओजी विशाल बंसल ने इस पूरे मामले की जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि विभाग ने संदिग्ध अभ्यर्थियों के बायोमेट्रिक डेटा का मिलान किया था।

जांच के दौरान पाया गया कि आवेदन पत्र भरने वाले अभ्यर्थियों के फिंगरप्रिंट और फोटो वास्तविक अभ्यर्थियों से मेल नहीं खा रहे थे। इसके बाद गड़बड़ी करने वालों की पहचान की गई।

इन 30 शिक्षकों के खिलाफ डमी अभ्यर्थियों के जरिए परीक्षा दिलवाने के पर्याप्त सबूत एसओजी को मिले हैं। इसके बाद ही उन्हें नामजद कर मुकदमा दर्ज किया गया है।

इन गंभीर धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा

आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसमें धारा 419, 420, 467, 468 और 120बी शामिल हैं।

इसके अलावा राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा (भर्ती परीक्षा में अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम-2022 की धाराओं को भी इस केस में जोड़ा गया है। यह कानून नकल रोकने के लिए काफी सख्त है।

एसओजी की इस कार्रवाई से उन लोगों में हड़कंप मच गया है जिन्होंने गलत तरीके से सरकारी नौकरी प्राप्त की है। पुलिस अब इन शिक्षकों की गिरफ्तारी की तैयारी कर रही है।

25 फरवरी 2023 की परीक्षा से जुड़ा है मामला

यह पूरा मामला प्राथमिक विद्यालय अध्यापक (लेवल प्रथम एवं द्वितीय) सीधी भर्ती परीक्षा-2022 से संबंधित है। इस परीक्षा का आयोजन 25 फरवरी 2023 को किया गया था।

जांच में यह सामने आया कि 30 अभ्यर्थियों ने साजिश के तहत डमी कैंडिडेट्स का सहारा लिया। उन्होंने परीक्षा पास की और वर्तमान में वे सरकारी स्कूलों में शिक्षण कार्य कर रहे थे।

एसओजी की जांच अभी भी जारी है और आशंका जताई जा रही है कि ऐसे अभ्यर्थियों की संख्या और भी बढ़ सकती है। विभाग हर संदिग्ध प्रोफाइल की बारीकी से जांच कर रहा है।

बड़े संगठित गिरोह की भूमिका की आशंका

एसओजी की प्रारंभिक जांच में एक बड़े संगठित गिरोह के शामिल होने के संकेत मिले हैं। यह गिरोह मोटी रकम लेकर डमी कैंडिडेट उपलब्ध कराने का काम करता था।

पुलिस अब इस नेटवर्क की भूमिका खंगाल रही है ताकि गिरोह के सरगना तक पहुंचा जा सके। यह नेटवर्क कई सालों से प्रदेश की भर्ती परीक्षाओं में सक्रिय होने का अनुमान है।

एसओजी की टीमें अब उन डमी कैंडिडेट्स की भी तलाश कर रही हैं, जिन्होंने इन शिक्षकों की जगह बैठकर परीक्षा दी थी। जल्द ही इस मामले में कई गिरफ्तारियां संभव हैं।

राजस्थान में नकल माफिया पर कसता शिकंजा

राजस्थान सरकार और पुलिस प्रशासन पिछले कुछ समय से नकल माफियाओं के खिलाफ बेहद सख्त रुख अपनाए हुए है। हाल ही में कई बड़े खुलासे हुए हैं।

इससे पहले एसआई भर्ती परीक्षा में भी इसी तरह के फर्जीवाड़े सामने आए थे। एसओजी की सक्रियता ने प्रदेश के युवाओं में एक नई उम्मीद जगाई है कि योग्य उम्मीदवारों को ही मौका मिलेगा।

हाल ही में 25 हजार के इनामी आरोपी राजेश रेवाड की गिरफ्तारी भी इसी कड़ी का हिस्सा है। उसकी पत्नी भी पहले ही जेल जा चुकी है, जो परीक्षा धांधली में शामिल थी।

शिक्षा विभाग में मचेगा हड़कंप

इन 30 शिक्षकों पर एफआईआर दर्ज होने के बाद अब शिक्षा विभाग भी अपनी आंतरिक जांच शुरू करेगा। इन सभी शिक्षकों की सेवाओं को समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

सरकारी नौकरी में फर्जीवाड़े के जरिए प्रवेश करने वालों के लिए यह एक कड़ा संदेश है। एसओजी की कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि अपराध चाहे कितना भी पुराना हो, कानून से बचना मुश्किल है।

आने वाले दिनों में एसओजी अन्य भर्ती परीक्षाओं के डेटा का भी मिलान कर सकती है। इससे कई और सफेदपोश चेहरों के बेनकाब होने की संभावना बढ़ गई है।

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