जयपुर | राजस्थान सरकार ने नए वित्तीय वर्ष में प्रदेश के राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों के शीघ्र और समयबद्ध निस्तारण को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाया है। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा की मंशा के अनुरूप मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
इन निर्देशों का मुख्य उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाना है। राज्य सरकार चाहती है कि आमजन को न्याय के लिए लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े। इसके लिए उपखंड और तहसील स्तर से लेकर संभाग स्तर तक के अधिकारियों को विशेष टास्क सौंपे गए हैं।
राजस्व न्यायालयों में जल्द होगा न्याय: राजस्थान: राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों के शीघ्र निस्तारण के लिए मुख्यमंत्री की बड़ी पहल, मुख्य सचिव ने जारी किए निर्देश
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल पर राजस्थान सरकार ने राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए नई रणनीति तैयार की है। मुख्य सचिव ने सभी राजस्व अधिकारियों को रोजाना 4 घंटे अनिवार्य रूप से कोर्ट चलाने और पुराने मामलों को प्राथमिकता देने के निर्देश जारी किए हैं।
HIGHLIGHTS
- मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल पर राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों के निस्तारण के लिए विशेष फोकस रहेगा।
- मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने सभी राजस्व अधिकारियों को प्रत्येक कार्य दिवस में 4 घंटे न्यायालय संचालन के निर्देश दिए हैं।
- 1 अप्रैल 2026 की स्थिति में 100 सबसे पुराने लंबित वादों की सूची बनाकर उनका प्राथमिकता से निस्तारण किया जाएगा।
- अत्यधिक पुराने मामलों में रिकॉर्ड उपलब्ध न कराने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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नियमित न्यायालय संचालन के कड़े निर्देश
मुख्य सचिव द्वारा जारी परिपत्र में स्पष्ट किया गया है कि सभी राजस्व पीठासीन अधिकारी प्रत्येक कार्य दिवस में प्रातः 10:00 बजे से दोपहर 02:00 बजे तक नियमित रूप से न्यायालय का संचालन सुनिश्चित करेंगे। यह समय केवल न्यायिक कार्यों के लिए आरक्षित रहेगा।
अक्सर देखा गया है कि प्रशासनिक व्यस्तताओं के कारण न्यायिक कार्य प्रभावित होते हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए अब समय का कड़ाई से पालन अनिवार्य कर दिया गया है। इससे वादियों और वकीलों को निश्चित समय पर सुनवाई का अवसर मिल सकेगा।
पुराने मामलों के लिए विशेष रणनीति
परिपत्र के अनुसार, उपखण्ड अधिकारी एवं सहायक कलेक्टर 01 अप्रैल 2026 की स्थिति में अपने न्यायालय के 100 सबसे पुराने लंबित वादों की पहचान करेंगे। इन चिन्हित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर चालू वित्तीय वर्ष में ही निस्तारित करने का लक्ष्य रखा गया है।
तीन वर्ष से अधिक पुराने मामलों में नोटिस तामील की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा। यदि आवश्यक हो, तो समाचार पत्रों के माध्यम से भी तामील सुनिश्चित की जाएगी। इससे साक्ष्य और जिरह के बीच होने वाले अनावश्यक अंतराल को कम करने में मदद मिलेगी।
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एसओपी का सख्ती से होगा पालन
राज्य में राजस्व न्यायालयों के लिए पहले से ही मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू है। हालांकि, रिकॉर्ड की अनुपलब्धता और तकनीकी कारणों से इसमें देरी होती रही है। अब मुख्य सचिव ने इस गैप को दूर करने के लिए सघन मॉनिटरिंग के आदेश दिए हैं।
सभी लंबित वादों की मासिक समीक्षा की जाएगी। इसकी प्रगति रिपोर्ट नियमित रूप से राज्य सरकार को भेजी जाएगी। इससे जिला प्रशासन और राजस्व मंडल के बीच समन्वय बेहतर होगा और मामलों के निस्तारण में तेजी आएगी।
लापरवाही पर होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई
मुख्य सचिव ने चेतावनी दी है कि यदि अत्यधिक पुराने मामलों में संबंधित अभिलेख समय पर प्रस्तुत नहीं किए जाते हैं, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। जवाबदेही तय होने से कार्यप्रणाली में सुधार की उम्मीद है।
संभागीय आयुक्त और जिला कलेक्टरों को भी निर्देशित किया गया है कि वे अपने क्षेत्र के न्यायालयों का नियमित निरीक्षण करें। निरीक्षण की रिपोर्ट राजस्व मंडल को भेजी जाएगी, ताकि सिस्टम की कमियों को समय रहते सुधारा जा सके।
आमजन को मिलेगा त्वरित न्याय
इन प्रयासों का सीधा लाभ प्रदेश के उन हजारों किसानों और ग्रामीणों को मिलेगा जिनके मामले सालों से राजस्व अदालतों में लटके हुए हैं। त्वरित न्याय मिलने से न केवल उनका समय बचेगा, बल्कि अदालती खर्चों का बोझ भी कम होगा।
मुख्यमंत्री की इस पहल को राजस्थान में सुशासन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली में सुधार से ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि संबंधी विवादों में कमी आएगी और सामाजिक समरसता को बढ़ावा मिलेगा।
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