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RR मैनेजर मोबाइल विवाद: BCCI की जांच: राजस्थान रॉयल्स के मैनेजर रोमी भिंडर को BCCI का नोटिस, डगआउट में मोबाइल इस्तेमाल पर शुरू हुई औपचारिक जांच

बलजीत सिंह शेखावत

आईपीएल के दौरान डगआउट में मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने पर राजस्थान रॉयल्स के मैनेजर रोमी भिंडर मुश्किलों में घिर गए हैं। बीसीसीआई की एंटी करप्शन यूनिट ने उन्हें नोटिस जारी कर 48 घंटों में जवाब मांगा है, हालांकि सूत्रों ने इसे मेडिकल इमरजेंसी बताया है।

HIGHLIGHTS

  • बीसीसीआई की एंटी करप्शन यूनिट (ACSU) ने रोमी भिंडर को 48 घंटे का नोटिस दिया है।
  • गुवाहाटी में RCB के खिलाफ मैच के दौरान डगआउट में मोबाइल इस्तेमाल का आरोप है।
  • आईपीएल नियमों के तहत डगआउट में केवल टीम विश्लेषक को डिवाइस की अनुमति है।
  • सूत्रों का दावा है कि भिंडर फेफड़ों की बीमारी और अस्थमा के कारण फोन पास रखे हुए थे।
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गुवाहाटी | राजस्थान रॉयल्स (RR) के मैनेजर रोमी भिंडर के लिए आईपीएल का यह सीजन विवादों भरा साबित हो रहा है। डगआउट में मोबाइल फोन के इस्तेमाल को लेकर बीसीसीआई ने अब कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है।

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की एंटी करप्शन यूनिट (ACSU) ने इस मामले में औपचारिक जांच शुरू कर दी है। भिंडर को कारण बताओ नोटिस थमाते हुए 48 घंटों के भीतर स्पष्टीकरण देने को कहा गया है।

नियमों का उल्लंघन और ACSU की कार्रवाई

यह पूरा मामला गुवाहाटी में राजस्थान रॉयल्स और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के बीच खेले गए मैच के दौरान सामने आया। मैच के दौरान भिंडर को डगआउट में मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए कैमरे में कैद किया गया था।

आईपीएल के प्लेयर्स एंड मैच ऑफिशियल्स एरिया (PMOA) के सख्त नियमों के मुताबिक, टीम मैनेजर को केवल ड्रेसिंग रूम के भीतर ही फोन रखने की अनुमति होती है। डगआउट में इसकी मनाही है।

डगआउट में केवल टीम के अधिकृत विश्लेषक (Analyst) को ही विशिष्ट कार्यों के लिए इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का उपयोग करने की छूट दी जाती है। अन्य किसी भी सदस्य के लिए यह नियमों का उल्लंघन माना जाता है।

बीसीसीआई की भ्रष्टाचार निरोधक इकाई खेल की अखंडता बनाए रखने के लिए इन नियमों को बहुत गंभीरता से लेती है। यही कारण है कि भिंडर की इस गतिविधि ने सुरक्षा अधिकारियों का ध्यान तुरंत अपनी ओर खींच लिया।

चेयरमैन अरुण धूमल का बयान

आईपीएल गवर्निंग काउंसिल के चेयरमैन अरुण धूमल ने पुष्टि की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि ACSU से इस घटना की विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।

रिपोर्ट मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा। बीसीसीआई भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाता है, इसलिए सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन हर हाल में अनिवार्य है।

मेडिकल इमरजेंसी का दावा

हालांकि, राजस्थान रॉयल्स के खेमे और सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक, यह मामला केवल लापरवाही का नहीं बल्कि मजबूरी का है। भिंडर के फोन इस्तेमाल के पीछे गंभीर स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया जा रहा है।

सूत्रों का कहना है कि रोमी भिंडर पिछले कुछ समय से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। नागपुर में फेफड़ों की समस्या के कारण उन्हें लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा था।

हाल के दिनों में उनकी सेहत में काफी गिरावट आई है और उनका वजन लगभग 10 किलो तक घट गया है। उन्हें अस्थमा की भी शिकायत है, जिसके कारण डॉक्टरों ने उन्हें शारीरिक श्रम और सीढ़ियां चढ़ने से बचने की सलाह दी है।

बचाव में तर्क और भविष्य की स्थिति

दावा किया जा रहा है कि भिंडर फोन पर कोई बातचीत नहीं कर रहे थे और न ही कॉल उठा रहे थे। वे केवल अपनी सेहत से जुड़े अपडेट्स या जरूरी जानकारी देख रहे थे। उनके पास फोन केवल आपातकालीन स्थिति के लिए था।

ACSU के पूर्व अधिकारियों का मानना है कि विशेष परिस्थितियों में छूट मिल सकती है, लेकिन इसके लिए पहले से अनुमति लेना आवश्यक है। अब सबकी नजरें भिंडर द्वारा दिए जाने वाले जवाब पर टिकी हैं।

भिंडर टीम के साथ एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करते हैं और वे आईपीएल के सभी सुरक्षा प्रोटोकॉल से अच्छी तरह वाकिफ हैं। टीम प्रबंधन का मानना है कि जांच में उनकी बेगुनाही और मजबूरी साबित हो जाएगी।

क्रिकेट जगत में इस विवाद ने एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या आपातकालीन स्थितियों में तकनीकी नियमों में थोड़ा लचीलापन होना चाहिए। फिलहाल, रोमी भिंडर को अपनी सफाई पेश करने के लिए समय दिया गया है।

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