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राजस्थान

181 हेल्पलाइन पर बड़ा एक्शन: राजस्थान संपर्क पोर्टल पर लापरवाही पड़ी भारी: ग्रामीण विकास सचिव ने 4 कर्मचारियों को किया सस्पेंड, 181 पर खुद सुनी जनसुनवाई

जोगेन्द्र सिंह शेखावत

ग्रामीण विकास विभाग के शासन सचिव कृष्ण कुणाल ने राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन (181) का औचक निरीक्षण किया। शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरतने पर चार कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया और लंबित मामलों को जल्द सुलझाने के निर्देश दिए गए।

HIGHLIGHTS

  • शासन सचिव कृष्ण कुणाल ने राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन (181) कंट्रोल रूम का औचक निरीक्षण किया।
  • लापरवाही बरतने पर टोंक, ब्यावर और जोधपुर के 4 कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया।
  • सचिव ने स्वयं परिवादियों से फोन पर बात की और नरेगा जॉब कार्ड व आवास योजना की किश्तों की जानकारी ली।
  • विभाग ने पिछले एक वर्ष में 95 प्रतिशत शिकायतों का सफल निस्तारण कर रिकॉर्ड बनाया है।
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जयपुर | राजस्थान सरकार अब आमजन की समस्याओं को लेकर बेहद गंभीर नजर आ रही है। शासन सचिवालय में हलचल उस समय बढ़ गई जब ग्रामीण विकास विभाग के शासन सचिव श्री कृष्ण कुणाल अचानक राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन (181) के कंट्रोल रूम पहुंच गए।

औचक निरीक्षण और कड़ा एक्शन

शासन सचिव ने वहां पहुंचकर न केवल व्यवस्थाओं का जायजा लिया, बल्कि खुद हेडफोन लगाकर परिवादियों से बात करना शुरू कर दिया। इस दौरान शिकायतों के निस्तारण में भारी लापरवाही सामने आई, जिस पर उन्होंने तुरंत कड़ा रुख अपनाया। सचिव ने टोंक जिले के परिवादी शिवराज और ब्यावर के शेरसिंह से फोन पर संवाद किया। दोनों ने बताया कि महात्मा गांधी नरेगा के तहत जॉब कार्ड के लिए महीनों से आवेदन करने के बाद भी उन्हें कार्ड जारी नहीं किया गया है।

चार कर्मचारी तत्काल निलंबित

मामले की गंभीरता को देखते हुए कृष्ण कुणाल ने मौके पर ही चार कर्मचारियों को सस्पेंड करने के आदेश जारी कर दिए। इसमें टोंक के निवाई से कनिष्ठ सहायक रामसागर मीणा और ब्यावर से ग्राम विकास अधिकारी जितेन्द्र छाबा शामिल हैं। इसके अलावा ब्यावर के ही कनिष्ठ सहायक रामदेव चौधरी और जोधपुर के बिलाड़ा से वरिष्ठ सहायक इन्द्रसिंह को भी निलंबित किया गया है। इन सभी पर पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के निस्तारण में कोताही बरतने का आरोप है।

जनता से सीधा संवाद

निरीक्षण के दौरान सचिव ने केवल कार्रवाई ही नहीं की, बल्कि लोगों की समस्याओं को गहराई से समझा। उन्होंने बारां, बूंदी, झालावाड़ और हनुमानगढ़ जैसे जिलों के लोगों से भी फोन पर बात कर उनका फीडबैक लिया। नागौर के परिवादी राजाराम ने प्रधानमंत्री आवास योजना की तीसरी किश्त न मिलने की शिकायत की थी। सचिव ने जांच में पाया कि आधार ऑथेन्टिकेशन की तकनीकी दिक्कत के कारण पैसा रुका हुआ है। उन्होंने इसे 7 दिन में ठीक करने के निर्देश दिए।

जवाबदेही होगी तय

श्री कुणाल ने स्पष्ट किया कि पोर्टल पर दर्ज हर शिकायत का समाधान गुणवत्तापूर्ण होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि केवल पोर्टल पर केस क्लोज करना काफी नहीं है, बल्कि परिवादी की संतुष्टि सबसे ज्यादा जरूरी है। उन्होंने विभाग की नई योजनाओं को भी 181 पोर्टल पर जोड़ने के निर्देश दिए। सचिव ने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर कार्मिक की लापरवाही मिली, तो उसकी जवाबदेही तय कर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

शानदार रहा है शिकायतों का निस्तारण

कंट्रोल रूम के आंकड़ों के मुताबिक, ग्रामीण विकास विभाग का प्रदर्शन पिछले एक साल में काफी बेहतर रहा है। विभाग में करीब 57,743 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें से 55,339 का निस्तारण किया जा चुका है। यह सफलता दर लगभग 95 प्रतिशत है, जो प्रशासन की सक्रियता को दर्शाती है। विभाग में शिकायतों के निस्तारण की औसत अवधि मात्र 14 दिन है, जिसे और भी कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप कार्य

यह पूरी कवायद मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के निर्देशों का हिस्सा है। मुख्यमंत्री चाहते हैं कि हर विभाग के सचिव नियमित रूप से 181 हेल्पलाइन पर बैठें और जनता की समस्याओं को सीधे सुनकर उनका समाधान करें। इस निरीक्षण के दौरान अतिरिक्त आयुक्त (मनरेगा) श्री जुगल किशोर मीणा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। सरकार की इस सख्ती से सरकारी तंत्र में हड़कंप मचा हुआ है और जनता में विश्वास बढ़ा है।

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