जयपुर | राजस्थान के डेयरी सेक्टर के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी आई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का सपना अब हकीकत बनने जा रहा है। राज्य का अपना 'सरस' ब्रांड अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमाएगा।
सरस बनेगा नेशनल ब्रांड: सरस डेयरी को मिले 1500 करोड़, अब बनेगा नेशनल ब्रांड
केंद्र सरकार ने आरसीडीएफ को दी 1500 करोड़ की सहायता, दुग्ध संकलन में होगा बड़ा इजाफा।
HIGHLIGHTS
- केंद्र सरकार ने आरसीडीएफ को 1500 करोड़ रुपये की सहायता देने पर सैद्धान्तिक सहमति जताई है।
- जीका परियोजना से 1000 करोड़ और एनपीडीडी से 500 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।
- राजस्थान में दुग्ध संकलन क्षमता 45 लाख से बढ़ाकर 65 लाख लीटर प्रतिदिन की जाएगी।
- दिल्ली, हरियाणा और यूपी जैसे पड़ोसी राज्यों में भी सरस नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा।
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केंद्र सरकार ने राजस्थान कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (RCDF) को 1500 करोड़ रुपये की भारी-भरकम सहायता देने पर सैद्धान्तिक सहमति दे दी है। यह फैसला मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया।
इस बड़ी राशि का निवेश डेयरी क्षेत्र के विस्तार, दुग्ध संकलन और प्रसंस्करण क्षमता को बढ़ाने में किया जाएगा। इससे न केवल सरस ब्रांड मजबूत होगा, बल्कि प्रदेश के लाखों पशुपालकों की किस्मत भी चमकने वाली है।
केंद्र सरकार से मिली बड़ी सौगात
केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाली यह राशि दो प्रमुख योजनाओं के माध्यम से आएगी। इसमें जापान इंटरनेशनल कॉर्पोरेशन एजेंसी (जीका) परियोजना के तहत 1000 करोड़ रुपये आवंटित किए जाएंगे।
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इसके अलावा, नेशनल प्रोग्राम फॉर डेयरी डवलपमेन्ट (एनपीडीडी) के अंतर्गत 500 करोड़ रुपये की सहायता दी जाएगी। इस फंड का इस्तेमाल आधुनिक तकनीक और बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने में किया जाएगा ताकि उत्पादन बढ़ सके।
दुग्ध संकलन में आएगी भारी तेजी
वर्तमान में आरसीडीएफ द्वारा प्रतिदिन लगभग 45 लाख लीटर दूध का संकलन किया जा रहा है। नई योजना के लागू होने के बाद इसे बढ़ाकर 65 लाख लीटर प्रतिदिन करने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके साथ ही, राज्य की दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता में भी 20 लाख लीटर प्रतिदिन की बढ़ोतरी की जाएगी। इसका मतलब है कि अब ज्यादा दूध सुरक्षित तरीके से प्रोसेस होकर बाजार तक पहुंचेगा और खराब नहीं होगा।
मुख्यमंत्री की परिकल्पना को मिलेगी नई उड़ान
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पहले ही राज्य स्तरीय बैठकों में डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने के निर्देश दिए थे। अब मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में उन निर्णयों को जमीन पर उतारने की तैयारी पूरी हो गई है।
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने स्पष्ट किया कि सरकार सरस को सिर्फ एक सहकारी संस्था नहीं मानती। इसे एक मजबूत और व्यापक राष्ट्रीय डेयरी ब्रांड के रूप में स्थापित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रदेशभर में नए सरस आउटलेट और डेयरी पार्लर खोले जाएं। साथ ही, प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने के लिए नए प्लांटों की स्थापना की प्रक्रिया को भी तुरंत तेज किया जाए।
एकीकृत वेल्यू चेन का होगा विकास
राजस्थान में दुग्ध उत्पादन, संकलन और विपणन की एक एकीकृत वेल्यू चेन विकसित की जाएगी। इससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और दुग्ध उत्पादकों को उनके पसीने की सही कीमत सीधे उनके बैंक खातों में मिल सकेगी।
बैठक में केंद्र सरकार से राज्य के दुग्ध उत्पादकों को लाभान्वित करने के लिए अपेक्षित आर्थिक एवं तकनीकी सहयोग का आग्रह किया गया। राजस्थान में डेयरी विकास की अपार संभावनाओं को देखते हुए यह जरूरी है।
"राजस्थान में डेयरी क्षेत्र के प्रभावी क्रियान्वयन और एनपीडीडी योजना के 100 प्रतिशत सफल कार्यान्वयन के लिए आरसीडीएफ की सराहना की जाती है। केंद्र सरकार सरस को राष्ट्रीय ब्रांड बनाने में हर संभव मदद करेगी।" - नरेश पाल गंगवार
राष्ट्रीय ब्रांड के रूप में सरस की नई पहचान
सरस का नेटवर्क अब केवल राजस्थान तक ही सीमित नहीं रहेगा। इसका विस्तार पड़ोसी राज्यों जैसे दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में भी किया जाएगा। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
राज्य के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों, पर्यटन केंद्रों, सरकारी कार्यालयों और शिक्षण संस्थानों में भी नए सरस डेयरी बूथ खोले जाएंगे। इसके लिए सरस पार्लर और सरस प्लाजा का आधुनिक मॉडल अपनाया जाएगा जो आकर्षक होगा।
जनजातीय और सूखा प्रभावित क्षेत्रों को विशेष लाभ
केंद्र सरकार ने राजस्थान के जनजातीय और सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष सहायता देने पर भी सहमति जताई है। इन क्षेत्रों में दुग्ध संकलन बढ़ाने के लिए विशेष और कड़े प्रयास किए जाएंगे।
इन इलाकों में नए बल्क मिल्क कूलर लगाए जाएंगे। साथ ही पशुओं की नस्ल सुधार और स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए अतिरिक्त फंड का प्रावधान किया गया है ताकि वहां के किसानों को लाभ हो।
राजस्थान: दुग्ध उत्पादन में देश का सिरमौर
आरसीडीएफ की एमडी श्रुति भारद्वाज ने बताया कि राजस्थान वर्तमान में दुग्ध उत्पादन और प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता में देश में दूसरे स्थान पर है। राज्य में हर दिन करीब 10 करोड़ किलोग्राम दूध उत्पादित होता है।
वर्तमान में प्रदेश में 20 हजार से अधिक डेयरी सहकारी समितियां सक्रिय हैं। ये समितियां ग्राम स्तर पर किसानों को सीधा सहयोग और संकलन की सुविधा प्रदान कर रही हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पहले से अधिक मजबूत हो रही है।
भविष्य की कार्ययोजना में पर्यावरण अनुकूल और सतत विकास मॉडल को अपनाने पर जोर दिया गया है। इसमें सौर ऊर्जा का उपयोग और कचरा प्रबंधन जैसी आधुनिक तकनीकों को डेयरी प्लांटों में शामिल किया जाएगा।
नस्ल सुधार से बढ़ेगी पशुपालकों की आय
राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के चेयरमैन मीनेश शाह ने बैठक में नस्ल सुधार कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि उच्च गुणवत्ता वाले पशुधन से ही डेयरी क्षेत्र का दीर्घकालिक विकास संभव है।
पशुओं के स्वास्थ्य और उनकी नस्ल पर ध्यान देने से दूध की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में सुधार होगा। इससे किसानों की लागत कम होगी और मुनाफा कई गुना बढ़ जाएगा, जिससे उनका जीवन स्तर सुधरेगा।
बैठक में केंद्र सरकार की अतिरिक्त सचिव सुश्री वर्षा जोशी और पशुपालन निदेशक सुरेश मीणा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सभी ने राजस्थान के डेयरी मॉडल की सराहना की और भविष्य के रोडमैप पर चर्चा की।
इस 1500 करोड़ रुपये के निवेश से राजस्थान की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नया संबल मिलेगा। सरस का राष्ट्रीय ब्रांड बनना न केवल गौरव की बात है, बल्कि यह प्रदेश के लाखों परिवारों की आर्थिक समृद्धि का द्वार भी खोलेगा।
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