जयपुर | राजस्थान के शेखावाटी अंचल के निवासियों के लिए एक बहुत बड़ी और सुखद खबर सामने आ रही है। राज्य के जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने मंगलवार को उत्तराखंड का दौरा किया।
शेखावाटी को मिलेगा यमुना का पानी: राजस्थान के शेखावाटी में मिटेगी प्यास, मंत्री ने जांची बांध की प्रगति
जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने उत्तराखंड में लखवार बांध का निरीक्षण कर कार्यों की समीक्षा की।
HIGHLIGHTS
- लखवार बांध से शेखावाटी को मिलेगा 30.91 एमसीएम अतिरिक्त पानी।
- राजस्थान सरकार ने परियोजना के लिए अब तक 53 करोड़ रुपए का भुगतान किया।
- रेणुका और किसाऊ बांध परियोजनाओं से भी राज्य को मिलेगा बड़ा जल लाभ।
- यमुना जल समझौते के तहत राजस्थान की 9.338 प्रतिशत हिस्सेदारी सुनिश्चित।
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वहां उन्होंने निर्माणाधीन लखवार बांध परियोजना का बहुत ही बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य यमुना जल समझौते के तहत राजस्थान को मिलने वाले पानी की स्थिति का जायजा लेना था।
मंत्री रावत ने उत्तराखंड और राजस्थान दोनों राज्यों के उच्चाधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक भी की। उन्होंने लखवार परियोजना की वर्तमान स्थिति और राजस्थान को मिलने वाले लाभों पर विस्तृत चर्चा की।
लखवार बांध परियोजना और राजस्थान की हिस्सेदारी
लखवार परियोजना उत्तराखंड में यमुना नदी पर ताजेवाला हैडवर्क्स के अपस्ट्रीम में बनाई जा रही है। यह केंद्र सरकार की एक अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय महत्व की योजना मानी जा रही है।
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इस विशाल परियोजना की कुल भंडारण क्षमता लगभग 331 एमसीएम निर्धारित की गई है। इसमें राजस्थान की हिस्सेदारी भी तय है। जिससे प्रदेश के सूखे इलाकों को काफी ज्यादा फायदा मिलने वाला है।
समझौते के अनुसार, राजस्थान को अपनी हिस्सेदारी के रूप में लगभग 30.91 एमसीएम जल प्राप्त होगा। इससे शेखावाटी अंचल के जिलों में पेयजल और सिंचाई की समस्या का स्थायी समाधान संभव हो सकेगा।
मंत्री रावत ने कार्यों को पूरी गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के साथ समय पर पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस परियोजना को लेकर बेहद गंभीर और संकल्पित है।
वित्तीय योगदान और बजट का प्रावधान
मंत्री ने बताया कि राजस्थान सरकार ने अपने हिस्से के 107 करोड़ रुपए में से 53 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया है। यह राशि उत्तराखंड सरकार को मांग के अनुसार दी गई है।
शेखावाटी तक पानी लाने के लिए सरकार ने बड़े स्तर पर वित्तीय योजना तैयार की है। बजट 2026-27 में इस क्षेत्र के जल कार्यों के लिए 32 हजार करोड़ रुपए की घोषणा की गई है।
इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से यमुना बेसिन में जल संरक्षण की क्षमता काफी बढ़ जाएगी। इससे राजस्थान को पेयजल और सिंचाई के लिए भविष्य में कभी पानी की कमी नहीं होगी।
"राज्य के हितों की प्रभावी पैरवी करना हमारी सरकार की प्राथमिकता है। हम चाहते हैं कि शेखावाटी के किसानों और आम जनता को उनके हक का पूरा पानी जल्द मिले।"
रेणुका और किसाऊ बांध परियोजनाओं का महत्व
मंत्री रावत ने हिमाचल प्रदेश में गिरि नदी पर बन रही रेणुका परियोजना का भी जिक्र किया। यह यमुना बेसिन की एक और महत्वपूर्ण कड़ी है जिसकी क्षमता 498 एमसीएम है।
इस परियोजना में राजस्थान को लगभग 46.50 एमसीएम जल की हिस्सेदारी प्राप्त होगी। राजस्थान सरकार ने इस परियोजना के लिए अपने हिस्से के 108 करोड़ रुपए का पूर्ण भुगतान कर दिया है।
इसके अलावा, टोन्स नदी पर प्रस्तावित किसाऊ परियोजना से भी राजस्थान को बड़ी उम्मीदें हैं। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश मिलकर इसे तैयार कर रहे हैं। इसकी क्षमता 1324 एमसीएम होगी।
किसाऊ परियोजना के माध्यम से राजस्थान को लगभग 123.64 एमसीएम जल प्राप्त होने का प्रावधान है। इसके क्रियान्वयन से राज्य में नियमित जल उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी और कृषि को बल मिलेगा।
यमुना जल समझौता और हथिनीकुंड की भूमिका
वर्ष 1994 के ऐतिहासिक यमुना जल समझौते के तहत राजस्थान को यमुना के पानी में 9.338 प्रतिशत हिस्सेदारी दी गई है। इसी समझौते को पूर्ण रूप से लागू करने का प्रयास हो रहा है।
हथिनीकुंड बैराज इस पूरी जल वितरण व्यवस्था का सबसे प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहीं से विभिन्न राज्यों को समझौते के अनुसार उनके हिस्से का जल आवंटित और छोड़ा जाता है।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने बांध निर्माण, सुरंगों की खुदाई और पर्यावरणीय प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी। मंत्री ने तकनीकी विशेषज्ञों से परियोजना की प्रगति की बारीकी से रिपोर्ट भी ली।
इस महत्वपूर्ण निरीक्षण और सरकार की सक्रियता से राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में सुनहरे भविष्य की उम्मीद जगी है। जल संसाधन विभाग अब इन कार्यों को गति देने में जुटा हुआ है।
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