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राजस्थान

दुर्लभ गिद्ध का सफल रेस्क्यू: जैसलमेर के लाठी में मिला दुर्लभ प्रजाति का घायल गिद्ध, वन्यजीव प्रेमियों ने मानवता दिखाकर बचाई जान, वन विभाग कर रहा उपचार

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जैसलमेर के लाठी क्षेत्र के रतन की बस्सी गांव के पास एक दुर्लभ प्रजाति का गिद्ध घायल अवस्था में मिला है। वन्यजीव प्रेमियों ने इसे प्राथमिक उपचार के बाद वन विभाग को सौंप दिया है।

HIGHLIGHTS

  • जैसलमेर के लाठी क्षेत्र के रतन की बस्सी गांव के पास मिला दुर्लभ प्रजाति का घायल गिद्ध।
  • वन्यजीव प्रेमी इन्दरसिंह और कंवरराजसिंह ने घायल पक्षी को सड़क किनारे तड़पते देखा।
  • गिद्ध का एक पंख टूटा हुआ था और वह शारीरिक कमजोरी के कारण उड़ने में असमर्थ था।
  • प्राथमिक उपचार के बाद गिद्ध को लाठी वन विभाग के वनरक्षक महेश बिश्नोई को सौंपा गया।
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लाठी | राजस्थान के जैसलमेर जिले के लाठी क्षेत्र में मानवता और वन्यजीव प्रेम की एक अनूठी मिसाल देखने को मिली है। यहां के रतन की बस्सी गांव के पास एक दुर्लभ प्रजाति का गिद्ध घायल अवस्था में मिला।

यह गिद्ध सड़क किनारे असहाय स्थिति में पड़ा हुआ था और दर्द से तड़प रहा था। इसी दौरान वहां से गुजर रहे जागरूक वन्यजीव प्रेमियों की नजर उस पर पड़ी।

वन्यजीव प्रेमियों ने बिना समय गंवाए इस दुर्लभ पक्षी की मदद करने का फैसला किया। उन्होंने तुरंत उसे सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और उसके जीवन को बचाने की कवायद शुरू की।

राहगीरों ने दिखाई संवेदनशीलता

जानकारी के अनुसार, सिनावड़ा गांव के निवासी इन्दरसिंह और कंवरराजसिंह अपने निजी वाहन से लाठी से अपने गांव की ओर जा रहे थे।

सफर के दौरान जब वे रतन की बस्सी गांव के पास पहुंचे, तो उन्हें सड़क के किनारे कुछ हलचल महसूस हुई। पास जाकर देखा तो वहां एक विशालकाय गिद्ध पड़ा था।

गिद्ध की हालत काफी नाजुक लग रही थी। वह बार-बार उड़ने की कोशिश कर रहा था, लेकिन सफल नहीं हो पा रहा था। उसकी तड़प देख दोनों का दिल पसीज गया।

गंभीर रूप से घायल था पक्षी

वन्यजीव प्रेमियों ने जब गिद्ध का बारीकी से निरीक्षण किया, तो पाया कि उसका एक पंख बुरी तरह से टूटा हुआ था।

पंख टूटने के कारण वह अपना संतुलन नहीं बना पा रहा था। इसके अलावा, वह शारीरिक रूप से भी काफी कमजोर नजर आ रहा था।

संभवतः वह पिछले कुछ समय से भूखा-प्यासा था और चोट के कारण शिकार करने या भोजन तलाशने में असमर्थ था। उसकी आंखों में बेबसी साफ झलक रही थी।

अस्पताल पहुंचाकर कराया उपचार

इन्दरसिंह और कंवरराजसिंह ने अपनी जिम्मेदारी समझते हुए घायल गिद्ध को सावधानीपूर्वक अपने वाहन में रखा। वे उसे तुरंत लाठी स्थित पशु अस्पताल ले गए।

पशु अस्पताल में मौजूद चिकित्सकों ने गिद्ध का प्राथमिक उपचार किया। उसके घावों की सफाई की गई और जरूरी दवाइयां दी गईं ताकि संक्रमण न फैले।

प्राथमिक उपचार मिलने के बाद गिद्ध की स्थिति में थोड़ा सुधार देखा गया। हालांकि, उसे अभी भी विशेषज्ञ देखरेख और लंबे इलाज की जरूरत थी।

वन विभाग को किया सुपुर्द

अस्पताल में शुरुआती इलाज के बाद, वन्यजीव प्रेमियों ने इसकी सूचना स्थानीय वन विभाग को दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम सक्रिय हो गई।

घायल गिद्ध को लाठी वन विभाग के वनरक्षक महेश बिश्नोई के सुपुर्द कर दिया गया। वन विभाग ने पक्षी को अपने संरक्षण में ले लिया है।

अब लाठी वन विभाग के केंद्र में इस दुर्लभ गिद्ध की विशेष देखरेख की जा रही है। वन विभाग के कर्मचारी उसकी डाइट और रिकवरी पर नजर रख रहे हैं।

दुर्लभ प्रजातियों का संरक्षण जरूरी

जैसलमेर का रेगिस्तानी इलाका अपनी जैव विविधता के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। यहां गिद्धों की कई ऐसी प्रजातियां पाई जाती हैं जो लुप्त होने की कगार पर हैं।

गिद्धों को प्रकृति का 'सफाईकर्मी' कहा जाता है। ये मृत जानवरों के अवशेषों को खाकर पर्यावरण को स्वच्छ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

अगर गिद्धों की संख्या कम होती है, तो पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बिगड़ सकता है। इसलिए इनका संरक्षण करना न केवल वन विभाग बल्कि आम नागरिकों का भी कर्तव्य है।

ग्रामीणों की जागरूकता की सराहना

इस रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद स्थानीय प्रशासन और वन्यजीव विशेषज्ञों ने इन्दरसिंह और कंवरराजसिंह के कार्यों की जमकर सराहना की है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते गिद्ध को उपचार नहीं मिलता, तो उसकी जान जा सकती थी। रेगिस्तानी इलाकों में अक्सर आवारा कुत्ते ऐसे घायल पक्षियों पर हमला कर देते हैं।

ग्रामीणों की सजगता ने आज एक दुर्लभ जीव को नई जिंदगी दी है। यह घटना अन्य लोगों को भी वन्यजीव संरक्षण के प्रति प्रेरित करेगी।

वन विभाग की आगे की योजना

वनरक्षक महेश बिश्नोई ने बताया कि गिद्ध के पंख की चोट गहरी है। इसे पूरी तरह ठीक होने में कुछ सप्ताह का समय लग सकता है।

जब तक गिद्ध पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो जाता और दोबारा उड़ने लायक नहीं बन जाता, उसे वन विभाग की निगरानी में ही रखा जाएगा।

पूरी तरह रिकवर होने के बाद, उच्च अधिकारियों के निर्देशानुसार उसे वापस उसके प्राकृतिक आवास यानी जंगल में छोड़ दिया जाएगा।

रेगिस्तान में वन्यजीवों के लिए चुनौतियां

जैसलमेर जैसे शुष्क क्षेत्रों में वन्यजीवों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। पानी की कमी और बिजली के तारों की चपेट में आना प्रमुख समस्याएं हैं।

अक्सर बड़े पक्षी जैसे गिद्ध और गोडावण ऊंचे बिजली के तारों से टकराकर घायल हो जाते हैं। इसके लिए सरकार और विभाग लगातार प्रयास कर रहे हैं।

इस घायल गिद्ध का मिलना भी एक संकेत है कि हमें अपने प्राकृतिक परिवेश के प्रति और अधिक संवेदनशील होने की आवश्यकता है।

निष्कर्ष

लाठी में हुए इस रेस्क्यू ने यह साबित कर दिया है कि इंसानियत आज भी जिंदा है। वन्यजीव प्रेमियों का यह कदम काबिले तारीफ है।

हम सभी को चाहिए कि यदि कहीं भी कोई मूक प्राणी घायल अवस्था में मिले, तो उसकी मदद करें या संबंधित विभाग को सूचित करें।

प्रकृति की सुंदरता इन बेजुबान पक्षियों और जानवरों से ही है। इनके बिना हमारा पर्यावरण अधूरा और असुरक्षित है।

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