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राजस्थान

रविंद्र सिंह भाटी की तबीयत बिगड़ी: बाड़मेर: धरने पर विधायक भाटी की तबीयत बिगड़ी, दी चेतावनी

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बाड़मेर के गिरल में 8 दिनों से धरने पर बैठे विधायक रविंद्र सिंह भाटी की तबीयत बिगड़ी।

HIGHLIGHTS

  • भीषण गर्मी के बीच 8 दिनों से धरने पर बैठे विधायक रविंद्र सिंह भाटी की तबीयत बिगड़ी।
  • आरएसएमएमएल (RSMML) के खिलाफ ग्रामीणों की मांगों को लेकर चल रहा है आंदोलन।
  • विधायक ने कहा कि जेल छोटी पड़ जाएगी, हिम्मत है तो प्रशासन उन्हें जेल भेज दे।
  • श्रमिकों को 8 घंटे के वेतन पर 12 घंटे काम करवाने का लगाया गंभीर आरोप।
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बाड़मेर | राजस्थान के बाड़मेर जिले के शिव विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी की तबीयत अचानक बिगड़ गई है। वे पिछले आठ दिनों से गिरल गांव में धरने पर बैठे हैं।

भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच खुले आसमान के नीचे बैठे भाटी को बुधवार रात करीब 8:30 बजे स्वास्थ्य संबंधी समस्या हुई। इसके बाद पीएचसी से डॉक्टरों को बुलाया गया।

डॉक्टरों ने धरना स्थल पर ही विधायक को ड्रिप चढ़ाई और प्राथमिक उपचार दिया। उपचार के बाद उनकी स्थिति में सुधार बताया जा रहा है, लेकिन वे अभी भी धरना स्थल पर ही डटे हैं।

आरएसएमएमएल के खिलाफ ग्रामीणों का आक्रोश

यह आंदोलन राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड (RSMML) के खिलाफ पिछले एक महीने से चल रहा है। स्थानीय ग्रामीण अपनी विभिन्न मांगों को लेकर कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं।

विधायक रविंद्र सिंह भाटी आठ दिन पहले इस आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे थे। तब से वे ग्रामीणों के साथ दिन-रात वहीं रहकर उनके अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं।

भाटी का कहना है कि यह केवल कुछ मजदूरों की नौकरी का सवाल नहीं है। यह पूरे क्षेत्र के सम्मान और स्थानीय युवाओं के अधिकारों की एक बहुत बड़ी लड़ाई है।

श्रमिकों के शोषण का लगाया आरोप

धरना स्थल पर मौजूद समर्थकों को संबोधित करते हुए विधायक भाटी ने कंपनी प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यहां श्रमिकों का मानसिक और आर्थिक शोषण किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि कंपनी मजदूरों से रोजाना 12-12 घंटे तक काम करवा रही है। इसके बावजूद उन्हें केवल 8 घंटे का ही वेतन दिया जा रहा है, जो सरासर गैर-कानूनी है।

भाटी ने मांग की है कि 100 से अधिक जिन ड्राइवरों को नौकरी से निकाला गया है, उन्हें तुरंत काम पर वापस लिया जाए। साथ ही स्थानीय युवाओं को रोजगार दिया जाए।

प्रशासन को दी खुली चेतावनी

विधायक ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि उनकी शालीनता को उनकी कमजोरी न समझा जाए। वे हर स्थिति के लिए तैयार हैं।

भाटी ने कहा, "सड़कें जाम करना हमें भी अच्छी तरह आता है। अभी मैं यहां अकेला बैठा हूं, लेकिन अगर लोगों को बुला लिया तो स्थिति संभालना बहुत मुश्किल होगा।"

जेल मेरे लिए बहुत छोटी पड़ जाएगी। अगर प्रशासन में हिम्मत है तो वह मुझे जेल भेजकर दिखाए। मैं अपने लोगों के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हूं।

भीषण गर्मी में डटे हैं आंदोलनकारी

पश्चिमी राजस्थान में इन दिनों तापमान 45 डिग्री के पार जा रहा है। भीषण हीटवेव के बावजूद बड़ी संख्या में ग्रामीण धरना स्थल पर पहुंचकर विधायक का समर्थन कर रहे हैं।

विधायक भाटी भी पिछले आठ दिनों से ग्रामीणों के साथ खुले आसमान के नीचे ही सो रहे हैं। वे भीषण गर्मी की परवाह किए बिना अपनी मांगों पर अडिग बने हुए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि आरएसएमएमएल के अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल वार्ता के लिए आया था। हालांकि, उनकी तरफ से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलने के कारण यह बातचीत पूरी तरह विफल रही।

क्षेत्रीय मुद्दों पर मुखर हुए भाटी

रविंद्र सिंह भाटी ने कहा कि वे नफा-नुकसान की गणना करने वाले राजनेता नहीं हैं। वे अपने क्षेत्र की जनता के साथ मजबूती से खड़े रहने वाले एक साधारण सेवक हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक ग्रामीणों की सभी जायज मांगें पूरी नहीं हो जातीं, धरना समाप्त नहीं होगा। चाहे इसके लिए उन्हें एक महीना और क्यों न बैठना पड़े।

आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में श्रमिकों के लिए 8 घंटे की ड्यूटी और नियमानुसार सभी सुविधाएं शामिल हैं। प्रशासन अब इस संवेदनशील मामले में मध्यस्थता की नई कोशिश कर रहा है।

स्थानीय रोजगार की मांग हुई तेज

इस आंदोलन का मुख्य केंद्र स्थानीय युवाओं को माइंस में रोजगार दिलाना है। ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी द्वारा बाहर के लोगों को काम में प्राथमिकता दी जा रही है।

भाटी ने चेतावनी दी कि अगर समय रहते कोई ठोस समाधान नहीं निकला, तो पूरे जिले में आंदोलन तेज किया जाएगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी सीधे तौर पर प्रदेश सरकार की होगी।

निष्कर्ष और भविष्य की रणनीति

रविंद्र सिंह भाटी का यह आंदोलन बाड़मेर की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकता है। उनकी बिगड़ती तबीयत के बावजूद उनका अडिग रहना समर्थकों में नया जोश भर रहा है।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन और आरएसएमएमएल प्रबंधन इस गतिरोध को समाप्त करने के लिए क्या कदम उठाते हैं। फिलहाल क्षेत्र में एक तनावपूर्ण शांति बनी हुई है।

यह आंदोलन अब केवल रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय स्वाभिमान का प्रतीक बन चुका है। आने वाले दिनों में यह विवाद और अधिक गहरा सकता है।

विधायक भाटी के कड़े तेवर और प्रशासन की चुप्पी के बीच बाड़मेर की जनता की नजरें अब अगले घटनाक्रम पर टिकी हैं। आंदोलन को चारों तरफ से समर्थन मिल रहा है।

*Edit with Google AI Studio

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